निम्नलिखित में से कौन-सी लागत को सामान्यतः इन्वेंट्री की लागत की गणना में सम्मिलित नहीं किया जाता है ?
- (a)प्रशासन उपरिव्यय
- (b)खरीद की संपूर्ण लागत
- (c)सामग्री का सामान्य अपव्यय
- (d)भंडारण लागत यह मानते हुए कि उत्पादन प्रक्रिया के भाग के रूप में विशेष भंडारण की आवश्यकता है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) प्रशासन उपरिव्यय — प्रश्न पूछता है कि कौन-सी लागत इन्वेंट्री की लागत में सामान्यतः सम्मिलित नहीं की जाती, और प्रशासन उपरिव्यय ही वह मद है जिसे लेखा मानक स्पष्ट रूप से बाहर रखता है।
माल-सूची के मूल्यांकन का मानक — लेखा मानक 2 — कहता है कि इन्वेंट्री की लागत में तीन चीज़ें आती हैं : क्रय की लागत, संपरिवर्तन की लागत, तथा वे अन्य लागतें जो माल को उसके वर्तमान स्थान और वर्तमान दशा तक पहुँचाने में लगी हों। यही कसौटी पूरे प्रश्न का उत्तर तय करती है। प्रशासन का ख़र्च — कार्यालय का वेतन, निदेशकों की फ़ीस, सामान्य कार्यालय व्यय — माल को गोदाम तक पहुँचाने में कोई भूमिका नहीं निभाता; वह चलता रहता है चाहे माल बना हो या नहीं। इसलिए मानक उसे लागत में जोड़ने से मना करता है और उसे उसी अवधि का व्यय मानकर लाभ-हानि खाते में डालता है।
मानक जिन चार मदों को नाम लेकर बाहर रखता है, वे हैं : असामान्य अपव्यय; भंडारण लागत, सिवाय उस स्थिति के जब वह उत्पादन प्रक्रिया में आगे के चरण से पहले आवश्यक हो; वे प्रशासन उपरिव्यय जो माल को वर्तमान स्थान और दशा तक पहुँचाने में योगदान नहीं करते; और विक्रय तथा वितरण की लागतें। इस सूची को उलटकर पढ़ने पर यह प्रश्न अपने आप हल हो जाता है — शेष तीनों विकल्प या तो सीधे लागत में आते हैं या मानक की अपवाद-शर्त पूरी करते हैं।
इसी परीक्षा-परिवार के एक पुराने पेपर में ठीक यही मानक पूछा गया था, और वहाँ आधिकारिक कुंजी ने उस विकल्प को सही ठहराया था जो कहता है कि उत्पादन प्रक्रिया में आगे के चरण से पहले आवश्यक भंडारण लागत सम्मिलित होती है, तथा जिस विकल्प को छोड़ा गया वह वही प्रशासन उपरिव्यय वाला था। बिना अपनी कुंजी वाले इस पेपर पर यह सबसे मज़बूत बाहरी पुष्टि है जो उपलब्ध है।
एक सावधानी : मानक प्रशासन उपरिव्यय को उस शर्त के साथ बाहर रखता है कि वह माल को वर्तमान स्थान और दशा तक पहुँचाने में योगदान न करता हो। इसीलिए प्रश्न में 'सामान्यतः' शब्द रखा गया है — वह शर्त को ही दूसरे शब्दों में कहता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)खरीद की संपूर्ण लागत — क्रय की लागत इन्वेंट्री की लागत का पहला और सबसे स्पष्ट अंग है, इसलिए यह वह मद नहीं हो सकती जिसे बाहर रखा जाता हो। मानक के अनुसार क्रय की लागत में क्रय मूल्य, उस पर लगे शुल्क और कर, अंतर्वाही भाड़ा तथा अन्य प्रत्यक्ष रूप से आरोपणीय व्यय आते हैं। दो समायोजन ध्यान रखने योग्य हैं और वे इस विकल्प को थोड़ा पेचीदा बनाते हैं : वे कर जो उद्यम आगे चलकर कर-प्राधिकारियों से वापस पा सकता है, लागत में नहीं जोड़े जाते; और व्यापारिक बट्टा, छूट तथा शुल्क वापसी जैसी मदें घटा दी जाती हैं। पर ये समायोजन क्रय-लागत को परिभाषित करते हैं, उसे बाहर नहीं करते। जिस मद को मानक अपनी परिभाषा का पहला अंग बनाता हो, वह 'सम्मिलित नहीं की जाती' का उत्तर नहीं हो सकती।
- (c)सामग्री का सामान्य अपव्यय — सामग्री का सामान्य अपव्यय लागत में सम्मिलित होता है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। तर्क सीधा है : किसी भी उत्पादन प्रक्रिया में कुछ मात्रा का ख़राब होना, सूखना, कटने-छँटने में जाना अनिवार्य है, और उसके बिना बचा हुआ माल बन ही नहीं सकता था। इसलिए सामान्य अपव्यय की लागत बचे हुए इकाइयों पर बाँट दी जाती है, जिससे प्रति इकाई लागत उतनी ही बढ़ जाती है। इसके ठीक विपरीत असामान्य अपव्यय है — आग, चोरी, लापरवाही या किसी अप्रत्याशित घटना से हुई हानि। वह उत्पादन के लिए आवश्यक नहीं थी, इसलिए मानक उसे नाम लेकर बाहर रखता है और उसे उसी अवधि का व्यय मानता है। प्रश्न में शब्द 'सामान्य' छपा है, और यही एक शब्द इस विकल्प को लागत के भीतर ले आता है।
- (d)भंडारण लागत यह मानते हुए कि उत्पादन प्रक्रिया के भाग के रूप में विशेष भंडारण की आवश्यकता है — यह विकल्प देखने में बाहर रखी जाने वाली मद जैसा लगता है, क्योंकि भंडारण लागत सामान्यतः सचमुच बाहर रखी जाती है — पर विकल्प में जो शर्त जोड़ी गई है, वही उसे भीतर ले आती है। मानक कहता है कि भंडारण लागत बाहर रहेगी, सिवाय उस स्थिति के जब वह उत्पादन प्रक्रिया में आगे के चरण से पहले आवश्यक हो। यहाँ विकल्प स्वयं यही शर्त बताता है : विशेष भंडारण उत्पादन प्रक्रिया के भाग के रूप में आवश्यक है। ऐसा भंडारण पकने, सूखने या ठंडा होने जैसी प्रक्रियाओं में होता है, जहाँ माल को कुछ समय रखे बिना अगला चरण संभव ही नहीं। इसलिए यह अपवाद की श्रेणी में आता है और लागत में जुड़ता है। यही मद इसी परिवार के एक पुराने पेपर में कुंजीबद्ध सही उत्तर रह चुकी है, जिससे यहाँ का निष्कर्ष स्वतंत्र रूप से पुष्ट होता है। ध्यान दीजिए कि इस विकल्प की लंबाई ही संकेत है — शर्त बिना लिखे यह मद बाहर होती।
अवधारणा
माल-सूची का मूल्यांकन लेखांकन का वह बिंदु है जहाँ चिट्ठा और लाभ-हानि खाता दोनों एक साथ प्रभावित होते हैं, इसलिए उस पर एक अलग मानक बना है।
पहला नियम मूल्यांकन का आधार है : इन्वेंट्री को लागत और निवल वसूली-योग्य मूल्य में से जो कम हो, उस पर दिखाया जाता है। इसमें अनुरूढ़िवाद की परंपरा काम करती है — संभावित लाभ नहीं गिना जाता, पर संभावित हानि के लिए प्रावधान कर लिया जाता है।
दूसरा नियम लागत की परिभाषा है : क्रय की लागत, संपरिवर्तन की लागत, तथा वे अन्य लागतें जो माल को उसके वर्तमान स्थान और दशा तक पहुँचाने में लगी हों। क्रय की लागत में क्रय मूल्य, शुल्क और कर, अंतर्वाही भाड़ा आते हैं, और उसमें से व्यापारिक बट्टा तथा वापसी-योग्य कर घटा दिए जाते हैं। संपरिवर्तन की लागत में प्रत्यक्ष श्रम तथा उत्पादन उपरिव्ययों का व्यवस्थित आबंटन आता है।
तीसरा नियम अपवर्जन का है, और यही परीक्षा का प्रिय भाग है। मानक चार मदें नाम लेकर बाहर रखता है : असामान्य अपव्यय; भंडारण लागत, बशर्ते वह आगे के उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक न हो; वे प्रशासन उपरिव्यय जो माल को वर्तमान स्थान और दशा तक पहुँचाने में योगदान न करते हों; और विक्रय तथा वितरण की लागतें।
इन तीनों नियमों के पीछे एक ही विचार है : इन्वेंट्री एक परिसंपत्ति है, और परिसंपत्ति की लागत में केवल वही ख़र्च जुड़ सकता है जो उसे बिकने लायक़ बनाने में सचमुच लगा हो। जो ख़र्च समय बीतने से जुड़ा है, उत्पादन से नहीं, वह उसी अवधि का व्यय है।
पूछने का ढंग यहाँ ध्यान देने योग्य है। प्रश्न निषेधात्मक है और नकार मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए यह देखना आसान है कि बाहर रखी जाने वाली मद खोजनी है। पर असली कठिनाई नकार में नहीं, विकल्प (d) की लंबाई में है : वह अकेला विकल्प है जिसमें एक पूरी शर्त जुड़ी हुई है, और शेष तीन छोटे नाम-वाक्य हैं। यह असमानता छपी हुई है और संयोग नहीं — शर्त हटा दी जाए तो वह मद बाहर चली जाती, और शर्त के साथ वह भीतर आ जाती है।
इसी से इस प्रकार के प्रश्नों का एक व्यावहारिक नियम निकलता है : जिस विकल्प में शर्त लिखी हो, उसे शर्त सहित पढ़िए। परीक्षक शर्त इसीलिए लिखता है कि वह उत्तर बदल देती है।
इस पेपर का लेखा और लेखापरीक्षा वाला खंड लगभग सोलह प्रश्नों का है और उसमें निषेधात्मक प्रश्न सबसे अधिक हैं। इसका कारण भी समझने योग्य है : वैधानिक या मानक-आधारित सूचियों में यह परखना कि अभ्यर्थी सूची की सीमा जानता है या नहीं, 'क्या इसमें नहीं आता' पूछकर ही सबसे अच्छा होता है। इसलिए इन खंडों में मानक की अपवर्जन-सूचियाँ अलग से याद कर लेना सबसे अधिक फल देता है।
मुख्य तथ्य
- लेखा मानक 2 के अनुसार इन्वेंट्री की लागत = क्रय की लागत + संपरिवर्तन की लागत + वे अन्य लागतें जो माल को उसके वर्तमान स्थान और वर्तमान दशा तक पहुँचाने में लगी हों।
- मानक चार मदें नाम लेकर बाहर रखता है : असामान्य अपव्यय; भंडारण लागत, यदि वह आगे के उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक न हो; योगदान न करने वाले प्रशासन उपरिव्यय; तथा विक्रय और वितरण की लागतें।
- सामान्य अपव्यय लागत में जुड़ता है और बची हुई इकाइयों पर बँट जाता है, जबकि असामान्य अपव्यय बाहर रहता है और उसी अवधि का व्यय माना जाता है — पूरा भेद 'सामान्य' और 'असामान्य' शब्दों में है।
- क्रय की लागत में क्रय मूल्य, शुल्क और कर तथा अंतर्वाही भाड़ा आते हैं; पर वे कर जो आगे चलकर कर-प्राधिकारियों से वापस मिल सकते हैं, और व्यापारिक बट्टा, इसमें से घटा दिए जाते हैं।
- इन्वेंट्री का मूल्यांकन लागत और निवल वसूली-योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर होता है — यही वह जगह है जहाँ अनुरूढ़िवाद की परंपरा सीधे एक मानक का रूप ले लेती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विकल्प में जुड़ी शर्त को अनदेखा कर देना; भंडारण लागत सामान्यतः बाहर रहती है, पर आगे के उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक हो तो भीतर आ जाती है।
- सामान्य और असामान्य अपव्यय को एक मान लेना; पहला लागत में बँटता है, दूसरा सीधे लाभ-हानि खाते में जाता है।
- विक्रय और वितरण की लागतों को इन्वेंट्री में जोड़ लेना; वे माल को बेचने से जुड़ी हैं, उसे वर्तमान दशा तक पहुँचाने से नहीं।
इस मानक पर प्रश्न दो तरह से आते हैं, और दोनों इस परीक्षा-परिवार में पहले आ चुके हैं।
पहला रूप सीधा है : चार मदें देकर पूछना कि कौन-सी लागत में आती है या कौन-सी नहीं आती। ऐसे प्रश्न का पूरा उत्तर मानक की अपवर्जन-सूची में रखा है, इसलिए वह सूची शब्दशः याद रखना सबसे अधिक काम आता है। इसी परिवार के एक पहले के पेपर में यही प्रश्न सकारात्मक रूप में पूछा गया था और उसकी कुंजी ने आगे के उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक भंडारण लागत को सम्मिलित माना था।
दूसरा रूप संख्यात्मक है : तिथिवार क्रय और निर्गम की तालिका देकर किसी विधि से बची हुई इन्वेंट्री का मूल्य पूछना। दो पहले के पेपरों में यह प्रश्न लगभग एक ही तालिका के साथ आ चुका है, इसलिए विधियों का अभ्यास भी उतना ही ज़रूरी है जितना परिभाषा का।
तीसरा और कम आने वाला रूप निवल वसूली-योग्य मूल्य से जुड़ा है, जहाँ लागत से नीचे लिखने की स्थिति पूछी जाती है।
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EPFO_EOAO_2023_Q76Which of the following is included in the ‘Cost of Inventory’ according to Accounting Standard-2 (Inventory Valuation) :
- (a) Administrative overheads that do not contribute to bringing the inventories to their present location and condition
- (b) Storage costs which are necessary in the production process prior to a further production stage
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उत्तर(b) Storage costs which are necessary in the production process prior to a further production stage
लेखा मानक 2 के अनुसार इन्वेंट्री की लागत में क्या सम्मिलित है — इसी मानक की अपवर्जन-सूची पर सीधा प्रश्न, जिसकी आधिकारिक कुंजी आगे के उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक भंडारण लागत को सम्मिलित मानती है।
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- (a) ₹ 6,600
- (b) ₹ 8,600
- (c) ₹ 10,600
- (d) ₹ 12,000
उत्तर(c) ₹ 10,600
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पूँजीगत व्यय न होने वाला विकल्प छाँटने का प्रश्न, जो यही कसौटी दूसरी दिशा से लगाता है — कौन-सा ख़र्च परिसंपत्ति की लागत में जुड़ता है और कौन-सा अवधि का व्यय है।
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- (a)केवल आग से नष्ट 20 इकाइयों की
- (b)केवल सामान्य अपव्यय की 50 इकाइयों की
- (c)दोनों की
- (d)दोनों में से किसी की नहीं
उत्तर(b) केवल सामान्य अपव्यय की 50 इकाइयों की — सामान्य अपव्यय उत्पादन के लिए अनिवार्य है, इसलिए उसकी लागत बची हुई इकाइयों पर बँटती है; आग से हुई हानि असामान्य अपव्यय है और मानक उसे लागत से बाहर रखकर उसी अवधि का व्यय मानता है।