किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान को, उसके तापमान में परिवर्तन किए बिना द्रव से वाष्प में बदलने के लिए अपेक्षित ऊष्मा की मात्रा को क्या कहा जाता है ?
- (a)विशिष्ट ऊष्मा
- (b)विशिष्ट गुप्त ऊष्मा
- (c)तापीय धारिता
- (d)ऊष्मा ऊर्जा
उत्तर
क्यों
सही — B, विशिष्ट गुप्त ऊष्मा। अचर तापमान पर किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदलने के लिए अपेक्षित ऊष्मा ही उसकी विशिष्ट गुप्त ऊष्मा है (यहाँ द्रव से वाष्प के लिए वाष्पन की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा)। यह ऊर्जा अंतराअणुक बंधों को तोड़ने और दाब के विरुद्ध कार्य करने में लगती है, तापमान बढ़ाने में नहीं — इसीलिए अवस्था-परिवर्तन के दौरान तापमापी का पाठ्यांक अचर बना रहता है (Q = m × L)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)विशिष्ट ऊष्मा — विशिष्ट ऊष्मा वह ऊष्मा है जो एकांक द्रव्यमान का तापमान 1 डिग्री बढ़ाने के लिए चाहिए (Q = m × c × ΔT)। यह तब लागू होती है जब तापमान बदल रहा हो, अचर तापमान वाले अवस्था-परिवर्तन के दौरान नहीं।
- (c)तापीय धारिता — तापीय (ऊष्मा) धारिता वह ऊष्मा है जो पूरे पिंड का तापमान 1 डिग्री बढ़ाने के लिए चाहिए (Q = m × c, मात्रक J/K) — यह भी तापमान-परिवर्तन की राशि है, और प्रति एकांक द्रव्यमान के बजाय प्रति पिंड परिभाषित होती है।
- (d)ऊष्मा ऊर्जा — 'ऊष्मा ऊर्जा' केवल स्थानांतरित होती तापीय ऊर्जा का सामान्य नाम है; यह यहाँ परिभाषित की जा रही प्रति-एकांक-द्रव्यमान, अचर-तापमान वाली अवस्था-परिवर्तन राशि को विशेष रूप से नामित नहीं करती।
अवधारणा
अवस्था-परिवर्तन (गलन या क्वथन) के दौरान ऊष्मा दिए जाने पर भी तापमान अचर बना रहता है। इस अचर-तापमान परिवर्तन के दौरान प्रति एकांक द्रव्यमान अवशोषित ऊष्मा ही विशिष्ट गुप्त ऊष्मा L है, अतः Q = m × L। द्रव से वाष्प के लिए यह वाष्पन की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा है; ठोस से द्रव के लिए गलन की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा। यह विशिष्ट ऊष्मा धारिता c से भिन्न है, जो ऊष्मा को तापमान-परिवर्तन से जोड़ती है (Q = m × c × ΔT)।
निर्णायक वाक्यांश है 'तापमान में परिवर्तन किए बिना'। तापमान-परिवर्तन से जुड़ी हर राशि — विशिष्ट ऊष्मा, तापीय धारिता — बाहर हो जाती है, और 'ऊष्मा ऊर्जा' बहुत अस्पष्ट है। अचर तापमान पर अवस्था-परिवर्तन कराने वाली प्रति एकांक द्रव्यमान ऊष्मा परिभाषा से ही विशिष्ट गुप्त ऊष्मा है।
मुख्य तथ्य
- विशिष्ट गुप्त ऊष्मा L अचर तापमान पर अवस्था बदलने हेतु प्रति एकांक द्रव्यमान ऊष्मा है; Q = m × L (मात्रक J/kg)।
- जल के वाष्पन की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा लगभग 2260 kJ/kg है; बर्फ के गलन की लगभग 334 kJ/kg।
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता c ऊष्मा को तापमान-परिवर्तन से जोड़ती है: Q = m × c × ΔT (मात्रक J प्रति kg प्रति K)।
- गलन या क्वथन के दौरान गुप्त ऊष्मा अवशोषित होती रहती है, फिर भी तापमान अचर रहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विशिष्ट गुप्त ऊष्मा (अचर-तापमान अवस्था-परिवर्तन) को विशिष्ट ऊष्मा धारिता (तापमान-परिवर्तन) के साथ भ्रमित कर लेना।
- तापीय धारिता (पूरे पिंड के लिए, मात्रक J/K) को प्रति-एकांक-द्रव्यमान वाली राशियों से गड्डमड्ड कर देना।
तापीय अवधारणाएँ 'अचर तापमान पर अवस्था बदलने की ऊष्मा = ?' के रूप में पूछी जाती हैं — 'तापमान में परिवर्तन किए बिना' वाक्यांश गुप्त ऊष्मा की ओर संकेत करता है।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 100 C पर भाप और 100 C पर उबलते जल में ऊष्मा की मात्रा समान होती है। 2. बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा के बराबर होती है। 3. वातानुकूलक में कमरे की वायु से ऊष्मा वाष्पित्र कुंडलियों पर खींची जाती है और संघनित्र कुंडलियों पर बाहर छोड़ी जाती है। इनमें से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
- (a) 1 और 2
- (b) 2 और 3
- (c) केवल 2
- (d) केवल 3
उत्तर(d) केवल 3
वही अवधारणा — गुप्त ऊष्मा। वहाँ कथन 1 असत्य है क्योंकि 100 C की भाप उबलते जल की तुलना में वाष्पन की अतिरिक्त गुप्त ऊष्मा साथ रखती है, और कथन 2 असत्य है क्योंकि गलन की गुप्त ऊष्मा (लगभग 334 kJ/kg) वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (लगभग 2260 kJ/kg) के बराबर नहीं है। यह और NDA का यह प्रश्न, दोनों इसी जानकारी पर टिके हैं कि अवस्था-परिवर्तन अचर तापमान पर गुप्त ऊष्मा अवशोषित करता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
100 डिग्री C पर जल के क्वथन के दौरान दी गई ऊष्मा मुख्यतः किसमें प्रयुक्त होती है?
- (a)तापमान बढ़ाने में
- (b)अंतराअणुक बंध तोड़ने और अवस्था बदलने में
- (c)विशिष्ट ऊष्मा बढ़ाने में
- (d)दाब घटाने में
उत्तर(b) अंतराअणुक बंध तोड़ने और अवस्था बदलने में — यही वाष्पन की गुप्त ऊष्मा है, जो अचर तापमान पर अवशोषित होती है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
विशिष्ट गुप्त ऊष्मा का SI मात्रक है
- (a)J प्रति kg प्रति K
- (b)J/kg
- (c)J/K
- (d)J
उत्तर(b) J/kg — प्रति एकांक द्रव्यमान ऊष्मा (Q = m × L)।