निम्नलिखित में से भारत का कौन-सा मंदिर “ब्लैक पैगोडा” (Black Pagoda) कहलाता है ?
- (a)जगन्नाथ मंदिर, पुरी
- (b)सूर्य मंदिर, कोणार्क
- (c)कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी
- (d)कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) सूर्य मंदिर, कोणार्क।
यह नाम नाविकों का दिया हुआ है। बंगाल की खाड़ी में चलने वाले यूरोपीय नाविक ओड़िशा तट के दो बड़े मंदिरों को दिशा-चिह्न के रूप में काम में लेते थे और उन्हें रंग से अलग पहचानते थे: कोणार्क का सूर्य मंदिर, जो गहरे रंग के खोंडालाइट और लेटराइट से बना है और तट के पास खड़ा है, उनके लिए 'ब्लैक पैगोडा' था, और पुरी का जगन्नाथ मंदिर, जो चूने के प्लास्टर से हल्के रंग का दिखता है, 'व्हाइट पैगोडा'। ये नाम यूरोपीय समुद्री मानचित्रों और यात्रा-विवरणों में चढ़ गए और तभी से इन दोनों भवनों के साथ चिपके हुए हैं। उस काल में 'पैगोडा' किसी भी भारतीय मंदिर के लिए यूरोपीय लोगों का सामान्य शब्द था, इसलिए यह जोड़ी वर्णनात्मक है, धार्मिक नहीं — और यही इस प्रश्न का असली बिंदु है।
मंदिर स्वयं तेरहवीं शताब्दी में, लगभग 1250 ईस्वी में, पूर्वी गंग वंश के नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया और वह सूर्य को समर्पित है। इसकी परिकल्पना भारतीय स्थापत्य में अनूठी है: पूरी संरचना सूर्य के रथ के रूप में गढ़ी गई है, जिसके अधिष्ठान पर चौबीस विशाल पाषाण-चक्र तराशे गए हैं और आगे घोड़ों की जोड़ियाँ ज़ोर लगाती दिखती हैं। मुख्य शिखर बहुत पहले गिर चुका है, और आज जो खड़ा है वह मुख्यतः जगमोहन यानी सभा-मंडप है, उसके साथ अधिष्ठान, चक्र और मूर्तिकला। 1984 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में रखा गया।
प्रश्न सीधी पहचान का है, और चारों विकल्प प्रथम श्रेणी के असली मंदिर हैं — यही उसे सावधानी के योग्य बनाता है: सही उत्तर सूची का सबसे प्रसिद्ध मंदिर नहीं है, बल्कि वह है जिससे यह विशिष्ट नाम जुड़ा हुआ है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)जगन्नाथ मंदिर, पुरी — पुरी का जगन्नाथ मंदिर 'व्हाइट पैगोडा' है, 'ब्लैक पैगोडा' नहीं — नाविकों की उसी जोड़ी का दूसरा आधा, और यही इसे स्वाभाविक जाल बनाता है। उसका शिखर लगभग साठ मीटर ऊँचा है, वह भी तट के पास ही खड़ा है, कोणार्क से लगभग पैंतीस किलोमीटर दूर, और वह भी जहाज़रानी के लिए दिशा-चिह्न का काम करता था। मंदिर बारहवीं शताब्दी का है, जिसे पूर्वी गंग वंश के अनंतवर्मन चोडगंग ने आरंभ कराया और उनके उत्तराधिकारियों ने पूरा किया, और वही रथयात्रा का केंद्र है। जिस अभ्यर्थी को केवल इतना याद है कि ओड़िशा तट के किसी मंदिर को यूरोपीय नाविक पैगोडा कहते थे, पर यह याद नहीं कि कौन-सा रंग किसका, उसके लिए यहाँ अंक खोने की आधी संभावना बनी रहती है।
- (c)कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी — कामाख्या मंदिर असम में गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर है और उपमहाद्वीप के सबसे महत्वपूर्ण शाक्त तीर्थों में गिना जाता है; वह देवी कामाख्या से और अंबुबाची मेले से जुड़ा है। उसकी वर्तमान संरचना मुख्यतः सोलहवीं शताब्दी की है, जो पहले के विध्वंस के बाद कोच आश्रय में पुनर्निर्मित हुई। वह भीतरी भूभाग में, ब्रह्मपुत्र के किनारे है, किसी भी समुद्री मार्ग से सैकड़ों किलोमीटर दूर, और वह बंगाल की खाड़ी में जहाज़रानी के लिए दिशा-चिह्न कभी बन ही नहीं सकता था — जबकि प्रश्न में जिस नाम की बात है उसका पूरा आधार यही है। इसलिए यह विकल्प केवल एक प्रसिद्ध नाम है, इस प्रश्न से उसका कोई संबंध नहीं।
- (d)कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो — खजुराहो का कंदरिया महादेव चंदेलों द्वारा बनाए गए पश्चिमी समूह का सबसे बड़ा और सबसे अलंकृत मंदिर है, जो लगभग 1030 ईस्वी का है और शिव को समर्पित है। वह पूर्ण विकसित नागर शैली का मानक उदाहरण है, जिसमें ऊपर चढ़ते हुए उपशिखरों का समूह और मूर्तिकला की पट्टियाँ हैं। वह मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड पठार के बीच में, तट से बहुत दूर है, और उसका पत्थर गहरे रंग का नहीं बल्कि हलके पीले रंग का बलुआ पत्थर है। न उसकी स्थिति और न उसका रूप उस नाम से कोई संबंध रखता है जिसकी यहाँ बात हो रही है — दोनों कसौटियों पर यह विकल्प एक साथ गिरता है।
अवधारणा
ओड़िशा तट के इन दोनों मंदिरों को जोड़े के रूप में सीखना सबसे अच्छा है, क्योंकि परीक्षक का प्रश्न लगभग हमेशा यही होता है कि कौन-सा कौन है।
कोणार्क, ब्लैक पैगोडा। लगभग 1250 ईस्वी में पूर्वी गंग वंश के नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित; सूर्य को समर्पित; सूर्य के रथ के रूप में परिकल्पित, चौबीस तराशे हुए चक्रों और घोड़ों की जोड़ियों के साथ; मुख्यतः गहरे खोंडालाइट, लेटराइट और क्लोराइट से बना। मुख्य देउल गिर चुका है और जो बचा है वह मुख्यतः जगमोहन है। यूनेस्को विश्व धरोहर, 1984।
पुरी, व्हाइट पैगोडा। जगन्नाथ मंदिर, जिसका आरंभ बारहवीं शताब्दी में अनंतवर्मन चोडगंग ने कराया; चूने के प्लास्टर के कारण हल्के रंग का; जगन्नाथ पंथ और वार्षिक रथयात्रा का केंद्र।
दोनों नागर क्रम की कलिंग शैली के हैं, जिसकी शब्दावली जान लेना काम आता है क्योंकि ये पेपर उसका प्रयोग करते हैं: देउल या रेखा-देउल गर्भगृह का शिखर है, जगमोहन उसके सामने का सभा-मंडप, नटमंदिर नृत्य-मंडप और भोगमंडप भोग-मंडप, और चारों एक ही अक्ष पर क्रम से रखे जाते हैं। भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर इस शैली का सबसे पूर्ण बचा हुआ उदाहरण है।
इससे बड़ी बात यह है कि भारतीय स्मारकों के यूरोपीय नाम प्रायः यह दर्ज करते हैं कि किसी विशेष काल के किसी विशेष विदेशी दर्शक को वे कैसे दिखे — समुद्र से देखे गए ब्लैक और व्हाइट पैगोडा, महाबलिपुरम के लिए सेवन पैगोडाज़, और एलिफ़ेंटा, जिसका नाम पुर्तगालियों को द्वीप पर मिले एक पत्थर के हाथी से पड़ा। ऐसे नाम ठीक इसलिए पूछे जाते हैं कि वे मनमाने हैं: स्मारक के बारे में कुछ भी जानकर उन्हें तर्क से नहीं निकाला जा सकता, इसलिए उन्हें याद ही करना पड़ता है।
मंदिर की पहचान इन पेपरों के कला-संस्कृति खंड की नियमित विशेषता है, और प्रश्न तीन रूपों में आते हैं — कौन-सा मंदिर किसी दिए हुए नाम से पुकारा जाता है, कौन-सा राजवंश किसी मंदिर का निर्माता है, और किसी मंदिर के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है। यह प्रश्न पहले प्रकार का है और यूरोपीय उपनामों में सबसे प्रसिद्ध पर बैठाया गया है।
विकल्प-सूची इस तरह बनी है कि वह देश भर में फैली हो: एक मंदिर तटीय ओड़िशा से, जो उत्तर है; एक तटीय ओड़िशा से ही, जो जाल है; एक असम से और एक मध्य प्रदेश से। इस फैलाव का अर्थ यह है कि जो अभ्यर्थी केवल इतना जानता है कि यह नाम नाविकों का दिया हुआ है, उसने ही क्षेत्र को दो तक सीमित कर लिया — क्योंकि गुवाहाटी और खजुराहो, दोनों में से कोई समुद्र से दिखाई देने वाला स्थान नहीं है।
छपे हुए प्रश्न की एक बात: नाम 'ब्लैक पैगोडा' पहले देवनागरी में और फिर कोष्ठक में लैटिन लिपि में, दोनों रूपों में छपा है, और देवनागरी रूप युग्म-उद्धरण चिह्नों के भीतर है। हर विकल्प मंदिर और स्थान की एक जोड़ी है जिनके बीच अल्पविराम है। वह अल्पविराम एक ही विकल्प के दो हिस्सों को जोड़ता है, दो सूचियों के बीच का सुमेलन नहीं है — यह ध्यान से पढ़ने योग्य है, क्योंकि इसी पुस्तिका में आगे सूची-सुमेलन वाले प्रश्न भी हैं जहाँ ठीक ऐसी ही दिखने वाली छपाई का अर्थ बिलकुल दूसरा होता है।
मुख्य तथ्य
- बंगाल की खाड़ी के यूरोपीय नाविकों ने कोणार्क के सूर्य मंदिर को उसके गहरे रंग के पत्थर के कारण 'ब्लैक पैगोडा' और पुरी के जगन्नाथ मंदिर को उसके चूना-प्लास्टर वाले हल्के रूप के कारण 'व्हाइट पैगोडा' कहा; दोनों तटीय दिशा-चिह्न का काम करते थे।
- कोणार्क का मंदिर लगभग 1250 ईस्वी में पूर्वी गंग वंश के नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया और वह सूर्य को समर्पित है; 1984 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित हुआ।
- पूरा मंदिर सूर्य के रथ के रूप में परिकल्पित है, अधिष्ठान पर चौबीस तराशे हुए पाषाण-चक्र और आगे घोड़ों की जोड़ियाँ; मुख्य शिखर गिर चुका है और बची हुई संरचना मुख्यतः जगमोहन है।
- कोणार्क, जगन्नाथ और लिंगराज — तीनों नागर क्रम की कलिंग शैली के हैं, जिसकी इकाइयाँ एक ही अक्ष पर देउल, जगमोहन, नटमंदिर और भोगमंडप के क्रम में रखी जाती हैं।
- गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर नीलाचल पहाड़ी का शाक्त तीर्थ है जिसकी वर्तमान संरचना मुख्यतः सोलहवीं शताब्दी की है, और खजुराहो का कंदरिया महादेव लगभग 1030 ईस्वी का चंदेल मंदिर है जो शिव को समर्पित है।
- भारत के अन्य प्रसिद्ध सूर्य मंदिर — मोढेरा (गुजरात, सोलंकी काल) और मार्तंड (कश्मीर, ललितादित्य मुक्तापीड) — प्रायः कोणार्क के साथ सुमेलन में रखे जाते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पुरी को चुन लेना, क्योंकि वह अधिक प्रसिद्ध है और वह भी तटीय दिशा-चिह्न था; पुरी 'व्हाइट पैगोडा' है और कोणार्क 'ब्लैक पैगोडा'।
- यह मान लेना कि नाम का कोई धार्मिक अर्थ है; यह यूरोपीय नाविकों का दिया हुआ मार्ग-संकेतक उपनाम है, जो पत्थर के रंग पर आधारित है।
- कोणार्क को चंदेलों या चोलों के नाम कर देना, जबकि वह पूर्वी गंग वंश के नरसिंहदेव प्रथम का बनवाया है।
- यह समझ लेना कि कोणार्क में आज जो खड़ा है वह मुख्य गर्भगृह-शिखर है; देउल गिर चुका है और जो बचा है वह मुख्यतः सभा-मंडप है।
- हर विकल्प के भीतर के अल्पविराम को दो सूचियों के बीच का सुमेलन पढ़ लेना, जबकि वह केवल मंदिर को उसके स्थान से अलग कर रहा है।
इन पेपरों में मंदिर वाले प्रश्न एक-उत्तर वाली पहचान होते हैं जिनके चारों विकल्प सुप्रसिद्ध स्मारक होते हैं, और जो ग़लत विकल्प वास्तव में महत्व रखता है वह हमेशा वही होता है जो उत्तर के समान क्षेत्र या समान परंपरा से आता है। कोणार्क बनाम पुरी, एलोरा बनाम एलिफ़ेंटा, खजुराहो बनाम मोढेरा — ये जोड़ियाँ बार-बार लौटती हैं। इसलिए तैयारी स्मारक-दर-स्मारक नहीं, जोड़े-दर-जोड़े करनी चाहिए: हर प्रसिद्ध मंदिर के साथ वह मंदिर याद रखिए जिससे उसे सबसे अधिक भ्रमित किया जाता है, और वह एक तथ्य जो दोनों को अलग करता है। यहाँ वह तथ्य एक रंग है, और दोनों नाम किसी जहाज़ के डेक से दिए गए थे। दूसरा प्रचलित रूप यह है कि किसी एक मंदिर के बारे में तीन या चार कथन देकर उनमें राजवंश, शताब्दी, समर्पण या स्थापत्य-क्रम में से किसी एक को बदल दिया जाए, इसलिए हर बड़े मंदिर के साथ ये चार बातें भी एक इकाई की तरह रखिए।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कोणार्क के सूर्य मंदिर का निर्माण किस शासक ने करवाया था ?
- (a)नरसिंहदेव प्रथम
- (b)अनंतवर्मन चोडगंग
- (c)कपिलेंद्रदेव
- (d)ययाति केसरी
उत्तर(a) नरसिंहदेव प्रथम — पूर्वी गंग वंश के इस शासक ने तेरहवीं शताब्दी में कोणार्क का सूर्य मंदिर बनवाया; अनंतवर्मन चोडगंग उसी वंश के वे शासक हैं जिनके समय पुरी का जगन्नाथ मंदिर बना।
- practice — not a real PYQ
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- (a)लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
- (b)जगन्नाथ मंदिर, पुरी
- (c)मुक्तेश्वर मंदिर, भुवनेश्वर
- (d)सूर्य मंदिर, कोणार्क
उत्तर(b) जगन्नाथ मंदिर, पुरी — कोणार्क को 'ब्लैक पैगोडा' कहने वाले यूरोपीय नाविक पुरी के जगन्नाथ मंदिर को 'व्हाइट पैगोडा' कहते थे; दोनों नाम एक ही जोड़ी के हैं और तट पर दिशा-सूचक के रूप में काम आते थे।