यकृत में भण्डारित होते हैं
- (a)A, B एवं C विटामिन
- (b)A, B, C एवं D विटामिन
- (c)केवल A तथा B विटामिन
- (d)इनमें से कोई नहीं
सही — (b) A, B, C एवं D विटामिन। आरम्भ उससे कीजिए जो शरीर-क्रिया की दृष्टि से सच है, क्योंकि इस प्रश्न के विकल्प उसे दोहराते ही नहीं। यकृत शरीर का प्रमुख भण्डार-गृह है, और वह संचित रखता है चारों वसा-घुलनशील विटामिन — A, D, E तथा K — के साथ जल-घुलनशील विटामिन B12 भी : विटामिन A की लगभग एक से दो वर्ष की, विटामिन D की एक से चार महीने की और विटामिन B12 की तीन से पाँच वर्ष की आपूर्ति, तथा साथ में लोहा, ताँबा, जस्ता, कोबाल्ट और मॉलिब्डेनम, और शरीर का मुख्य ग्लाइकोजन भण्डार। चारों विकल्पों में से कोई भी यह सूची नहीं छापता, और यह कार्ड इसे छिपाने के बजाय साफ़ कह देता है। विकल्प-सूची असल में तीन एक-दूसरे में समाए हुए अनुमान देती है — 'केवल A तथा B', फिर 'A, B एवं C', फिर 'A, B, C एवं D' — और साथ में एक बच-निकलने वाला विकल्प। इन्हें समावेशी समुच्चयों के रूप में पढ़ते ही प्रश्न स्मृति से नहीं, अन्तर्वेशन से हल हो जाता है। विटामिन D निर्विवाद रूप से उन विटामिनों में है जिन्हें यकृत भण्डारित करता है, और सच तो यह है कि आहार तथा त्वचा से मिले विटामिन D का पहला हाइड्रॉक्सिलीकरण यकृत में ही होता है — 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D में — और यही रक्त में घूमने वाला संचित रूप है तथा यही वह रूप है जिसे रक्त-जाँच मापती है। चारों में केवल विकल्प (b) में D है। विकल्प (a) तथा (c) (b) के ही सख़्त उपसमुच्चय हैं जिनमें से D हटा दिया गया है, इसलिए (b) के पृष्ठ पर रहते इनमें से कोई टिक नहीं सकता — यदि 'A, B एवं C विटामिन' सही है, तो 'A, B, C एवं D विटामिन' और अधिक सही है, क्योंकि वह एक ऐसा विटामिन जोड़ता है जिसे यकृत निश्चित रूप से भण्डारित करता है और कुछ घटाता नहीं। (b) B के बारे में भी उसी अर्थ में सही है जो यहाँ मायने रखता है : विटामिन B12 मानव शरीर में सबसे लम्बे समय तक संचित रहने वाला विटामिन है और वह बैठता यकृत में ही है। इसकी अकेली कमज़ोर कड़ी C है। ऐस्कॉर्बेट जल-घुलनशील है, यकृत के ऊतक में उसकी सान्द्रता ऊँची रहती भी है, पर उस तरह का भण्डार नहीं होता जैसा विटामिन A या B12 का होता है — इसीलिए अभाव के कुछ ही महीनों में स्कर्वी प्रकट हो सकती है, जबकि B12 का भण्डार वर्षों चलता है। इसलिए उपलब्ध विकल्पों में (b) ही सबसे पूर्ण सच्चा कथन है, और यही कारण है कि हमारी दो स्वतन्त्र व्युत्पत्तियाँ इसी पर आकर टिकीं — अन्तर्वेशन के आधार पर, किसी पाठ्यपुस्तक-सूची से मिलान करके नहीं।
- (a)A, B एवं C विटामिन — ये वे तीन विटामिन हैं जिनका नाम अभ्यर्थी सबसे पहले लेता है, और जाल ठीक यही परिचितता है। यह विटामिन D को छोड़ देता है, जिसे यकृत निःसन्देह भण्डारित करता है और भण्डारित ही नहीं, रासायनिक रूप से तैयार भी करता है — 25-हाइड्रॉक्सिलीकरण का चरण यकृत-कोशिकाओं में ही होता है। यह विकल्प जो कुछ दावा करता है, वह सब विकल्प (b) भी करता है; बस एक सच्ची बात कम करता है।
- (c)केवल A तथा B विटामिन — सबसे सँकरा पाठ, और 'केवल' शब्द इसे आंशिक नहीं, अपवर्जी बना देता है — यह दावा करता है कि यकृत A तथा B के बाहर कोई विटामिन भण्डारित करता ही नहीं। यह दो बार ग़लत है : विटामिन D वहाँ भण्डारित भी होता है और हाइड्रॉक्सिलीकृत भी, तथा विटामिन E और K भी वहीं संचित होते हैं। जो विकल्प सूची बन्द कर देता है उसे ग़लत सिद्ध करना सबसे आसान होता है, क्योंकि एक ही प्रतिउदाहरण उसे मार देता है।
- (d)इनमें से कोई नहीं — ईमानदार उपविजेता, और कोई कड़ा शरीर-क्रिया-विज्ञानी इसका बचाव कर सकता है : ठीक-ठीक सूची A, D, E, K तथा B12 है, इसलिए यहाँ हर विकल्प E और K को छोड़ देता है और विकल्प (b) ऊपर से C जोड़ देता है, जो किसी तुलनीय अर्थ में भण्डारित होता ही नहीं। हम इसे उत्तर नहीं मानते, क्योंकि 'यकृत में भण्डारित होते हैं' यह पूछता है कि यकृत क्या भण्डारित करता है, न कि पूरी सूची माँगता है — और उस पाठ पर विकल्प (b) ऐसी चीज़ों का समुच्चय बताता है जिन्हें यकृत सचमुच भण्डारित करता है। 'इनमें से कोई नहीं' तभी सही होता है जब शेष तीनों में से हर एक का असफल होना दिखाया जा सके, और इस पाठ पर (b) असफल नहीं होता — फिर भी यह अपने खण्ड का सबसे कमज़ोर प्रश्न है, और यही कारण है कि यहाँ हमारा विश्वास उच्च नहीं, मध्यम है।
विटामिन घुलनशीलता के आधार पर दो समूहों में बँटते हैं, और यही विभाजन उनके बारे में लगभग बाक़ी सब कुछ तय कर देता है। वसा-घुलनशील विटामिन — A, D, E तथा K — आहार की वसा के साथ अवशोषित होते हैं, उस अवशोषण के लिए पित्त चाहिए, और वे यकृत तथा वसा-ऊतक में संचित रहते हैं; इसलिए इनका सेवन रुक-रुककर भी चल सकता है और अधिकता बह जाने के बजाय जमा होती जाती है — यही कारण है कि हाइपरविटामिनोसिस A तथा D वास्तविक चिकित्सकीय स्थितियाँ हैं। जल-घुलनशील विटामिन — B समूह तथा C — रक्त-प्लाज़्मा में घूमते हैं, अतिरिक्त मात्रा अधिकतर मूत्र से निकल जाती है, और इन्हें नियमित रूप से लेना पड़ता है। विटामिन B12 इसका एक बड़ा अपवाद है : वह जल-घुलनशील है, फिर भी बँधकर, आन्तरिक कारक (intrinsic factor) से ढोया जाकर और इतनी कुशलता से पुनः प्राप्त किया जाकर चलता है कि यकृत में तीन से पाँच वर्ष का भण्डार रहता है। यकृत स्वयं शरीर का सबसे बड़ा आन्तरिक अंग तथा उसका रासायनिक कारख़ाना है — वह पित्त बनाता है, यूरिया चक्र चलाता है जो विषैली अमोनिया को यूरिया में बदलता है, ग्लाइकोजन तथा लोहा संचित करता है, प्लाज़्मा प्रोटीन बनाता है, और औषधियों तथा मद्य का विषहरण करता है। भण्डारण उसके कामों में से केवल एक है, पर यह प्रश्न उसी को जाँचता है।
दो चालें इस प्रश्न को बिना कोई सूची रटे हल कर देती हैं। पहली, यह देखिए कि सकारात्मक विकल्प एक-दूसरे में समाए हुए हैं : 'केवल A तथा B' 'A, B एवं C' के भीतर बैठता है, और वह 'A, B, C एवं D' के भीतर। जब भी विकल्प इस तरह समाए हों, सही वही होता है जो सबसे बड़ा हो और फिर भी सच हो — क्योंकि जब कोई बड़ी सच्ची सूची सामने हो तो छोटी सूची सही नहीं हो सकती; और 'इनमें से कोई नहीं' तभी जीतता है जब सबसे बड़ी सूची में भी कोई निश्चित असत्य हो। दूसरी, वह एक मद खोजिए जो विभेद करती हो। यहाँ वह विटामिन D है, और निर्णायक तथ्य केवल इतना नहीं कि यकृत D को भण्डारित करता है, बल्कि यह कि यकृत स्वयं विटामिन D के उपापचय का एक पड़ाव है : त्वचा या आहार से मिला कोलेकैल्सिफ़ेरॉल यकृत में 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D में बदलता है, और उसके बाद ही वृक्क दूसरा हाइड्रॉक्सिल जोड़कर सक्रिय 1,25-डाइहाइड्रॉक्सी रूप बनाता है। जिस विटामिन को यकृत संसाधित भी करता है और थामे भी रखता है, उसे यकृत के भण्डार की सूची से बाहर नहीं किया जा सकता। यही एक तथ्य (a) तथा (c) दोनों को एक साथ हटा देता है और चुनाव (b) तथा बच-निकलने वाले विकल्प के बीच छोड़ जाता है — और प्रश्न का असली दोष भी यहीं है, क्योंकि पाठ्यपुस्तक की सूची A, D, E, K तथा B12 है और उसे कोई विकल्प छापता ही नहीं।
- यकृत विटामिन A (एक से दो वर्ष की आपूर्ति), विटामिन D (एक से चार महीने की आपूर्ति) तथा विटामिन B12 (तीन से पाँच वर्ष की आपूर्ति) के साथ विटामिन K, विटामिन E, लोहा, ताँबा, जस्ता, कोबाल्ट तथा मॉलिब्डेनम भी संचित रखता है
- वसा-घुलनशील विटामिन A, D, E तथा K के अवशोषण के लिए पित्त चाहिए और वे यकृत तथा वसा-ऊतक में संचित होते हैं; जल-घुलनशील B समूह तथा विटामिन C अधिक होने पर अधिकतर मूत्र से निकल जाते हैं, जिसमें B12 स्थायी अपवाद है
- विटामिन D का दो बार हाइड्रॉक्सिलीकरण होता है : यकृत में 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D तक, फिर वृक्क में सक्रिय 1,25-डाइहाइड्रॉक्सी विटामिन D तक
- चूँकि वसा-घुलनशील विटामिन उत्सर्जित होने के बजाय जमा होते हैं, इसलिए लम्बे समय की अधिकता विषाक्त होती है — हाइपरविटामिनोसिस A तथा हाइपरविटामिनोसिस D — जबकि जल-घुलनशील विटामिनों की अतिरिक्त मात्रा अधिकतर बाहर निकल जाती है
- यकृत शरीर का मुख्य ग्लाइकोजन भण्डार तथा मुख्य लोह-भण्डार भी है, जो लोहे को फ़ेरिटिन के रूप में रखता है, और पहली तिमाही के भ्रूण में वही लाल रक्त कोशिकाओं के बनने का प्रमुख स्थल होता है
- विटामिन C का शरीर-कोष छोटा होता है और अभाव के कुछ ही महीनों में स्कर्वी हो सकती है — यही वह अन्तर है जिससे C को 'भण्डारित' विटामिन कहना ढीली बात लगती है
विभेद विटामिन D करता है : वही एक झटके में (a) तथा (c) को हटा देता है। फिर चुनाव उस सबसे बड़ी सूची, जो जहाँ तक जाती है वहाँ तक सच है, और बच-निकलने वाले विकल्प के बीच रह जाता है — और 'इनमें से कोई नहीं' तभी जीतता है जब शेष हर विकल्प में कोई निश्चित असत्य हो।
- यह मान लेना कि केवल वसा-घुलनशील विटामिन ही संचित होते हैं — B12 जल-घुलनशील है और फिर भी किसी भी विटामिन से लम्बा भण्डार रखता है, और वह भी यकृत में
- विकल्प-सूची अधूरी दिखते ही 'इनमें से कोई नहीं' की ओर लपक पड़ना; कसौटी यह है कि हर विकल्प में कोई निश्चित असत्य हो, न कि यह कि कोई एक अधूरा हो
- विटामिन D के सक्रियण को यकृत में रख देना — यकृत 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D बनाता है, सक्रिय 1,25-डाइहाइड्रॉक्सी रूप वृक्क बनाता है
BPSC इसे एक पंक्ति की स्मृति-जाँच के रूप में पूछता है, पर विकल्पों को एक-दूसरे में समाई सूचियों के रूप में लपेट देता है, इसलिए अंक शरीर-क्रिया दोहराने से नहीं, अन्तर्वेशन पहचानने से मिलता है — सबसे बड़ी सच्ची सूची जीतती है। UPSC कोरी भण्डार-सूची लगभग कभी नहीं पूछता; वह परिणाम पूछता है, किसी विटामिन को उसके अभाव-रोग के साथ जोड़कर या यह पूछकर कि यकृत कौन-सा पदार्थ बनाता है — इसलिए वही सामग्री सूची के बजाय कार्य तथा प्रभाव के रूप में थामनी पड़ती है।
निम्नलिखित में से किसका उत्पादन यकृत का कार्य है ?
- (a) लाइपेज
- (b) यूरिया
- (c) श्लेष्मा
- (d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
उत्तर(b) यूरिया
वही अंग, पर भण्डारण की जगह उत्पादन की ओर से पूछा गया — पूरा यूरिया चक्र केवल यकृत ही चलाता है। जिस अभ्यर्थी के मन में यकृत के कामों की सूची है, वह ज्ञान के एक ही खण्ड से दोनों प्रश्न निपटा देता है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : विटामिन अभाव-रोग 1. विटामिन C : स्कर्वी 2. विटामिन D : रिकेट्स 3. विटामिन E : रतौंधी ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं ?
- (a) केवल 1 तथा 2
- (b) केवल 3
- (c) 1, 2 तथा 3
- (d) कोई नहीं
उत्तर(a) केवल 1 तथा 2
उसी सामग्री का दूसरा आधा — विटामिनों को अलग-अलग इतना जान लेना कि कौन कौन है यह बताया जा सके। रतौंधी विटामिन A की है, E की नहीं, और जो अभ्यर्थी वसा-घुलनशील चारों को अलग कर सकता है, वह यह भी जानता है कि इनमें से किन्हें यकृत थामे रहता है।
आहार नाल का कौन-सा भाग यकृत से पित्त प्राप्त करता है ?
- (a) ओसिफेगस
- (b) पेट
- (c) बड़ी आंत्र
- (d) छोटी आंत्र
उत्तर(d) छोटी आंत्र
दिसम्बर 2024 में हुई 70वीं CCE का पत्र — यह इस पुनर्परीक्षा से अलग पत्र है — उसी अंग पर प्रश्न रखता है, और दोनों तथ्य आपस में जुड़ जाते हैं : यकृत में बना पित्त छोटी आँत तक पहुँचता है, और पित्त ही वसा-घुलनशील विटामिन A, D, E तथा K के अवशोषण को सम्भव बनाता है — वही विटामिन जिन्हें यह प्रश्न आगे चलकर यकृत से भण्डारित कराता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
मानव यकृत में कौन-सा विटामिन इतने बड़े भण्डार के रूप में रहता है कि वह तीन से पाँच वर्ष चल जाए ?
- (a)विटामिन C
- (b)विटामिन B12
- (c)विटामिन B1
- (d)विटामिन K
उत्तर(b) विटामिन B12 — जल-घुलनशील होते हुए भी यकृत में तीन से पाँच वर्ष तक संचित, इसीलिए आहार में इसकी कमी को घातक रक्ताल्पता के रूप में प्रकट होने में वर्षों लगते हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
यकृत विटामिन D को 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D में बदलता है। जैविक रूप से सक्रिय रूप में उसका रूपान्तरण मुख्यतः कहाँ होता है ?
- (a)त्वचा
- (b)वृक्क
- (c)छोटी आँत
- (d)अग्न्याशय
उत्तर(b) वृक्क — दूसरा हाइड्रॉक्सिलीकरण, यानी 1,25-डाइहाइड्रॉक्सी विटामिन D तक, वृक्क में होता है; त्वचा केवल धूप से पूर्ववर्ती कोलेकैल्सिफ़ेरॉल बनाती है।