लेखांकन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)बनाई गई आरक्षित निधि (रिज़र्व), लाभों के विरुद्ध (अगेंस्ट) प्रभार है ।
- (b)पूँजीगत आरक्षित निधि सामान्यतः वितरण-योग्य लाभों से बनाई जाती है ।
- (c)सामान्य आरक्षित निधि का उपयोग केवल कुछ विशिष्ट उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है ।
- (d)‘प्रावधान’ लाभ के विरुद्ध (अगेंस्ट) प्रभार है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) ‘प्रावधान’ लाभ के विरुद्ध (अगेंस्ट) प्रभार है । — यही चारों में एकमात्र सही कथन है, और उसका आधार प्रावधान तथा आरक्षित निधि के मूल भेद में है।
भेद को एक वाक्य में इस प्रकार रखिए : प्रावधान लाभ के विरुद्ध प्रभार है, और आरक्षित निधि लाभ का विनियोजन है।
प्रावधान क्या है : वह राशि जो किसी ज्ञात दायित्व या हानि के लिए अलग रखी जाती है, जिसकी राशि ठीक-ठीक निर्धारित नहीं की जा सकती। संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान, मूल्यह्रास के लिए प्रावधान, और कराधान के लिए प्रावधान इसके सामान्य उदाहरण हैं। इसकी तीन पहचानें हैं। पहली, वह लाभ-हानि खाते में नामे की जाती है, यानी शुद्ध लाभ निकालने से पहले घटाई जाती है। दूसरी, वह लाभ हो या न हो, तब भी बनानी पड़ती है — हानि की दशा में हानि और बढ़ जाती है। तीसरी, वह उसी प्रयोजन पर ख़र्च होती है जिसके लिए बनाई गई थी और लाभांश बाँटने के लिए उपलब्ध नहीं होती।
आरक्षित निधि क्या है : वह लाभ का ही एक भाग है जिसे बाँटने के बजाय कारबार में रोक लिया जाता है। उसकी पहचानें उलटी हैं। वह लाभ-हानि विनियोजन खाते में जाती है, यानी शुद्ध लाभ निकल जाने के बाद; वह तभी बनाई जा सकती है जब लाभ हो; और वह चिट्ठे में आरक्षितियों और अधिशेष के अंतर्गत दिखाई जाती है।
इसीलिए यह भेद केवल शब्दों का नहीं है। प्रावधान बनाना अनिवार्य है, क्योंकि उसके बिना लाभ बढ़ा-चढ़ाकर दिखेगा; आरक्षित निधि बनाना विवेक का विषय है, क्योंकि वह लाभ के उपयोग का निर्णय है। इसी कारण प्रावधान सतर्कता की परंपरा से निकलता है और आरक्षित निधि वित्तीय नीति से।
विकल्प (d) ठीक यही कहता है, और उसमें कोष्ठक में दिया गया लिप्यंतरण भी अंग्रेज़ी की उसी शब्दावली की ओर संकेत करता है जिसमें इसे प्रभार कहा जाता है। शेष तीनों कथन इसी भेद को किसी न किसी दिशा में उलट देते हैं — पहला आरक्षित निधि को प्रभार बता देता है, दूसरा पूँजीगत आरक्षित निधि का स्रोत बदल देता है, और तीसरा सामान्य आरक्षित निधि को विशिष्ट बना देता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)बनाई गई आरक्षित निधि (रिज़र्व), लाभों के विरुद्ध (अगेंस्ट) प्रभार है । — यह कथन ठीक वही बात आरक्षित निधि के बारे में कह देता है जो प्रावधान के बारे में सही है, और इसीलिए यह विकल्प (d) का दर्पण-प्रतिबिंब है। आरक्षित निधि लाभ के विरुद्ध प्रभार नहीं, लाभ का विनियोजन है। उसकी सारी विशेषताएँ इसी से निकलती हैं : वह शुद्ध लाभ निकल जाने के बाद लाभ-हानि विनियोजन खाते में जाती है; वह तभी बनाई जा सकती है जब लाभ हो, इसलिए हानि के वर्ष में सामान्यतः कोई आरक्षित निधि नहीं बनती; और चिट्ठे में वह दायित्व-पक्ष पर आरक्षितियों और अधिशेष के अंतर्गत दिखाई जाती है, न कि किसी परिसंपत्ति में से घटाकर। इस भेद की एक व्यावहारिक कसौटी यह है : यदि उस मद को न बनाने से लाभ बढ़ जाता हो तो वह प्रभार है, और यदि न बनाने से लाभ वही रहता हो और केवल उसका बँटवारा बदलता हो तो वह विनियोजन है।
- (b)पूँजीगत आरक्षित निधि सामान्यतः वितरण-योग्य लाभों से बनाई जाती है । — पूँजीगत आरक्षित निधि वितरण-योग्य लाभों से नहीं, पूँजीगत लाभों से बनाई जाती है, इसलिए यह कथन स्रोत ही उलट देता है। पूँजीगत लाभ वे हैं जो कारबार के सामान्य प्रचालन से नहीं, बल्कि पूँजी की प्रकृति के लेन-देन से उत्पन्न होते हैं — स्थायी परिसंपत्ति के विक्रय पर हुआ लाभ, अंशों के प्रीमियम पर निर्गम, समामेलन से पहले की अवधि का लाभ, ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर हुआ लाभ, और ऋणपत्रों के मोचन पर हुआ लाभ। इन्हीं से पूँजीगत आरक्षित निधि बनती है। इसका दूसरा परिणाम यह है कि वह सामान्यतः लाभांश के रूप में बाँटने के लिए उपलब्ध नहीं होती; उसका उपयोग प्रायः पूँजीगत हानियों को पाटने या बोनस अंश निर्गमित करने जैसे प्रयोजनों में होता है। वितरण-योग्य लाभों से जो निधि बनती है वह राजस्व आरक्षित निधि कहलाती है, और सामान्य आरक्षित निधि उसी का उदाहरण है।
- (c)सामान्य आरक्षित निधि का उपयोग केवल कुछ विशिष्ट उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है । — यह कथन सामान्य आरक्षित निधि और विशिष्ट आरक्षित निधि को आपस में बदल देता है। सामान्य आरक्षित निधि वह है जो किसी विशेष प्रयोजन के लिए नहीं, बल्कि कारबार की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने और अज्ञात आकस्मिकताओं का सामना करने के लिए बनाई जाती है; उसे मुक्त आरक्षित निधि भी कहा जाता है और उसका उपयोग किसी भी वैध प्रयोजन में किया जा सकता है, जिसमें लाभांश देना और बोनस अंश निर्गमित करना भी सम्मिलित है। जो निधि केवल एक निश्चित प्रयोजन के लिए बनाई जाती है वह विशिष्ट आरक्षित निधि कहलाती है — जैसे ऋणपत्र मोचन आरक्षित निधि या लाभांश समकारी निधि। नामों में ही अंतर स्पष्ट है : जिसका नाम प्रयोजन बताता है वह विशिष्ट है, और जिसका नाम केवल 'सामान्य' है उसका कोई बँधा हुआ प्रयोजन नहीं है।
अवधारणा
प्रावधान, आरक्षित निधि और आरक्षित संचय — ये तीन शब्द लेखांकन में पास-पास चलते हैं और परीक्षा में लगभग हर वर्ष किसी न किसी रूप में आते हैं। इन्हें एक तालिका के रूप में याद रखना सबसे सुरक्षित है।
प्रावधान : ज्ञात दायित्व या हानि के लिए, जिसकी राशि ठीक-ठीक निर्धारित न की जा सके। लाभ-हानि खाते में नामे। लाभ हो या न हो, बनाना अनिवार्य। उदाहरण — संदिग्ध ऋणों का प्रावधान, मूल्यह्रास का प्रावधान, कराधान का प्रावधान, बट्टे का प्रावधान।
आरक्षित निधि : लाभ का वह भाग जो कारबार में रोका जाता है। लाभ-हानि विनियोजन खाते में। लाभ होने पर ही संभव। दो प्रकार की — राजस्व आरक्षित निधि, जो प्रचालन के लाभ से बनती है, और पूँजीगत आरक्षित निधि, जो पूँजीगत लाभों से।
राजस्व आरक्षित निधि के भीतर फिर दो भेद हैं : सामान्य आरक्षित निधि, जिसका कोई निर्दिष्ट प्रयोजन नहीं, और विशिष्ट आरक्षित निधि, जो किसी एक प्रयोजन के लिए बनाई जाती है।
इस वर्गीकरण का व्यावहारिक महत्व लाभ की गणना पर है। प्रावधान शुद्ध लाभ निकालने से पहले घटता है, इसलिए वह लाभ की संख्या बदल देता है। आरक्षित निधि शुद्ध लाभ निकलने के बाद बनती है, इसलिए वह लाभ की संख्या नहीं, उसके उपयोग का चित्र बदलती है। जो अभ्यर्थी यह क्रम याद रखता है — पहले प्रभार, फिर शुद्ध लाभ, फिर विनियोजन — उसके लिए इस विषय का हर प्रश्न सीधा हो जाता है।
एक चौथा शब्द भी साथ रखिए : आकस्मिक दायित्व, जो न प्रावधान है न आरक्षित निधि, क्योंकि वह अभी दायित्व बना ही नहीं है; उसे केवल टिप्पणी में प्रकट किया जाता है।
इस भेद की जड़ इस बात में है कि लाभ की संख्या किसके लिए बनाई जाती है। वित्तीय विवरण अंशधारियों, ऋणदाताओं, कर-प्राधिकारियों और नियामकों के लिए बनते हैं, और उन सबके लिए यह जानना आवश्यक है कि उद्यम ने वास्तव में कितना कमाया। यदि ज्ञात दायित्वों और संभावित हानियों को घटाए बिना लाभ दिखा दिया जाए तो वह संख्या झूठी होगी, और उसी पर लाभांश बँट जाएगा तथा कर चुका दिया जाएगा। इसीलिए प्रावधान को प्रभार बनाया गया — वह विकल्प नहीं, बाध्यता है।
दूसरी ओर, कमाया हुआ लाभ कितना बाँटा जाए और कितना कारबार में रोका जाए, यह प्रबंधन और अंशधारियों का निर्णय है। उसे लाभ की संख्या के भीतर घुसाना ठीक नहीं होगा, क्योंकि तब पाठक यह नहीं जान पाएगा कि उद्यम ने कितना कमाया और कितना रोका। इसीलिए आरक्षित निधि को विनियोजन बनाया गया — वह लाभ निकल जाने के बाद का निर्णय है।
पूँजीगत आरक्षित निधि पर लगी सीमा भी इसी तर्क का विस्तार है। स्थायी परिसंपत्ति बेचकर या अंश प्रीमियम पर निर्गमित करके जो लाभ मिलता है वह कारबार की कमाई नहीं है; उसे लाभांश के रूप में बाँट देना वस्तुत: पूँजी बाँट देना होगा, जिससे ऋणदाताओं की सुरक्षा घट जाती है। इसीलिए उसे अलग रखा जाता है और उसका उपयोग सीमित रहता है।
यही कारण है कि इस विषय के प्रश्न प्रायः कथन के रूप में आते हैं, क्योंकि हर कथन में एक शब्द बदलकर पूरा अर्थ पलटा जा सकता है — प्रभार को विनियोजन, पूँजीगत को वितरण-योग्य, और सामान्य को विशिष्ट।
मुख्य तथ्य
- प्रावधान लाभ के विरुद्ध प्रभार है और आरक्षित निधि लाभ का विनियोजन — यही इस विषय का मूल भेद है।
- प्रावधान लाभ-हानि खाते में नामे किया जाता है और लाभ हो या न हो, बनाना अनिवार्य है; आरक्षित निधि लाभ-हानि विनियोजन खाते में जाती है और लाभ होने पर ही बनाई जा सकती है।
- प्रावधान के सामान्य उदाहरण हैं — संदिग्ध ऋणों का प्रावधान, मूल्यह्रास का प्रावधान, कराधान का प्रावधान, और बट्टे का प्रावधान।
- पूँजीगत आरक्षित निधि पूँजीगत लाभों से बनती है — स्थायी परिसंपत्ति के विक्रय पर लाभ, अंश प्रीमियम, समामेलन से पहले की अवधि का लाभ, ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर लाभ — और सामान्यतः लाभांश के लिए उपलब्ध नहीं होती।
- सामान्य आरक्षित निधि का कोई निर्दिष्ट प्रयोजन नहीं होता और उसे मुक्त आरक्षित निधि भी कहा जाता है; जो निधि एक निश्चित प्रयोजन के लिए बनाई जाती है वह विशिष्ट आरक्षित निधि कहलाती है।
- आकस्मिक दायित्व न प्रावधान है न आरक्षित निधि, क्योंकि वह अभी दायित्व बना ही नहीं है; उसे केवल टिप्पणी में प्रकट किया जाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'प्रभार' और 'विनियोजन' दो अलग शब्द हैं और चारों कथनों की जाँच इसी जोड़े से होती है। कसौटी यह है कि उस मद को न बनाने से लाभ बदलता है या नहीं।
- पूँजीगत आरक्षित निधि का स्रोत पूँजीगत लाभ है, प्रचालन का लाभ नहीं। यही अंश बदलकर कथन ग़लत बनाया जाता है।
- सामान्य और विशिष्ट आरक्षित निधि आपस में बदलकर पूछी जाती हैं। जिसका नाम प्रयोजन बताता है वही विशिष्ट है।
- आकस्मिक दायित्व को प्रावधान मान लेना अलग दिशा की भूल है; उसके लिए कोई राशि नहीं रखी जाती, केवल टिप्पणी दी जाती है।
इस विषय पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला वही है जो यहाँ है — चार कथन देकर सही कथन पूछना, जिनमें से तीन में एक-एक शब्द बदलकर अर्थ पलट दिया गया होता है; ऐसे प्रश्न में हर कथन को अलग-अलग जाँचिए और हर बार यही पूछिए कि यह मद लाभ निकलने से पहले घटती है या बाद में। दूसरा साँचा वर्गीकरण का है — किसी मद का नाम देकर पूछना कि वह प्रावधान है या आरक्षित निधि, और यदि आरक्षित निधि है तो पूँजीगत है या राजस्व; इसके लिए दोनों की उदाहरण-सूचियाँ याद होनी चाहिए। तीसरा साँचा व्यावहारिक है, जिसमें तलपट का एक अंश देकर संदिग्ध ऋणों या बट्टे के प्रावधान की गणना और उसका अंतिम खातों में व्यवहार पूछा जाता है; इसी परीक्षा-परिवार में यह रूप एक से अधिक बार आ चुका है। तीनों की तैयारी एक तालिका से हो जाती है : मद का नाम, वह प्रभार है या विनियोजन, वह किस खाते में जाती है, और चिट्ठे में कहाँ दिखती है।
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EPFO_APFC_2023_Q107The value of long-term investment in shares is subject to wide fluctuations. A provision created against fluctuation in value of investments is based on the convention of
- (a) conservatism
- (b) full disclosure
- (c) materiality
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- (a) ₹ 2,50,000
- (b) ₹ 1,30,000
- (c) ₹ 90,000
- (d) ₹ 3,30,000
उत्तर(d) ₹ 3,30,000
तलपट का एक अंश देकर संदिग्ध ऋणों के प्रावधान से जुड़ी गणना पूछता है — यहाँ की संकल्पना का व्यावहारिक रूप।
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- (a) ₹ 25,000
- (b) ₹ 13,000
- (c) ₹ 9,000
- (d) ₹ 33,000
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तलपट का एक अंश देकर देनदारों को दिए जाने वाले बट्टे के प्रावधान से जुड़ी गणना पूछता है — प्रावधान की वही कोटि, दूसरी मद पर लागू।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
लेखांकन में किसी मद के प्रावधान होने और आरक्षित निधि होने का निर्णय करने की सबसे सरल कसौटी निम्नलिखित में से कौन-सी है ?
- (a)वह मद चिट्ठे के किस पक्ष में दिखती है
- (b)उस मद को न बनाने से शुद्ध लाभ की राशि बदलती है या नहीं
- (c)उस मद की राशि बड़ी है या छोटी
- (d)वह मद पिछले वर्ष भी बनाई गई थी या नहीं
उत्तर(b) उस मद को न बनाने से शुद्ध लाभ की राशि बदलती है या नहीं
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा लाभ पूँजीगत आरक्षित निधि बनाने का स्रोत नहीं है ?
- (a)अंशों के प्रीमियम पर निर्गम से प्राप्त राशि
- (b)स्थायी परिसंपत्ति के विक्रय पर हुआ लाभ
- (c)माल की सामान्य बिक्री पर हुआ प्रचालन-लाभ
- (d)ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर हुआ लाभ
उत्तर(c) माल की सामान्य बिक्री पर हुआ प्रचालन-लाभ