भारत में मंदिर वास्तुकला के विकास से कौन सी ऐतिहासिक प्रक्रिया सबसे अच्छी तरह झलकती है?
- (a)देशी कला का ह्रास
- (b)धर्म और क्षेत्रीय शैलियों की निरंतर अंतःक्रिया
- (c)आकस्मिक सांस्कृतिक परिवर्तन
- (d)विदेशी वास्तुकला का प्रभुत्व
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B. NCERT की कक्षा 11 की पुस्तक भारतीय कला का परिचय (An Introduction to Indian Art) मंदिर का विकास साँची और उदयगिरि के गुप्तकालीन साधारण देवालयों से लेकर दसवीं शताब्दी में बने खजुराहो के चंदेल मंदिरों तक दिखाती है।
वह दो व्यापक क्षेत्रीय शैलियों का भी वर्णन करती है: उत्तर में नागर और दक्षिण में द्रविड़।
यह धर्म और क्षेत्र, दोनों से मिलकर धीरे-धीरे आया बदलाव है, यानी विकल्प (b)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)देशी कला का ह्रास — मंदिर निर्माण और भव्य हुआ, कमज़ोर नहीं। NCERT एलोरा के कैलाशनाथ मंदिर को शैलकृत (rock-cut) वास्तुकला की कम से कम एक हज़ार वर्ष लंबी परंपरा का चरम कहती है।
- (c)आकस्मिक सांस्कृतिक परिवर्तन — बदलाव धीरे-धीरे आया, आकस्मिक नहीं। NCERT के अनुसार मंदिर उभरी हुई दीवारें और आले जोड़कर अधिक जटिल होते गए, देवालय की मूल योजना को छोड़े बिना।
- (d)विदेशी वास्तुकला का प्रभुत्व — बाहरी प्रभाव आत्मसात हुआ, वह हावी नहीं हुआ। NCERT के अनुसार पाँचवीं शताब्दी ईस्वी तक कश्मीर पर गांधार का गहरा प्रभाव आ चुका था, जो फिर सारनाथ, मथुरा और दूसरी जगहों से आई गुप्त और गुप्तोत्तर परंपराओं से मिल गया।
अवधारणा
हिंदू मंदिर की एक मूल योजना बनी रही: मुख्य प्रतिमा वाला गर्भगृह, उपासकों के लिए मंडप, और गर्भगृह के ऊपर शिखर।
इसी योजना पर क्षेत्रीय शैलियाँ बनीं: उत्तर की नागर शैली का वक्र शिखर, दक्षिण की द्रविड़ शैली का पिरामिडनुमा विमान, और दक्कन में एक मिश्रित शैली, जिसे कुछ प्राचीन ग्रंथ वेसर कहते हैं।
स्थानीय परंपराएँ नई परतें जोड़ती रहीं। असम में ताई प्रवासियों द्वारा लाई गई शैली बंगाल की पाल शैली से मिलकर अहोम शैली बनी।
प्रश्न व्याख्या वाला है, इसलिए उत्तर किसी एक तथ्य पर नहीं, बल्कि इस पर टिका है कि NCERT का अध्याय क्या दर्ज करता है।
हर गलत विकल्प अध्याय में दर्ज किसी बात से टकराता है: विकास, धीरे-धीरे बदलाव, और आत्मसात किए गए प्रभाव।
मुख्य तथ्य
- NCERT मंदिरों की दो व्यापक शैलियाँ बताती है: उत्तर में नागर और दक्षिण में द्रविड़।
- कुछ विद्वान वेसर को नागर और द्रविड़ शैलियों के चुनिंदा मेल से बनी एक अलग शैली मानते हैं।
- खजुराहो का लक्ष्मण मंदिर चंदेल राजा धंग ने 954 में बनवाया।
- देवगढ़, एरण, नचना-कुठारा और उदयगिरि के आरंभिक मंदिर साधारण ढाँचे थे: एक बरामदा, एक कक्ष और पीछे एक देवालय।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'विदेशी वास्तुकला का प्रभुत्व' चुन लेना, क्योंकि कश्मीर जैसे कुछ क्षेत्रों में गांधार प्रभाव दिखता है।
- नई क्षेत्रीय शैलियों के उदय को आकस्मिक बदलाव मान लेना, जबकि NCERT उसे सदियों में फैला हुआ दिखाती है।
यहाँ SSC यह पूछता है कि मंदिरों का इतिहास क्या दिखाता है, किसी एक मंदिर का तथ्य नहीं।
18 Sep 2025, 12:30, GA Q.2 मंदिर शैलियों को क्षेत्रों से मिलाता है (वेसर को दक्कन से), और 10 Sep 2024, 09:00, GA Q.8 पूछता है कि किस राजवंश के शासन में महाबलीपुरम मंदिर वास्तुकला का केंद्र बना (पल्लव)।
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