भारत के किस राज्य को खनिजलवणों का राज्य कहते हैं ?
- (a)बिहार
- (b)झारखण्ड
- (c)पश्चिम बंगाल
- (d)उड़ीसा
सही — (b) झारखण्ड। यह उपनाम वाला प्रश्न है, और इसे सुरक्षित बनाने का तरीक़ा यह है कि उपनाम जिस वास्तविकता को दर्ज करता है वह पता हो। झारखण्ड छोटानागपुर पठार पर बैठा है, जहाँ दो बिलकुल अलग शैल-तन्त्र संयोग से अग़ल-बग़ल पड़े हैं : दामोदर घाटी की द्रोणियों में गोंडवाना अवसाद, जो कोयला ढोते हैं, और सिंहभूम पट्टी में आर्कियन तथा धारवाड़ क्रिस्टलीय शैल, जो धात्विक अयस्क ढोते हैं। भारत में शायद ही कहीं और ईंधन खनिज और धातु-अयस्क इतने पास-पास एक के ऊपर एक पड़े हों, और झारखण्ड सरकार का अपना विवरण इसी परिणाम के नाम गिनाता है — लौह अयस्क, कोयला, ताम्र अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट, ग्रैफ़ाइट, चूना-पत्थर तथा यूरेनियम। झारखण्ड को अलग करने वाली बात कोई एक वरीयता नहीं, बल्कि लगभग-एकाधिकारों का एक समूह है। धनबाद जिले का झरिया देश का प्रमुख प्राइम कोकिंग कोल स्रोत है — वही श्रेणी जिसके बिना वात्या भट्ठी नहीं चल सकती — और वहाँ कोयले की परतों में लगी आग 1916 से जल रही है। घाटशिला तथा मोसाबनी के आसपास की सिंहभूम ताम्र पट्टी भारत का मुख्य ताम्र-अयस्क प्रान्त है। पूर्वी सिंहभूम का जादूगोड़ा भारत की पहली यूरेनियम खान है : निक्षेप 1951 में मिला, खान 1967 में चलनी शुरू हुई, और उसे यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया चलाता है, जिसका अयस्क वहीं पीसकर येलोकेक बनाया जाता है और रेल से न्यूक्लियर फ़्यूल कॉम्प्लेक्स भेजा जाता है। कोडरमा–गिरिडीह पट्टी भारतीय अभ्रक का ऐतिहासिक केन्द्र है। लौह अयस्क पश्चिमी सिंहभूम के नोआमुंडी तथा गुआ से आता है, और ठीक इसी कारण देश का पहला एकीकृत इस्पात संयन्त्र 1907 से जमशेदपुर में बना और बाद में बोकारो आया। पाठ की एक बात : प्रश्न-पत्र की हिन्दी पंक्ति में यह उपनाम 'खनिजलवणों का राज्य' छपा है, जो अंग्रेज़ी संस्करण के 'State of Minerals' का ढीला अनुवाद है — अभिप्रेत उपनाम खनिजों का राज्य ही है, और उत्तर दोनों पाठों में वही रहता है। इस उपनाम की सीमा के बारे में ईमानदार रहना भी ज़रूरी है : यह प्रचलित प्रयोग है, कोई शासकीय पदनाम नहीं, और केवल उत्पादन देखा जाए तो कई अयस्कों में ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ झारखण्ड से आगे हैं। यह वाक्यांश विविधता तथा ऐतिहासिक केन्द्रीयता दर्ज करता है — वह राज्य जो एक साथ कोयला, लोहा, ताँबा, अभ्रक, बॉक्साइट तथा यूरेनियम दे सकता है।
- (a)बिहार — बिहार के पत्र पर यही सबसे तीखा जाल है, क्योंकि कभी यही सही उत्तर था। अविभाजित बिहार के पास पूरी छोटानागपुर पट्टी थी और उसे नियमित रूप से भारत का खनिज-राज्य कहा जाता था। बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 ने 15 नवम्बर 2000 को दक्षिणी जिले अलग कर दिए, और झरिया, बोकारो, नोआमुंडी, सिंहभूम की ताम्र पट्टी तथा जादूगोड़ा उन्हीं के साथ चले गए। आज के बिहार का खनिज आधार चूना-पत्थर तथा गौण खनिज हैं; जो अभ्यर्थी 2000 से पहले की पाठ्यपुस्तक से उत्तर देता है, वह बिहार लिखता है।
- (c)पश्चिम बंगाल — पश्चिम बंगाल के पास सचमुच एक प्रसिद्ध खनिज सम्पदा है — रानीगंज कोयला क्षेत्र, जहाँ 1774 में भारत में व्यावसायिक कोयला खनन आरम्भ हुआ था — और उसी पर खड़ी आसनसोल तथा दुर्गापुर की औद्योगिक पट्टी। पर बात लगभग इतनी ही है। राज्य के पास तुलनीय धात्विक अयस्क सम्पदा नहीं है, इसलिए वह ऐसा नाम नहीं ढो सकता जो विविधता के बारे में हो।
- (d)उड़ीसा — सबसे मज़बूत वास्तविक प्रतिद्वन्द्वी, और कई पैमानों पर आगे भी : ओडिशा भारत का लगभग आधा लौह अयस्क देता है, सुकिन्दा घाटी में देश का लगभग 97 प्रतिशत क्रोमाइट है, और वह अग्रणी बॉक्साइट राज्य है। पर उसकी ताक़त कुछ अयस्कों में केन्द्रित गहराई है, न कि कोयला, धातु, औद्योगिक खनिज तथा यूरेनियम तक फैला वह विस्तार जिसकी ओर यह उपनाम संकेत करता है, और भारतीय प्रयोग में यह विशेषण झारखण्ड से ही जुड़ा है।
भारत का खनिज भूगोल उसके प्रशासनिक मानचित्र का नहीं, उसके भूविज्ञान का अनुसरण करता है। भारत का कोयला अत्यधिक रूप से गोंडवाना कोयला है, जो पर्मियन युग की भ्रंश-द्रोणियों में बिछा, और वे द्रोणियाँ दामोदर, सोन, महानदी तथा गोदावरी घाटियों के साथ-साथ चलती हैं — इसीलिए लगभग सारा कोयला झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश तथा तेलंगाना के पास है। धात्विक अयस्क प्रायद्वीपीय ढाल की कहीं अधिक प्राचीन आर्कियन तथा धारवाड़ क्रिस्टलीय चट्टानों से आते हैं, जो सिंहभूम, क्योंझर, बस्तर, बेल्लारी तथा अरावली में उघड़ी हुई हैं। जहाँ कोई गोंडवाना द्रोणी किसी क्रिस्टलीय ढाल-खण्ड के बग़ल में बैठ जाती है, वहाँ राज्य को ईंधन तथा धातु दोनों मिल जाते हैं, और भारी उद्योग पीछे-पीछे आ जाता है : जमशेदपुर से बोकारो, दुर्गापुर तथा राउरकेला तक फैली लोहा-इस्पात पट्टी ठीक इसी कारण है। छोटानागपुर पठार इसका प्रतिनिधि भारतीय उदाहरण है, और 'खनिजों का राज्य' वाक्यांश असल में उसी का वर्णन कर रहा है।
उपनाम वाले प्रश्नों का उत्तर यह याद करने से नहीं आता कि सबसे पहले किसने ऐसा कहा, बल्कि उस वस्तु पर तर्क करने से आता है जिसका वह उपनाम वर्णन करता है। यहाँ काम का प्रश्न यह है : इन चार राज्यों में से कौन ईंधन खनिज तथा धात्विक अयस्क, दोनों एक साथ रखता है — न कि केवल एक या दूसरा ? पश्चिम बंगाल के पास कोयला है और उसके अलावा लगभग कुछ नहीं, इसलिए वह सबसे पहले बाहर होता है। ओडिशा के पास धात्विक अयस्क भारी मात्रा में हैं, पर वह उस अर्थ में कोयला-और-धातु वाला राज्य नहीं है। बचते हैं बिहार तथा झारखण्ड, और विभेद करने वाला तथ्य एक तिथि है — 15 नवम्बर 2000, जब छोटानागपुर के जिले बिहार से अलग किए गए। यह उपनाम जिन खनिज सम्पदाओं की ओर संकेत करता है, वे सब उस रेखा के झारखण्ड वाले किनारे पर हैं। BPSC के अभ्यर्थी के लिए इस कार्ड की सबसे मूल्यवान चीज़ यही एक तिथि है, क्योंकि वह चुपचाप प्रश्नों के एक पूरे कुल को नियन्त्रित करती है : बिहार के कोयला भण्डार, बिहार के इस्पात संयन्त्र, बिहार की प्रति व्यक्ति आय और बिहार का औद्योगिक आधार — इन सबका पाठ इस तिथि से पहले और बाद में पूरी तरह अलग है।
- झारखण्ड 15 नवम्बर 2000 को बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अन्तर्गत बना, जिसमें छोटानागपुर तथा संथाल परगना के जिले बिहार से निकाले गए
- झारखण्ड सरकार राज्य को लौह अयस्क, कोयला, ताम्र अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट, ग्रैफ़ाइट, चूना-पत्थर तथा यूरेनियम से सम्पन्न बताती है
- पूर्वी सिंहभूम का जादूगोड़ा भारत की पहली यूरेनियम खान थी — निक्षेप 1951 में खोजा गया, खनन 1967 से, संचालन यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा
- धनबाद जिले का झरिया भारत का प्रमुख प्राइम कोकिंग कोल स्रोत है, और वहाँ भूमिगत कोयला-परतों में आग 1916 से जल रही है
- लौह अयस्क उत्पादन में ओडिशा पहले स्थान पर है और अकेले लगभग आधा उत्पादन देता है, फिर छत्तीसगढ़ तथा कर्नाटक, जबकि झारखण्ड लगभग चौथे स्थान पर लगभग दसवाँ हिस्सा देता है — इसलिए यह उपनाम मात्रा का नहीं, विविधता का है
- भारत का लगभग 97 प्रतिशत क्रोमाइट ओडिशा की सुकिन्दा घाटी में है, और इसीलिए यहाँ ओडिशा असली प्रतिद्वन्द्वी विकल्प है
उपनाम जिस बात का वर्णन करता है उसी से तर्क कीजिए : कौन-सा राज्य ईंधन खनिज तथा धात्विक अयस्क एक साथ रखता है ? इससे पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा निकल जाते हैं, और जो दो बचते हैं उनके बीच निर्णय 2000 के विभाजन की तिथि करती है।
- 2000 से पहले की पाठ्यपुस्तक से बिहार लिख देना — खनिज पट्टी 15 नवम्बर 2000 को झारखण्ड चली गई और पुराना विशेषण भी उसी के साथ गया
- लौह अयस्क, बॉक्साइट तथा क्रोमाइट में ओडिशा की अग्रता को उपनाम का निर्णायक मान लेना; कुछ अयस्कों में अग्रता और अनेक में विस्तार एक बात नहीं
- पश्चिम बंगाल को इसलिए खनिज-विपन्न मान लेना कि वह औद्योगिक है — उसके पास रानीगंज है, भारत का सबसे पुराना कोयला क्षेत्र, पर धात्विक अयस्क लगभग नहीं
BPSC यह नाम सीधे पूछता है और विकल्पों में बिहार को सबसे पहले रख देता है, जिससे प्रश्न इस बात की जाँच बन जाता है कि अभ्यर्थी ने 2000 के विभाजन के हिसाब से अपनी जानकारी अद्यतन की है या नहीं। UPSC उपनाम कभी नहीं पूछता; वह पूछता है कि किसी नामित राज्य में कौन-से खनिज मिलते हैं, या किसी खनिज को करनपुरा अथवा हट्टी जैसे खनन-स्थल से जोड़ने को कहता है — इसलिए वही जानकारी वाक्यांश के बजाय मानचित्र के रूप में थामनी पड़ती है।
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए : सूची I (खनिज) I. कोयला II. सोना III. अभ्रक IV. मैंगनीज़ सूची II (प्राप्ति के विशिष्ट क्षेत्र) A) भंडारा B) करनपुरा C) हट्टी D) नेल्लोर कूट :
- (a) I-A, II-C, III-B, IV-D
- (b) I-B, II-C, III-D, IV-A
- (c) I-C, II-D, III-B, IV-A
- (d) I-B, II-A, III-D, IV-C
उत्तर(b) I-B, II-C, III-D, IV-A
वही खनिज मानचित्र, पर उपनाम के बजाय स्थानों के रूप में पूछा गया — और कोयले का स्थान करनपुरा है, दामोदर घाटी का वह क्षेत्र जो अब झारखण्ड में है। जो अभ्यर्थी खनन-जिलों को मानचित्र पर रख सकता है, वह दोनों रूपों का उत्तर दे देता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारत में राज्य सरकारों को ग़ैर-कोयला खानों की नीलामी का अधिकार नहीं है। 2. आन्ध्र प्रदेश तथा झारखण्ड में सोने की खानें नहीं हैं। 3. राजस्थान में लौह अयस्क की खानें हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) 1 तथा 2
- (b) केवल 2
- (c) 1 तथा 3
- (d) केवल 3
उत्तर(d) केवल 3
वही सम्पदा, पर दूसरी दिशा से जाँची हुई — कथन 2 ठीक इसलिए असफल होता है कि झारखण्ड में अपने कोयले, ताँबे, लोहे, अभ्रक तथा यूरेनियम के साथ-साथ सोना भी है। यही विस्तार वह बात है जिसकी ओर BPSC का उपनाम संकेत कर रहा है।
भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किसमें कोयले का प्रमुख भण्डार है ?
- (a) झारखंड
- (b) छत्तीसगढ़
- (c) ओडिशा
- (d) उपर्युक्त सभी
उत्तर(d) उपर्युक्त सभी
दिसम्बर 2024 में हुई 70वीं CCE का पत्र — यह इस पुनर्परीक्षा से अलग पत्र है — इन्हीं तीन खनिज राज्यों को सामने रखकर यह बात कहता है कि वे गोंडवाना कोयला पट्टी साझा करते हैं। यह प्रश्न आगे पूछता है कि इनमें खनिज-राज्य किसे कहा जाता है, इसलिए दोनों प्रश्न मिलकर 'कोयला है' को 'सब कुछ है' से अलग कर देते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- (a) धारवाड़ चट्टान संरचना में प्राकृतिक गैस पाई जाती है।
- (b) अभ्रक कोडरमा में पाया जाता है।
- (c) कडप्पा शृंखला हीरों के लिए प्रसिद्ध है।
- (d) पेट्रोलियम भंडार अरावली पहाड़ियों में पाए जाते हैं।
उत्तर(b) अभ्रक कोडरमा में पाया जाता है।
69वीं CCE के पत्र ने झारखण्ड का एक खनिज-स्थल सीधे उत्तर बनाया — कोडरमा, भारतीय अभ्रक का ऐतिहासिक केन्द्र और उन्हीं निक्षेपों में से एक जिन पर 'खनिजों का राज्य' वाला नाम टिका है। तीन पत्रों के भीतर आयोग इस पट्टी को दोनों सिरों से जाँच चुका है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
भारत की पहली यूरेनियम खान जादूगोड़ा किस राज्य में है ?
- (a)आन्ध्र प्रदेश
- (b)झारखण्ड
- (c)मेघालय
- (d)राजस्थान
उत्तर(b) झारखण्ड — पूर्वी सिंहभूम जिले में, जिसे 1967 से यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया चलाता है; आन्ध्र प्रदेश का तुम्मलपल्ले तथा मेघालय का डोमियासियात याद रखने योग्य दूसरे नाम हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के प्राइम कोकिंग कोल के मुख्य स्रोत झरिया कोयला क्षेत्र किस नदी की घाटी में है ?
- (a)स्वर्णरेखा
- (b)दामोदर
- (c)सोन
- (d)महानदी
उत्तर(b) दामोदर — झरिया, बोकारो, रानीगंज तथा करनपुरा, सभी क्षेत्र दामोदर घाटी की गोंडवाना द्रोणी में पड़ते हैं।