“कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)” द्वारा हाल ही में उठाए गए क़दमों से संबंधित निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ? 1. ईपीएफओ ने अग्रिम दावों की स्वतःनिपटान सीमा को वर्तमान ₹ 1 लाख से बढ़ाकर ₹ 3 लाख कर, सदस्य-सेवाओं को वर्धित किया है । 2. ईपीएफओ ने पहली बार कोविड-19 महामारी के दौरान अग्रिम दावों के लिए स्वतःनिपटान प्रारंभ किया था । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) केवल 2 — दूसरा कथन सही है और पहला नहीं, क्योंकि पहले कथन में बढ़ी हुई सीमा का अंक बदल दिया गया है।
कथन 1 कहता है कि अग्रिम दावों की स्वतःनिपटान सीमा वर्तमान एक लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये की गई। यह अंक ठीक नहीं है। जून 2025 में की गई घोषणा के अनुसार यह सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये की गई थी। बीच में तीन लाख का कोई चरण था ही नहीं — सीमा सीधे एक लाख से पाँच लाख हुई। इसलिए आरंभ का अंक और परिवर्तन की दिशा दोनों सही होने पर भी कथन ग़लत है, क्योंकि उसका अंतिम अंक बदला हुआ है।
कथन 2 कहता है कि स्वतःनिपटान की व्यवस्था पहली बार कोविड-19 महामारी के दौरान आरंभ की गई थी, और यह ठीक है। उस समय सदस्यों को शीघ्र आर्थिक सहायता पहुँचाने के लिए अग्रिम दावों का स्वतःनिपटान शुरू किया गया, और आगे चलकर उस सुविधा का विस्तार बीमारी, शिक्षा, विवाह और आवास से जुड़े अग्रिम दावों तक कर दिया गया।
स्वतःनिपटान का अर्थ यह है कि पात्र दावे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के प्रणाली द्वारा ही संसाधित हो जाते हैं। सीमा के भीतर आने वाले दावे तीन दिन में निपटा दिए जाते हैं। इसका असर आँकड़ों में दिखता है : वित्त वर्ष 2024-25 में 2.34 करोड़ अग्रिम दावे इस तरह स्वतः निपटाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत अधिक थे और उस वर्ष के सब अग्रिम दावों का 59 प्रतिशत।
यहाँ प्रश्न की रचना का ढंग ध्यान देने योग्य है : कथन 1 अपने चार में से तीन अंश सही रखता है और केवल एक अंक बदल देता है। ऐसा कथन पढ़ने में पूरी तरह परिचित लगता है, और यही उसका जाल है। सुधार यह है कि जिस कथन में कोई अंक हो, उस अंक पर अलग से रुकिए — विषय-वस्तु सही होने का अर्थ यह नहीं कि संख्या भी सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह विकल्प केवल पहले कथन को सही मानता है, यानी वह ठीक उलटी दिशा में जाता है। इसे चुनने के लिए दो बातें एक साथ माननी पड़ेंगी : कि बढ़ी हुई सीमा तीन लाख रुपये है, और कि स्वतःनिपटान महामारी के दौरान आरंभ नहीं हुआ था। दोनों ग़लत हैं। सीमा एक लाख से सीधे पाँच लाख की गई और तीन लाख का कोई चरण नहीं था; और यह सुविधा उसी काल में आरंभ हुई थी, जब सदस्यों तक शीघ्र सहायता पहुँचाना सबसे बड़ी आवश्यकता थी। यह विकल्प उस अभ्यर्थी को खींचता है जिसे सीमा बढ़ने की ख़बर याद है पर अंक याद नहीं — वह पहले कथन को परिचित मानकर स्वीकार कर लेता है और दूसरे को अनावश्यक रूप से संदेह में डाल देता है।
- (c)1 और 2 दोनों — यह विकल्प दोनों कथनों को सही मानता है और यही इस प्रश्न का सबसे आकर्षक ग़लत उत्तर है। कारण यह है कि दूसरा कथन निर्विवाद रूप से सही है, और पहला कथन भी लगभग पूरा सही है — संगठन का नाम, सुविधा का नाम, आरंभिक सीमा और परिवर्तन की दिशा, सब ठीक हैं। बदला केवल एक अंक है। ऐसे कथन में मन स्वाभाविक रूप से परिचित हिस्सों को देखकर सहमत हो जाता है और अपरिचित अंक की जाँच नहीं करता। बचाव का तरीक़ा यह है कि अंक वाले कथन को पढ़ते समय पहले अंक अलग कर लीजिए और उसी पर निर्णय दीजिए, बाक़ी वाक्य को बाद में पढ़िए। इस प्रकार के प्रश्नों में परीक्षक की सबसे आम युक्ति यही है — सही ख़बर लेकर उसमें एक संख्या बदल देना।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प दोनों कथनों को ग़लत ठहराता है, जो दूसरे कथन के साथ अन्याय है। स्वतःनिपटान की व्यवस्था सचमुच कोविड-19 महामारी के दौरान आरंभ हुई थी और यह बात संगठन के अपने विवरण में दर्ज है; बाद में उसका विस्तार बीमारी, शिक्षा, विवाह और आवास से जुड़े अग्रिम दावों तक हुआ। इस विकल्प तक अभ्यर्थी प्रायः तब पहुँचता है जब वह पहले कथन की भूल पकड़ लेता है और फिर उसी संदेह को दूसरे कथन पर भी लगा देता है। कथन-आधारित प्रश्नों में यह प्रवृत्ति बहुत आम है। हर कथन पर स्वतंत्र रूप से निर्णय दीजिए : एक कथन का ग़लत होना दूसरे के बारे में कुछ नहीं बताता, चाहे दोनों एक ही विषय के क्यों न हों।
अवधारणा
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सेवाओं में पिछले वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव दावों के निपटान की गति में आया है, और यह प्रश्न उसी बदलाव पर है।
पहले हर दावा हाथ से जाँचा जाता था — सदस्य का विवरण, नियोक्ता का अभिलेख, पात्रता की शर्तें — और इसमें समय लगता था। स्वतःनिपटान की व्यवस्था इसे बदल देती है : जिन दावों में सब विवरण पहले से मिले हुए हों और राशि निर्धारित सीमा के भीतर हो, उन्हें प्रणाली स्वयं संसाधित कर देती है, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के। सीमा के भीतर के दावे तीन दिन में निपट जाते हैं।
यह व्यवस्था पहली बार कोविड-19 महामारी के दौरान लाई गई, जब सदस्यों को तुरंत धन की आवश्यकता थी और सामान्य प्रक्रिया उतनी तेज़ नहीं थी। आरंभ में यह बीमारी से जुड़े अग्रिम तक सीमित थी, और बाद में उसका विस्तार शिक्षा, विवाह और आवास से जुड़े अग्रिम दावों तक किया गया।
सीमा भी क्रमशः बढ़ी है, और जून 2025 की घोषणा में उसे एक लाख रुपये से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये कर दिया गया। आँकड़े इस बदलाव का असर दिखाते हैं : वित्त वर्ष 2024-25 में 2.34 करोड़ अग्रिम दावे स्वतः निपटाए गए, जो पिछले वर्ष से 161 प्रतिशत अधिक और उस वर्ष के सब अग्रिम दावों का 59 प्रतिशत थे।
इसे उस बड़े संदर्भ में देखिए जिसमें संगठन काम करता है। अग्रिम स्वयं भविष्य निधि योजना के अपने उपबंधों से आते हैं और विशेष प्रयोजनों — बीमारी, शिक्षा, विवाह, आवास — के लिए सदस्य को अपनी ही निधि से आंशिक निकासी की अनुमति देते हैं। स्वतःनिपटान उन्हीं दावों की प्रक्रिया को तेज़ करता है, पात्रता की शर्तों को बदलता नहीं।
यह पूरे पेपर का एकमात्र स्थान है जहाँ परीक्षा लेने वाले संगठन का नाम छपा है, और वह भी प्रश्न की विषय-वस्तु के रूप में। हिन्दी स्तंभ में उसका नाम और संक्षेप दोनों केवल देवनागरी में हैं, कहीं भी रोमन अक्षरों में नहीं; और यह इस पृष्ठ का अकेला प्रश्न है जिसमें नाम युग्म उद्धरण-चिह्नों के भीतर रखा गया है, जबकि पड़ोसी प्रश्नों में एकल चिह्न हैं। दोनों बातें छपी हुई हैं।
प्रश्न की रचना उस साँचे की है जो समसामयिकी में सबसे अधिक चलता है : एक सही ख़बर लेकर उसमें केवल एक संख्या बदल देना। ऐसे कथन में शेष सब कुछ परिचित रहता है, इसलिए वह सही जान पड़ता है। यही कारण है कि अंक वाले कथनों में अंक को अलग करके जाँचना चाहिए।
इस पेपर में इसी परिवार के दो और प्रश्न हैं — एक अन्य सामाजिक सुरक्षा संगठन की पंजीकरण योजना पर, और एक रोज़गार से जुड़ी बड़ी योजना पर, जिसमें दो-दो संख्याएँ हैं। तीनों को साथ रखकर देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि परीक्षक हर बार एक ही जगह हाथ डालता है : संस्था का नाम, या कोई अंक। इसलिए हाल की पहलों को पढ़ते समय संस्था और संख्या — इन दो चीज़ों को अलग से नोट कर लेना सबसे अधिक काम आता है।
मुख्य तथ्य
- अग्रिम दावों के स्वतःनिपटान की सीमा जून 2025 में एक लाख रुपये से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये की गई; बीच में तीन लाख रुपये का कोई चरण नहीं था, इसलिए प्रश्न का पहला कथन अंक के कारण ग़लत हो जाता है।
- स्वतःनिपटान की व्यवस्था पहली बार कोविड-19 महामारी के दौरान आरंभ की गई थी, ताकि सदस्यों को शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सके; बाद में उसका विस्तार बीमारी, शिक्षा, विवाह और आवास के अग्रिम दावों तक हुआ।
- स्वतःनिपटान में पात्र दावे बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्रणाली द्वारा ही संसाधित होते हैं, और सीमा के भीतर आने वाले दावे तीन दिन में निपटा दिए जाते हैं।
- वित्त वर्ष 2024-25 में 2.34 करोड़ अग्रिम दावे स्वतः निपटाए गए — पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत अधिक, और उस वर्ष के सब अग्रिम दावों का 59 प्रतिशत।
- अग्रिम भविष्य निधि योजना के अपने उपबंधों से आते हैं और विशेष प्रयोजनों के लिए सदस्य को अपनी ही निधि से आंशिक निकासी की अनुमति देते हैं; स्वतःनिपटान प्रक्रिया को तेज़ करता है, पात्रता की शर्तें नहीं बदलता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अंक वाले कथन में विषय-वस्तु परिचित देखकर संख्या की जाँच छोड़ देना; यहाँ पूरा कथन सही है और केवल अंतिम अंक बदला हुआ है।
- एक कथन ग़लत मिलने पर दूसरे को भी संदेह में डाल देना; हर कथन पर स्वतंत्र निर्णय देना ही सुरक्षित है।
- स्वतःनिपटान को पात्रता में छूट समझ लेना; वह केवल प्रक्रिया की गति बढ़ाता है, अग्रिम की शर्तें वही रहती हैं।
हाल की प्रशासनिक पहलों पर प्रश्न इस परीक्षा में नियमित हैं और उनके तीन रूप दिखते हैं।
पहला रूप यही है — दो कथन देकर उनकी जाँच कराना, जिनमें एक कथन में कोई संख्या बदल दी जाती है। ऐसे प्रश्न में सबसे उपयोगी आदत यह है कि हर संख्या पर अलग से रुका जाए। यहाँ बदली गई संख्या ही पूरे प्रश्न का उत्तर तय करती है।
दूसरा रूप अधिनियम का है : किसी उपबंध, प्राधिकारी या पात्रता की शर्त पर सीधा प्रश्न। इसी परिवार के एक पहले के पेपर में पूछा जा चुका है कि 1952 के अधिनियम के अंतर्गत कौन-सा कथन सही नहीं है, और एक अन्य में यह कि अलग भविष्य निधि खाता बनाने की अनुमति माँगने के लिए किसी प्रतिष्ठान में कम से कम कितने कर्मचारी होने चाहिए; उसकी आधिकारिक कुंजी एक सौ की संख्या को स्वीकार करती है।
तीसरा रूप प्राधिकारियों का है : अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण, वसूली अधिकारी। एक पहले के पेपर में इसी अधिनियम के अपीलीय प्राधिकारी पर प्रश्न आ चुका है। इसलिए तैयारी में अधिनियम, संख्या और प्राधिकारी — तीनों की अलग-अलग सूची बनाइए।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2023_Q35Which one of the following statements under the Employees' Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act, 1952, is not correct ?
- (a) It makes provision for pension scheme including family pension.
- (b) It makes provision for Employees' Deposit Linked Insurance Scheme.
- (c) The provisions of the Act shall not be applicable to Cooperative Societies employing fifty or more persons working without the aid of power.
- (d) The contribution by the employer to the Fund shall be on the basis of the basic wage, dearness allowance and retaining allowance (if any) of the employee.
उत्तर(c) The provisions of the Act shall not be applicable to Cooperative Societies employing fifty or more persons working without the aid of power.
कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 के अंतर्गत कौन-सा कथन सही नहीं है — उसी अधिनियम के उपबंधों पर कथन-आधारित परख।
EPFO_APFC_2023_Q30What is the minimum number of employees required to be working in an establishment, so that the employer, with the authorization of the majority of the employees of the establishment, may apply to the Central Government to authorize the employer to create a separate Provident Fund Account for the employees under the Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952?
- (a) One hundred
- (b) Three hundred
- (c) Five hundred
- (d) One thousand
उत्तर(a) One hundred
अलग भविष्य निधि खाता बनाने की अनुमति माँगने के लिए प्रतिष्ठान में कम से कम कितने कर्मचारी होने चाहिए — आधिकारिक कुंजी एक सौ की संख्या को स्वीकार करती है।
EPFO_EOAO_2023_Q33Which one of the following authorities constituted by the Central Government shall be the Appellate Authority under the Employees’ Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act, 1952 ?
- (a) Employees Provident Funds Appellate Tribunal
- (b) National Tribunal
- (c) Labour Appellate Tribunal
- (d) Industrial Tribunal
उत्तर(d) Industrial Tribunal
इसी अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी कौन होगा — संगठन से जुड़े वैधानिक ढाँचे पर सीधा प्रश्न।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अग्रिम दावों के स्वतःनिपटान की व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)इसमें प्रत्येक दावे की जाँच किसी अधिकारी द्वारा अलग से की जाती है
- (b)इसमें सीमा के भीतर आने वाले पात्र दावे बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्रणाली द्वारा संसाधित हो जाते हैं
- (c)यह केवल सेवानिवृत्ति पर अंतिम निपटान के लिए उपलब्ध है
- (d)यह अग्रिम पाने की पात्रता की शर्तों को समाप्त कर देती है
उत्तर(b) इसमें सीमा के भीतर आने वाले पात्र दावे बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्रणाली द्वारा संसाधित हो जाते हैं — ऐसे दावे तीन दिन में निपट जाते हैं; यह व्यवस्था अग्रिम दावों के लिए है और पात्रता की शर्तें उससे बदलती नहीं।
- practice — not a real PYQ
अग्रिम दावों के स्वतःनिपटान की सुविधा पहली बार किस अवसर पर आरंभ की गई थी ?
- (a)कोविड-19 महामारी के दौरान
- (b)विमुद्रीकरण के बाद
- (c)सार्वभौम खाता संख्या लागू होने के समय
- (d)पेंशन योजना 1995 के आरंभ के साथ
उत्तर(a) कोविड-19 महामारी के दौरान — उस समय सदस्यों को शीघ्र आर्थिक सहायता पहुँचाने के लिए यह सुविधा शुरू की गई और बाद में उसका विस्तार बीमारी, शिक्षा, विवाह तथा आवास से जुड़े अग्रिम दावों तक किया गया।