निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)तलपट (ट्रायल बैलेंस) का मिलान होना सटीकता का निर्णायक प्रमाण है ।
- (b)तलपट (ट्रायल बैलेंस) में खोला गया उचंत खाता एक स्थायी खाता है ।
- (c)लेखा वर्ष के अंत में, खाता बही के सभी नाममात्र खातों का अंतरण (बैलेंसिंग) किया जाता है ।
- (d)खाता बही को खातों की मुख्य लेखा बही के रूप में जाना जाता है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) खाता बही को खातों की मुख्य लेखा बही के रूप में जाना जाता है । — चारों कथनों में केवल यही बिना किसी शर्त के सही है, और यह लेखांकन की पुस्तकों के क्रम का सीधा विवरण है।
किसी भी व्यवसाय में लेन-देन पहले मूल प्रविष्टि की पुस्तक में उतरता है — जर्नल में, या रोकड़ बही तथा क्रय-विक्रय जैसी सहायक बहियों में। वहाँ प्रविष्टियाँ तिथि के क्रम में बैठती हैं, इसलिए वह पुस्तक यह नहीं बता सकती कि किसी एक व्यक्ति का, या किसी एक मद का, कुल कितना हुआ। यही काम खाता बही करती है : वह हर प्रविष्टि को उसके अपने खाते में दोबारा लिखती है, जिससे प्रत्येक खाते का जोड़ और शेष एक ही स्थान पर मिल जाता है। इसी वर्गीकरण के कारण उसे मुख्य पुस्तक कहा जाता है, और इसी अर्थ में अंतिम प्रविष्टि की पुस्तक भी।
इसका व्यावहारिक प्रमाण आगे की पूरी शृंखला है। तलपट खाता बही के शेषों से बनता है; व्यापार खाता, लाभ और हानि खाता तथा चिट्ठा उसी तलपट से बनते हैं। यानी अंतिम खातों तक पहुँचने का रास्ता अनिवार्य रूप से खाता बही से होकर जाता है। जर्नल के बिना भी काम चल सकता है — छोटे व्यवसाय सीधे सहायक बहियों से खाता बही में उतार लेते हैं — पर खाता बही के बिना न किसी खाते का शेष निकलेगा, न तलपट बनेगा, न अंतिम खाते। जो पुस्तक हटाई ही नहीं जा सकती, वही मुख्य कहलाती है।
यहाँ एक जोड़ी याद रखने योग्य है, क्योंकि परीक्षा उसे बार-बार अलग-अलग कोणों से पूछती है : जर्नल पहली पुस्तक है और खाता बही मुख्य पुस्तक। ये दोनों कथन एक-दूसरे का खंडन नहीं करते। 'पहली' का संबंध समय से है — लेन-देन सबसे पहले वहाँ लिखा जाता है; 'मुख्य' का संबंध महत्त्व से है — निष्कर्ष वहीं से निकलता है। जो अभ्यर्थी इन दोनों को एक ही प्रश्न का उत्तर मान लेता है, वह दोनों में से एक को ग़लत ठहराने की कोशिश में उलझ जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)तलपट (ट्रायल बैलेंस) का मिलान होना सटीकता का निर्णायक प्रमाण है । — तलपट का दोनों ओर बराबर हो जाना केवल गणितीय शुद्धता का प्रथम संकेत है, निर्णायक प्रमाण नहीं — और इस कथन का पूरा भार 'निर्णायक' शब्द पर टिका है। भूलों की एक पूरी श्रेणी ऐसी है जो तलपट को बराबर रहने देती है : कोई लेन-देन पूरा का पूरा छूट जाए (चूक की भूल), सही राशि सही पक्ष में पर ग़लत खाते में चली जाए जब वह खाता उसी वर्ग का हो (करण की भूल), पूँजीगत और आयगत का भेद न किया जाए (सिद्धांत की भूल), मूल पुस्तक में ही दोनों ओर एक जैसी ग़लत राशि लिख दी जाए, या दो भूलें एक-दूसरे को काट दें (क्षतिपूरक भूलें)। इनमें से किसी में भी डेबिट और क्रेडिट का जोड़ नहीं बिगड़ता, इसलिए तलपट चुप रह जाता है। सहोदर पेपर में यही बात सीधे पूछी जा चुकी है, जहाँ आधिकारिक कुंजी सहायक पुस्तक से खाता बही में ग़लत पोस्टिंग को वही भूल बताती है जिसे तलपट नहीं पकड़ता।
- (b)तलपट (ट्रायल बैलेंस) में खोला गया उचंत खाता एक स्थायी खाता है । — उचंत खाता ठीक उसी स्थिति की उपज है जिसका वर्णन विकल्प (a) करता है : जब तलपट के दोनों पक्षों में अंतर रह जाए और भूल तुरंत न मिले, तो अंतर की राशि इसी खाते में डालकर तलपट बराबर कर लिया जाता है, ताकि आगे का काम रुके नहीं। यह विशुद्ध रूप से अस्थायी व्यवस्था है। जैसे-जैसे भूलें पकड़ में आती हैं, सुधार प्रविष्टियाँ इसी खाते के विरुद्ध की जाती हैं, और सब भूलें मिल जाने पर यह खाता अपने आप शून्य होकर बंद हो जाता है। यदि वर्ष के अंत तक कुछ शेष बच जाए तो उसे चिट्ठे में अस्थायी रूप से दिखा दिया जाता है, पर वह भी स्थायित्व नहीं, केवल स्थगन है। 'स्थायी खाता' कहना इस खाते के होने के कारण का ही खंडन कर देता है — जिस खाते का उद्देश्य ही समाप्त हो जाना हो, वह स्थायी कैसे होगा।
- (c)लेखा वर्ष के अंत में, खाता बही के सभी नाममात्र खातों का अंतरण (बैलेंसिंग) किया जाता है । — जैसा छपा है, यह कथन कोष्ठक में दिए (बैलेंसिंग) के कारण शेष निकालने की बात कर रहा है, और नाममात्र खातों का शेष निकालकर आगे नहीं ले जाया जाता — उन्हें बंद किया जाता है। वर्ष के अंत में वेतन, किराया, कमीशन, बट्टा जैसे सब नाममात्र खाते व्यापार खाते या लाभ और हानि खाते में ले जाकर समाप्त कर दिए जाते हैं, और अगले वर्ष वे शून्य से आरंभ होते हैं। शेष निकालकर आगे ले जाना केवल वास्तविक और व्यक्तिगत खातों के साथ होता है, और उन्हीं के शेष चिट्ठे में आते हैं। एक बात पाठक को साफ़ बता देनी चाहिए : हिन्दी स्तंभ का मुख्य शब्द 'अंतरण' है, जिसका सामान्य अर्थ स्थानांतरण होता है, और उस अर्थ में पढ़ें तो कथन वही कह देता है जो नाममात्र खातों के साथ सचमुच होता है। अर्थ यहाँ कोष्ठक तय करता है, और इसी कारण विकल्प (d) चुनना अधिक सुरक्षित है — वह किसी पाठ-भेद पर नहीं टिका।
अवधारणा
लेखांकन की पुस्तकें एक निश्चित क्रम में काम करती हैं, और इस प्रश्न के चारों विकल्प उसी क्रम के अलग-अलग पड़ावों को छूते हैं।
पहला पड़ाव मूल प्रविष्टि की पुस्तकें हैं — जर्नल तथा सहायक बहियाँ, जिनमें रोकड़ बही, क्रय पुस्तक, विक्रय पुस्तक और उनकी वापसी की पुस्तकें आती हैं। यहाँ लेन-देन तिथि के क्रम में उतरता है।
दूसरा पड़ाव खाता बही है, जहाँ वही लेन-देन खाते के अनुसार फिर से जमता है। पारंपरिक वर्गीकरण में खाते तीन प्रकार के होते हैं : व्यक्तिगत, वास्तविक और नाममात्र। व्यक्तिगत खाते व्यक्तियों और संस्थाओं के हैं और उनमें बकाया किराया जैसे प्रतिनिधि खाते भी आते हैं; वास्तविक खाते संपत्तियों के हैं; नाममात्र खाते आय, व्यय, लाभ और हानि के हैं।
यह वर्गीकरण केवल नाम रखने के लिए नहीं है — वर्ष के अंत में इसी से तय होता है कि किस खाते का क्या होगा। वास्तविक और व्यक्तिगत खातों का शेष निकाला जाता है और वह अगले वर्ष में आगे बढ़ता है, इसलिए वे चिट्ठे में दिखते हैं। नाममात्र खातों का शेष आगे नहीं बढ़ता; उन्हें व्यापार खाते या लाभ और हानि खाते में अंतरित कर के बंद कर दिया जाता है, इसलिए वे आय-विवरण में दिखते हैं और चिट्ठे में नहीं।
तीसरा पड़ाव तलपट है — किसी एक तिथि पर खाता बही के सब शेषों की सूची, जिसका काम केवल यह देखना है कि डेबिट और क्रेडिट के जोड़ बराबर हैं या नहीं। जहाँ अंतर रह जाए और कारण तुरंत न मिले, वहाँ उचंत खाता खोलकर काम आगे बढ़ाया जाता है। चौथा और अंतिम पड़ाव अंतिम खाते हैं।
इस पेपर का लेखाशास्त्र वाला खंड बुनियादी बातों पर ही टिका है, पर उन्हें कथन के रूप में रखकर पूछता है, जहाँ एक शब्द बदलने से पूरा कथन पलट जाता है। यहाँ वे शब्द हैं 'निर्णायक', 'स्थायी' और कोष्ठक में दिया 'बैलेंसिंग' — तीनों जगह विषय-वस्तु परिचित है और भूल शब्द पर होती है।
पृष्ठ पर यह प्रश्न और उसके ठीक बाद वाला प्रश्न लगभग एक ही वाक्य से आरंभ होते हैं; अंतर केवल इतना है कि अगले प्रश्न में मोटे अक्षरों में एक 'नहीं' और जुड़ जाता है। इसलिए यहाँ पहला काम यह देखना है कि पूछा क्या गया है — सही कथन या ग़लत कथन। यह पुस्तिका अपने सभी निषेधात्मक प्रश्नों में नकार को मोटे अक्षरों में छापती है, जो अभ्यर्थी के पक्ष में जाता है, पर जल्दबाज़ी में वह उभार भी छूट जाता है।
उत्तर की दृष्टि से दूसरी उपयोगी आदत यह है कि जो विकल्प किसी पाठ-भेद, किसी अनुवाद या किसी शर्त पर नहीं टिका, वह अधिक भरोसेमंद होता है। यहाँ खाता बही वाला कथन ठीक ऐसा ही है : वह लेखांकन की परिभाषा भर है, और उसे ग़लत सिद्ध करने का कोई रास्ता नहीं।
मुख्य तथ्य
- खाता बही खातों की मुख्य पुस्तक है — लेन-देन वहाँ खाते के अनुसार वर्गीकृत होकर जमता है, और प्रत्येक खाते का शेष वहीं से निकलता है; तलपट और अंतिम खाते दोनों उसी पर खड़े हैं।
- जर्नल तथा सहायक बहियाँ मूल प्रविष्टि की पुस्तकें हैं, जहाँ लेन-देन तिथि के क्रम में उतरता है; इसीलिए जर्नल को पहली पुस्तक कहते हैं और खाता बही को मुख्य — दोनों बातें साथ-साथ सही हैं।
- तलपट का मिलान केवल गणितीय शुद्धता का संकेत है : चूक, सिद्धांत, करण और क्षतिपूरक भूलें तलपट को बराबर रहने देती हैं, इसलिए मिलान को सटीकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता।
- उचंत खाता तलपट के अंतर को अस्थायी रूप से रखने की व्यवस्था है; भूलें मिलते ही सुधार प्रविष्टियाँ उसी के विरुद्ध होती हैं और खाता शून्य होकर बंद हो जाता है — वह किसी अर्थ में स्थायी खाता नहीं है।
- वर्ष के अंत में वास्तविक और व्यक्तिगत खातों का शेष निकालकर आगे ले जाया जाता है, जबकि नाममात्र खाते व्यापार खाते या लाभ और हानि खाते में अंतरित कर के बंद किए जाते हैं — यही दोनों में मूल अंतर है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'जर्नल पहली पुस्तक है' और 'खाता बही मुख्य पुस्तक है' को परस्पर विरोधी मान लेना; ये दो अलग कसौटियाँ हैं — एक समय की, दूसरी महत्त्व की।
- तलपट के मिलान को खातों की शुद्धता का प्रमाण मान लेना; वह केवल इतना बताता है कि डेबिट और क्रेडिट के जोड़ बराबर हैं।
- नाममात्र खातों का शेष निकालकर आगे ले जाना; वे बंद किए जाते हैं और अगले वर्ष शून्य से आरंभ होते हैं, इसलिए चिट्ठे में नहीं आते।
इस विषय पर प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आता है। पहला रूप यही है — चार कथन और उनमें से एक सही या एक ग़लत छाँटना। यहाँ पूरी परीक्षा शब्दों पर होती है, इसलिए 'सदैव', 'केवल', 'निर्णायक', 'स्थायी' जैसे शब्द दिखते ही उन्हें अलग से जाँचिए।
दूसरा रूप सीधी परिभाषा का है : कौन-सी पुस्तक पहली है, तलपट क्या है, उचंत खाता क्यों खोला जाता है। इसी परिवार के एक पहले के पेपर में तलपट को 'किसी तिथि पर खाता बही के विभिन्न शेषों का विवरण' बताने वाला विकल्प कुंजी में दर्ज है, और एक अन्य पेपर में जर्नल को पहली पुस्तक बताया गया है।
तीसरा रूप वर्गीकरण का है — कोई मद देकर पूछना कि वह वास्तविक खाता है, व्यक्तिगत है या नाममात्र। बकाया किराया, ख्याति, आय और व्यय खाता जैसे मद इसी शीर्षक के अंतर्गत बार-बार लौटते हैं। तैयारी में इसलिए केवल परिभाषा नहीं, वर्गीकरण का व्यावहारिक अभ्यास भी कीजिए।
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EPFO_EOAO_2020_Q86Which one of the following statements about Trial Balance is correct ?
- (a) It is a book containing different accounts of an entity.
- (b) It is a statement containing balances of debtors of an entity.
- (c) It is a statement containing balances of debtors and creditors of an entity.
- (d) It is a statement containing the various ledger balances of an entity on a particular date.
उत्तर(d) It is a statement containing the various ledger balances of an entity on a particular date.
तलपट की परिभाषा पूछने वाला प्रश्न, जिसकी आधिकारिक कुंजी उसे किसी एक तिथि पर खाता बही के विभिन्न शेषों का विवरण बताती है।
EPFO_EOAO_2020_Q90Which one of the following is the first book in which the transactions of a business unit are recorded ?
- (a) Balance Sheet
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उत्तर(d) Journal
वह पुस्तक कौन-सी है जिसमें व्यवसाय का लेन-देन सबसे पहले दर्ज होता है — कुंजी जर्नल को पहली पुस्तक मानती है, जो खाता बही के मुख्य पुस्तक होने का खंडन नहीं करती।
EPFO_APFC_2023_Q43Which of the following errors is not detected by Trial Balance?
- (a) A credit purchase of ₹1,000 from Mr. Singh is credited wrongly to the account of Mr. Akash
- (b) A credit purchase of ₹20,000 from Mr. Sandhu is recorded in the day book as ₹2,000
- (c) Conversion of a temporary shed into a permanent building is recorded as repairs and maintenance expense
- (d) Error in posting from the book of subsidiary record to the ledger
उत्तर(d) Error in posting from the book of subsidiary record to the ledger
कौन-सी भूल तलपट से नहीं पकड़ी जाती — इसी बात का सीधा परीक्षण, जो यहाँ के विकल्प (a) को तय कर देता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
लेखा वर्ष के अंत में निम्नलिखित में से किस प्रकार के खातों का शेष निकालकर अगले वर्ष के लिए आगे नहीं ले जाया जाता, बल्कि उन्हें अंतिम खातों में अंतरित कर के बंद कर दिया जाता है ?
- (a)वास्तविक खाते
- (b)व्यक्तिगत खाते
- (c)नाममात्र खाते
- (d)प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाते
उत्तर(c) नाममात्र खाते — आय, व्यय, लाभ और हानि के खाते वर्ष के अंत में व्यापार खाते या लाभ और हानि खाते में अंतरित कर के बंद कर दिए जाते हैं और अगले वर्ष शून्य से आरंभ होते हैं; वास्तविक तथा व्यक्तिगत खातों का शेष आगे बढ़ता है और चिट्ठे में दिखता है।
- practice — not a real PYQ
तलपट का मिलान हो जाने पर भी निम्नलिखित में से कौन-सी भूल पुस्तकों में बनी रह सकती है ?
- (a)किसी खाते के जोड़ में की गई गणना की भूल
- (b)किसी राशि को केवल एक ही खाते में लिखना
- (c)मशीन की मरम्मत पर हुए व्यय को मशीन खाते में डाल देना
- (d)किसी राशि को डेबिट के स्थान पर क्रेडिट पक्ष में लिख देना
उत्तर(c) मशीन की मरम्मत पर हुए व्यय को मशीन खाते में डाल देना — यह सिद्धांत की भूल है, जिसमें डेबिट और क्रेडिट बराबर बने रहते हैं, इसलिए तलपट उसे नहीं पकड़ता; शेष तीनों में जोड़ बिगड़ जाता है और तलपट में अंतर दिखता है।