वर्ष 2024-25 में यथास्थिति के अनुसार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत कितने ग्रामीण जिलों को शामिल किया गया है ?
- (a)600
- (b)740
- (c)700
- (d)680
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, 740। मनरेगा एक सार्वभौमिक ग्रामीण योजना है : 1 अप्रैल 2008 से यह देश के प्रत्येक ग्रामीण जिले तक विस्तारित है। जैसे-जैसे पुनर्गठन से जिलों की संख्या बढ़ी, 2024-25 तक इसका कवरेज लगभग 740 ग्रामीण जिलों तक पहुँच गया — जो विकल्पों में सबसे पूर्ण आँकड़ा है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)600 — यह कम गिनती है। मनरेगा का ग्रामीण कवरेज 600 जिलों से कहीं आगे जाता है, क्योंकि वह भारत के सभी ग्रामीण जिलों पर लागू है।
- (c)700 — यह निकट अवश्य है, किंतु 2024-25 तक कवर किए गए लगभग 740 ग्रामीण जिलों से फिर भी कम है।
- (d)680 — यह कम गिनती है — योजना का ग्रामीण कवरेज 680 जिलों से अधिक है।
अवधारणा
मनरेगा (2005) प्रत्येक ऐसे ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से आगे आएँ, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन का अकुशल शारीरिक मजदूरी-रोजगार सुनिश्चित करता है। इसे चरणों में लागू किया गया — फरवरी 2006 में 200 जिले, 2007 में 130 और, तथा 1 अप्रैल 2008 से शेष सभी ग्रामीण जिले — इसलिए अब यह भारत के सभी ग्रामीण जिलों को कवर करता है, जो 2024-25 के अनुसार लगभग 740 हैं।
चूँकि यह योजना ग्रामीण भारत के लिए सार्वभौमिक है, प्रश्न वस्तुतः यह पूछता है कि ग्रामीण जिले लगभग कितने हैं। उत्तर लगभग-पूर्ण आँकड़ा है, कोई आंशिक गिनती नहीं। सही संख्याएँ वर्षों में बदलती रहती हैं क्योंकि राज्य नए जिले बनाते हैं।
मुख्य तथ्य
- मनरेगा माँग पर प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन तक का मजदूरी-रोजगार सुनिश्चित करता है।
- 1 अप्रैल 2008 से यह भारत के सभी ग्रामीण जिलों के लिए सार्वभौमिक हो गया।
- 2024-25 के अनुसार इसका कवरेज लगभग 740 ग्रामीण जिलों तक था।
- लाभार्थियों में कम से कम एक-तिहाई महिलाएँ होनी चाहिए, और मजदूरी बैंक या डाकघर खातों में दी जाती है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मनरेगा सभी ग्रामीण परिवारों के लिए सार्वभौमिक है — यह केवल गरीबी रेखा से नीचे या अनुसूचित जाति/जनजाति परिवारों तक सीमित नहीं है।
- नए जिले बनने के साथ जिलों की सही संख्या बदलती रहती है, इसलिए ऐसे आँकड़ों को अनुमानित मानिए।
मनरेगा पर उसके कवरेज, पात्रता (कोई भी ग्रामीण परिवार) और 100 दिन की गारंटी को लेकर प्रश्न पूछे जाते हैं।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित में से कौन ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ से लाभ पाने के पात्र हैं ?
- (a) केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों के वयस्क सदस्य
- (b) गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों के वयस्क सदस्य
- (c) सभी पिछड़े समुदायों के परिवारों के वयस्क सदस्य
- (d) किसी भी परिवार के वयस्क सदस्य
उत्तर(d) किसी भी परिवार के वयस्क सदस्य
वही योजना, वही सार्वभौमिकता — यूपीएससी ने स्थापित किया कि मनरेगा का लाभ किसी भी ग्रामीण परिवार को मिलता है (केवल बीपीएल/अजा-अजजा को नहीं)। सार्वभौमिक कवरेज का यही सिद्धांत यहाँ एनडीए के उत्तर को ग्रामीण जिलों की लगभग-पूर्ण गिनती (740) बनाता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत प्रत्येक ऐसे परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से अकुशल शारीरिक कार्य करने को तैयार हों, वर्ष में 100 दिन का रोजगार एक मौलिक अधिकार बन गया है। 2. अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत महिलाओं को इस सीमा तक प्राथमिकता दी जानी है कि रोजगार पाने वालों में आधी संख्या उन महिलाओं की हो जिन्होंने काम माँगा है।
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1, न ही 2
उत्तर(d) न तो 1, न ही 2
वही अधिनियम, उसकी बारीकियों की जाँच — 100 दिन की गारंटी एक विधिक हक है (मौलिक अधिकार नहीं) और महिलाओं का हिस्सा एक-तिहाई है (आधा नहीं)। एनडीए प्रश्न में पूछे गए कवरेज आँकड़े के साथ यह उपयोगी पूरक विवरण है।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
मनरेगा के अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम कितने दिनों का गारंटीशुदा मजदूरी-रोजगार दिया जाता है ?
- (a)50
- (b)100
- (c)150
- (d)200
उत्तर(b) 100 — अधिनियम प्रति परिवार प्रति वर्ष कम से कम 100 दिन का अकुशल शारीरिक मजदूरी-कार्य सुनिश्चित करता है। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
मनरेगा निम्नलिखित में से किसे रोजगार की गारंटी देता है ?
- (a)केवल गरीबी रेखा से नीचे के ग्रामीण परिवारों को
- (b)केवल अनुसूचित जाति/जनजाति परिवारों को
- (c)किसी भी ऐसे ग्रामीण परिवार को जिसके वयस्क अकुशल शारीरिक कार्य के लिए स्वेच्छा से आगे आएँ
- (d)केवल शहरी गरीबों को
उत्तर(c) किसी भी ऐसे ग्रामीण परिवार को जिसके वयस्क अकुशल शारीरिक कार्य के लिए स्वेच्छा से आगे आएँ — ग्रामीण क्षेत्रों में यह हक सार्वभौमिक है।