रामचरित, एक द्व्याश्रय-काव्य का उदाहरण है, जिसमें एक साथ दो कथाएं कही गई हैं । इसके रचयिता हैं
- (a)सुबंधु
- (b)भट्टी
- (c)संध्याकर
- (d)कम्बन
उत्तर
क्यों
सही — C, संध्याकर। रामचरित, जो द्व्याश्रय-काव्य (जान-बूझकर दोहरे अर्थ के साथ रची गई कविता) का उदाहरण है, की रचना पाल काल में संध्याकर नंदी ने की थी। श्लेष अर्थात् द्वि-अर्थकता के माध्यम से यह एक साथ दो कथाएँ कहता है — राम की रामायण और पाल शासक रामपाल का वृत्तांत, जिसमें बंगाल के वरेंद्र क्षेत्र की उनकी पुनर्प्राप्ति भी सम्मिलित है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)सुबंधु — सुबंधु ने गद्य-कथा 'वासवदत्ता' लिखी, जो अपनी विस्तृत श्लेष-शैली के लिए प्रसिद्ध है, किंतु उन्होंने रामचरित की रचना नहीं की।
- (b)भट्टी — भट्टी ने 'भट्टिकाव्य' लिखा, जो स्वयं एक द्वि-प्रयोजन काव्य है और रामायण की कथा कहते हुए संस्कृत व्याकरण का उदाहरण भी देता है — यह आकर्षक निकट-मेल है, पर वह वह कृति नहीं है जो पाल शासक रामपाल का वर्णन करती है।
- (d)कम्बन — कम्बन 'रामावतारम्' (कम्ब रामायणम्) के तमिल कवि थे — भिन्न भाषा और बिलकुल भिन्न कृति।
अवधारणा
द्व्याश्रय अथवा श्लेष काव्य दोहरे अर्थ वाले शब्दों के प्रयोग से दो कथाएँ समांतर चलाता है। ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी में पाल-शासित बंगाल में रचित संध्याकर नंदी का रामचरित एक साथ राम की और पाल शासक रामपाल की कथा कहता है — यह महाकाव्य और वंश-इतिहास का दुर्लभ मेल है।
भट्टी स्वाभाविक भ्रामक विकल्प हैं, क्योंकि भट्टिकाव्य भी राम पर रचा गया द्वि-प्रयोजन काव्य है। किंतु वह विशिष्ट ग्रंथ जो पाल शासक रामपाल का वर्णन करता है, संध्याकर नंदी का रामचरित है, और इसी कारण वह पाल बंगाल के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत बन जाता है।
मुख्य तथ्य
- रामचरित की रचना संध्याकर नंदी ने की, जो पाल शासक मदनपाल के दरबारी कवि थे।
- यह एक द्व्याश्रय (श्लेष) काव्य है, जो एक साथ रामायण और रामपाल के शासन का वर्णन करता है।
- इसमें वरेंद्र विद्रोह और रामपाल द्वारा पाल मातृभूमि की पुनर्प्राप्ति अंकित है, अतः यह वंश-इतिहास का भी काम करता है।
- इसकी पांडुलिपि हरप्रसाद शास्त्री ने नेपाल में पुनः खोजी और वह 1910 में प्रकाशित हुई।
संध्याकर नंदी का श्लेष राम के महाकाव्य और रामपाल के शासन को एक ही श्लोक-समूह में बुन देता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- भट्टी को इसलिए चुन लेना कि भट्टिकाव्य भी राम पर रचा दोहरे अर्थ वाला काव्य है।
- संस्कृत रामचरित को तमिल कम्ब रामायणम् या तुलसीदास के रामचरितमानस के साथ भ्रमित कर लेना।
यह 'रामचरित/द्व्याश्रय-काव्य किसने लिखा' के रूप में, या संस्कृत कृतियों को उनके रचयिताओं से सुमेलित कराकर पूछा जाता है।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? I. मृच्छकटिकम् — शूद्रक II. बुद्धचरित — वसुबंधु III. मुद्राराक्षस — विशाखदत्त IV. हर्षचरित — बाणभट्ट। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) I, II, III और IV
- (b) I, III और IV
- (c) I और IV
- (d) II और III
उत्तर(b) I, III और IV
संस्कृत कृतियों को उनके रचयिताओं से सुमेलित करने की वही अवधारणा। वहाँ मुद्राराक्षस और हर्षचरित जैसी कृतियों को उनके लेखकों से जोड़ना है; यहाँ रामचरित के रचयिता के रूप में संध्याकर नंदी को पहचानना है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संध्याकर नंदी का रामचरित किस वंश के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है?
- (a)पाल
- (b)चोल
- (c)राष्ट्रकूट
- (d)चालुक्य
उत्तर(a) पाल — यह राम की कथा के साथ-साथ पाल शासक रामपाल के शासन का वर्णन करता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वह काव्य जो दोहरे अर्थ वाले शब्दों के माध्यम से एक साथ दो कथाएँ कहता है, कहलाता है
- (a)द्व्याश्रय (श्लेष) काव्य
- (b)चम्पू काव्य
- (c)गद्य काव्य
- (d)खंड काव्य
उत्तर(a) द्व्याश्रय (श्लेष) काव्य — जान-बूझकर रचे गए दोहरे अर्थ पर आधारित कविता।