निम्नलिखित में से कौन सा अलाउद्दीन खिलजी के 'बाजार नियंत्रण' (जवाबित) नियमों का प्राथमिक उद्देश्य था?
- (a)पड़ोसी क्षेत्रों के साथ अप्रतिबंधित व्यापार को प्रोत्साहित करके राजकोषीय राजस्व का विस्तार करना।
- (b)धार्मिक कराधान के स्थान पर पूरे बाजारों में वाणिज्यिक लेवी (commercial levies) की एक समान प्रणाली लागू करना।
- (c)आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को कम रखना ताकि सैनिकों का रखरखाव निश्चित वेतन पर किया जा सके।
- (d)विदेशी साम्राज्यों को भारतीय कपड़ा निर्यात को प्रोत्साहित करके विदेशी व्यापार को बढ़ावा देना।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C. इन सुधारों के मुख्य स्रोत इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी हैं। उनके अनुसार मंगोल ख़तरे ने अलाउद्दीन को बहुत बड़ी सेना खड़ी करने पर मजबूर किया। ऐसी सेना ख़ज़ाना खाली कर देती, जब तक सैनिक कम, निश्चित वेतन पर गुज़ारा न कर सकें।
इसलिए राज्य ने दिल्ली में कीमतें तय कीं, अनाज अपने सरकारी भंडारों में रखा और ज़्यादा दाम लेने वाले व्यापारियों को सज़ा दी। आवश्यक वस्तुओं की कम कीमतों ने कम वेतन को संभव बनाया → विकल्प (c)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)पड़ोसी क्षेत्रों के साथ अप्रतिबंधित व्यापार को प्रोत्साहित करके राजकोषीय राजस्व का विस्तार करना। — सुधारों ने अप्रतिबंधित व्यापार का उल्टा किया। व्यापारियों का पंजीकरण हुआ, कीमतें राज्य ने तय कीं, और बाज़ार अधीक्षक तय दर से ऊपर बेचने वाले हर व्यक्ति को सज़ा देते थे।
- (b)धार्मिक कराधान के स्थान पर पूरे बाजारों में वाणिज्यिक लेवी (commercial levies) की एक समान प्रणाली लागू करना। — ये नियम मूल्य-नियंत्रण थे, कर-सुधार नहीं। इन्होंने दिल्ली के बाज़ारों में वस्तुओं के दाम तय किए, धार्मिक करों की जगह वाणिज्यिक कर नहीं लाए।
- (d)विदेशी साम्राज्यों को भारतीय कपड़ा निर्यात को प्रोत्साहित करके विदेशी व्यापार को बढ़ावा देना। — नियमों का निशाना दिल्ली में आपूर्ति और कीमतें थीं, जहाँ सेना तैनात थी। दिल्ली के व्यापारियों को माल सरकारी बाज़ार में लाकर तय दरों पर बेचना होता था, विदेश भेजना नहीं।
अवधारणा
अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 से 1316 तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। उसके शासन में मंगोल हमलों का भारी दबाव रहा, जिनमें 1303 में दिल्ली पर हुआ आक्रमण भी शामिल है, और उसने इसका जवाब एक बड़ी स्थायी सेना से दिया।
बाज़ार नियंत्रण उसी सेना के पीछे का अर्थशास्त्र था। दोआब की शाही ज़मीन (crown lands) से अनाज वस्तु के रूप में वसूला जाता और सरकारी भंडारों में रखा जाता था।
अनाज, कपड़ा, घोड़े, दास और मवेशी सरकारी दामों पर बिकते थे, और बाज़ार अधीक्षक व गुप्तचर इन पर नज़र रखते थे।
बरनी अकेले समकालीन लेखक नहीं हैं। दरबारी कवि अमीर ख़ुसरो इन नियंत्रणों का श्रेय अलाउद्दीन की जन-कल्याण की चिंता को देते हैं। कुंजी वाला विकल्प बरनी के मत पर चलता है, जो इन सुधारों के मुख्य स्रोत हैं।
मुख्य तथ्य
- अलाउद्दीन खिलजी के बाज़ार नियंत्रण के मुख्य स्रोत ज़ियाउद्दीन बरनी हैं।
- बरनी के अनुसार कम कीमतों का मकसद यह था कि बहुत बड़ी सेना कम वेतन स्वीकार कर सके।
- दोआब की शाही ज़मीन (ख़ालिसा) से अनाज वस्तु के रूप में वसूला जाता और सरकारी भंडारों में रखा जाता था।
- अलाउद्दीन की मृत्यु के कुछ ही समय बाद उसके बेटे क़ुतुबुद्दीन मुबारक शाह ने मूल्य-नियंत्रण हटा दिए।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सुधार आर्थिक थे, इसलिए राजस्व या व्यापार वाला विकल्प चुन लेना। इनका मकसद सैनिक था: ऐसी सेना जिसका ख़र्च उठाया जा सके।
- यह मान लेना कि सिर्फ़ अनाज पर नियंत्रण था। कपड़े, घोड़ों, दासों और मवेशियों के दाम भी तय थे।
9 Sep 2024, 12:30, GA Q.2 पूछता है कि अलाउद्दीन खिलजी के 1307–08 के पहले दक्षिण अभियान का निशाना कौन-सा था (देवगिरि), और 23 Sep 2024, 12:30, GA Q.25 विस्तार बनाम सुदृढ़ीकरण के मुद्दे पर उसकी तुलना बलबन से करता है।
19 Jan 2026, 11:00 AM, GA Q.23 नवरोज़ को बलबन से जोड़ता है।
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