पुस्तक ‘The Origin of Species by Means of Natural Selection’ का लेखक कौन है ?
- (a)चार्ल्स डार्विन
- (b)कैरोलस लीनियस
- (c)बारबारा मैकक्लिंटॉक
- (d)कॉपरनिकस
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, चार्ल्स डार्विन। अंग्रेज़ प्रकृतिविद् चार्ल्स डार्विन ने 1859 में ‘On the Origin of Species by Means of Natural Selection’ प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने यह सिद्धांत रखा कि जातियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी बदलती हैं क्योंकि जिन व्यष्टियों में अनुकूल वंशागत लक्षण होते हैं वे अधिक सफलता से जीवित रहते और प्रजनन करते हैं — यही प्राकृतिक वरण है। शीर्षक में आया वाक्यांश ‘by Means of Natural Selection’ स्वयं डार्विन की स्थापना है, इसीलिए दी गई सूची में लेखक वही हैं, कोई और नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)कैरोलस लीनियस — लीनियस अठारहवीं शताब्दी के स्वीडिश वनस्पतिविज्ञानी थे, जिन्होंने ‘Systema Naturae’ में नामकरण की द्विपद प्रणाली (वंश और जाति) तथा आधुनिक वर्गिकी बनाई। उन्होंने जीवन का वर्गीकरण किया, किंतु प्राकृतिक वरण द्वारा विकास का प्रस्ताव नहीं रखा।
- (c)बारबारा मैकक्लिंटॉक — मैकक्लिंटॉक बीसवीं शताब्दी की अमेरिकी आनुवंशिकीविद् थीं, जिन्होंने मक्का में ‘कूदते जीन’ (ट्रांसपोसॉन) की खोज की और 1983 में नोबेल पुरस्कार पाया। उनका कार्य आनुवंशिकी में है, 1859 के विकास-ग्रंथ के लेखन में नहीं।
- (d)कॉपरनिकस — कॉपरनिकस पुनर्जागरण काल के खगोलविद् थे, जिनकी ‘On the Revolutions of the Heavenly Spheres’ ने सूर्य को सौर मंडल के केंद्र में रखा। वे खगोल विज्ञान से हैं, जीव विज्ञान से नहीं।
अवधारणा
प्राकृतिक वरण वह क्रियाविधि है जिसे चार्ल्स डार्विन ने विकास के लिए प्रस्तावित किया : किसी समष्टि के भीतर व्यष्टियों में वंशागत लक्षण भिन्न होते हैं; जिनके लक्षण पर्यावरण के अनुकूल होते हैं वे जीवित रहकर अधिक संतति छोड़ते हैं, इसलिए अनेक पीढ़ियों में समष्टि के अभिलक्षण खिसक जाते हैं। डार्विन ने यह ‘On the Origin of Species’ (1859) में रखा, जो अब तक लिखी गई सर्वाधिक प्रभावशाली विज्ञान पुस्तकों में से एक है।
जाल यह है कि चारों नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के हैं, इसलिए जिस अभ्यर्थी को पुस्तक आधी-अधूरी याद है वह उसी नाम की ओर हाथ बढ़ा सकता है जिसे वह ‘प्रकृति’ या ‘जाति’ से ढीले-ढाले जोड़ता है। सुरक्षित लंगर स्वयं शीर्षक है : ‘by Means of Natural Selection’ डार्विन का हस्ताक्षर-विचार है, और लीनियस (वर्गीकरण), मैकक्लिंटॉक (आनुवंशिकी) तथा कॉपरनिकस (खगोल विज्ञान) — तीनों ने कुछ और ही किया।
मुख्य तथ्य
- चार्ल्स डार्विन ने 1859 में ‘On the Origin of Species by Means of Natural Selection’ प्रकाशित की।
- प्राकृतिक वरण उन व्यष्टियों का पक्ष लेता है जिनके वंशागत लक्षण अपने पर्यावरण के लिए अधिक उपयुक्त हों।
- कैरोलस लीनियस ने जीव विज्ञान को द्विपद नामकरण प्रणाली और आधुनिक वर्गिकी दी।
- बारबारा मैकक्लिंटॉक ने स्थानांतरणशील आनुवंशिक तत्वों की खोज की; कॉपरनिकस ने सूर्य-केंद्रित सौर मंडल का प्रस्ताव रखा।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विकास-ग्रंथ के लेखक (डार्विन) को लीनियस से न मिलाएँ, जिन्होंने जातियों का नामकरण और वर्गीकरण तो किया किंतु यह नहीं बताया कि वे बदलती कैसे हैं।
- कॉपरनिकस और गैलीलियो खगोल विज्ञान से हैं — जब कोई प्रश्न भिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों को मिला देता है तो यह आम भ्रामक विकल्प होता है।
किसी युगांतरकारी विज्ञान पुस्तक के लेखक का नाम पूछा जाता है, अथवा किसी वैज्ञानिक को उस सिद्धांत या खोज से सुमेलित करने को कहा जाता है जिसके लिए वे जाने जाते हैं।
संबंधित PYQ
जीवित जीवों में नई जाति की उत्पत्ति के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक सर्वाधिक उत्तरदायी है ?
- (a) पृथक्करण (आइसोलेशन)
- (b) उत्परिवर्तन
- (c) प्राकृतिक वरण
- (d) लैंगिक जनन
उत्तर(a) पृथक्करण — जननिक या भौगोलिक पृथक्करण जीन प्रवाह रोक देता है, जिससे संचित अंतर (उत्परिवर्तन, अपवाह और वरण से) बढ़कर नई जाति बना सकते हैं।
यह उसी डार्विनीय तंत्र पर टिका है — जातियों की उत्पत्ति और प्राकृतिक वरण — जिसे प्रस्तुत करने के लिए Q131 की पुस्तक प्रसिद्ध है।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
प्राकृतिक वरण द्वारा विकास का सिद्धांत निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक से संबद्ध है ?
- (a)ग्रेगर मेंडल
- (b)चार्ल्स डार्विन
- (c)लुई पाश्चर
- (d)अलेक्जेंडर फ्लेमिंग
उत्तर(b) चार्ल्स डार्विन — उन्होंने ‘On the Origin of Species’ (1859) में प्राकृतिक वरण को विकास की क्रियाविधि के रूप में प्रस्तावित किया। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
जीवों के नामकरण की द्विपद प्रणाली किसने आरंभ की ?
- (a)चार्ल्स डार्विन
- (b)कैरोलस लीनियस
- (c)रॉबर्ट हुक
- (d)अरस्तू
उत्तर(b) कैरोलस लीनियस — उन्होंने अठारहवीं शताब्दी में प्रत्येक जाति को दो-भाग वाला लैटिन नाम (वंश + जाति) दिया।