निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प निसार मिशन का सही वर्णन करता है?
- (a)एक्स(X)-बैंड रडार मानचित्रण के लिए केवल इसरो (ISRO)-द्वारा संचालित मिशन
- (b)अल्ट्रावायलेट खगोल विज्ञान के लिए केवल नासा (NASA)-द्वारा संचालित मिशन
- (c)बाह्यग्रहों (एक्सोप्लैनेट) का पता लगाने के लिए ऑप्टिकल इमेजिंग मिशन
- (d)संयुक्त इसरो (ISRO)–नासा (NASA) मिशन जो एल-बैंड और एस-बैंड रडार का उपयोग करता है।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D. नाम ही उत्तर बता देता है: निसार (NISAR) का पूरा नाम है NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar। इसका एल-बैंड रडार नासा ने बनाया, और एस-बैंड रडार और सैटेलाइट बस इसरो ने बनाए। प्रक्षेपण भी इसरो ने किया।
यह 30 जुलाई 2025 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से GSLV-F16 पर उड़ा। एल-बैंड और एस-बैंड रडार वाला संयुक्त मिशन → विकल्प (d)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)एक्स(X)-बैंड रडार मानचित्रण के लिए केवल इसरो (ISRO)-द्वारा संचालित मिशन — केवल इसरो का नहीं: एल-बैंड रडार नासा ने दिया। और निसार के रडार एल और एस बैंड में काम करते हैं, एक्स-बैंड में नहीं।
- (b)अल्ट्रावायलेट खगोल विज्ञान के लिए केवल नासा (NASA)-द्वारा संचालित मिशन — केवल नासा का नहीं, और यह बाहर अंतरिक्ष की ओर नहीं, नीचे पृथ्वी की ओर देखता है। निसार एक पृथ्वी-अवलोकन रडार उपग्रह है, अल्ट्रावायलेट खगोल विज्ञान की दूरबीन नहीं।
- (c)बाह्यग्रहों (एक्सोप्लैनेट) का पता लगाने के लिए ऑप्टिकल इमेजिंग मिशन — निसार ऑप्टिकल कैमरों से नहीं, रडार से चित्र लेता है, और यह पृथ्वी का अध्ययन करता है, दूसरे तारों के ग्रहों का नहीं। रडार बादलों के पार और रात में भी काम करता है।
अवधारणा
सिंथेटिक एपर्चर रडार ज़मीन की ओर माइक्रोवेव स्पंद (pulses) भेजता है और लौटती प्रतिध्वनि दर्ज करता है। यह अपना संकेत ख़ुद बनाता है, इसलिए दिन हो या रात, बादलों के पार भी पृथ्वी की तस्वीर ले सकता है।
निसार में ऐसे दो रडार हैं: नासा का एल-बैंड (24 सेमी तरंगदैर्ध्य) और इसरो का एस-बैंड (9.4 सेमी)।
दोनों मिलकर पृथ्वी की ज़मीन और बर्फ़ का मानचित्र बनाते हैं, ताकि पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ी, बर्फ़ की चादरों (ice sheets) के ढहने और भूकंप, ज्वालामुखी व भूस्खलन जैसे ख़तरों पर नज़र रखी जा सके।
हर गलत विकल्प कुंजी वाले विकल्प की दो बातों में से एक को तोड़ता है: किसने बनाया (केवल इसरो, केवल नासा) या यह कैसे देखता है (एक्स-बैंड, अल्ट्रावायलेट, ऑप्टिकल)।
मुख्य तथ्य
- NISAR का पूरा नाम NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar है।
- एल-बैंड रडार नासा ने दिया, और एस-बैंड रडार, सैटेलाइट बस और प्रक्षेपण इसरो ने।
- निसार 30 जुलाई 2025 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F16 द्वारा प्रक्षेपित हुआ।
- यह लगभग 747 किमी की ऊँचाई पर सूर्य-तुल्यकालिक (Sun-synchronous) कक्षा में है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संक्षिप्त नाम का संकेत न पकड़ना: NISAR के N और I, NASA और ISRO हैं।
- रडार बैंड को ऑप्टिकल इमेजिंग समझ लेना। L और S माइक्रोवेव बैंड हैं।
19 Jan 2026, 11:00 AM, GA Q.22 भी हाल का अंतरिक्ष विज्ञान पूछता है, जिसमें नासा के SPHEREx टेलीस्कोप और हनले, लद्दाख के MACE टेलीस्कोप की जोड़ी बनाई गई है।
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