समुद्री तरंगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. तरंगों की ऊंचाई का निर्धारण पवन की गति, पवन की अवधि, और तरंग-परिसर (fetch) से होता है; 2. किसी तरंग की ऊर्जा इसकी ऊंचाई के वर्ग के समानुपाती होती है; 3. गहरे महासागर में गमन करते समय तरंगें अपनी अधिकांश ऊर्जा को बनाए रखती हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 1 और 2
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, 1, 2 और 3। तीनों कथन सत्य हैं। कथन 1 : किसी तरंग की ऊंचाई इस बात से तय होती है कि पवन कितनी तेज़ चलती है (पवन की गति), कितनी देर चलती है (अवधि) और तरंग-परिसर (fetch) कितना है — अर्थात् खुले जल का वह अबाध विस्तार जिस पर पवन क्रिया करती है। कथन 2 : तरंग की ऊर्जा उसकी ऊंचाई के वर्ग के समानुपाती होती है, इसलिए ऊंचाई दुगुनी होने पर ऊर्जा चौगुनी हो जाती है। कथन 3 : खुले, गहरे महासागर में जल-कण लगभग बंद वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं और घर्षण में बहुत कम ऊर्जा नष्ट होती है, इसलिए तरंग तट के निकट उथले जल तक पहुँचने तक अपनी अधिकांश ऊर्जा बनाए रखती है। अतः तीनों सही हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह केवल पवन-गति/अवधि/तरंग-परिसर वाले नियम को स्वीकार करता है और ऊर्जा-संबंध तथा गहरे महासागर में ऊर्जा के बने रहने — दोनों को गलत ढंग से अस्वीकार कर देता है, जबकि वे भी सही हैं।
- (b)केवल 1 और 2 — यह कथन 1 और 2 को तो सही लेता है, किंतु कथन 3 को गलत ढंग से छोड़ देता है — तरंगें वास्तव में गहरे महासागर में अपनी अधिकांश ऊर्जा बनाए रखती हैं।
- (c)केवल 2 और 3 — यह कथन 1 को छोड़ देता है, जबकि तरंग की ऊंचाई वास्तव में पवन की गति, पवन की अवधि और तरंग-परिसर से ही नियंत्रित होती है, इसलिए उसे छोड़ना गलत है।
अवधारणा
समुद्री तरंग ऊर्जा का परिवहन करती है, जल का नहीं : तरंग के गुजरने पर जल-कण छोटी, लगभग वृत्ताकार कक्षाएँ खींचते हैं और मोटे तौर पर अपने आरंभिक स्थान पर लौट आते हैं, अतः आगे बढ़ने वाली वस्तु ऊर्जा है। पवन-जनित तरंगों का आकार तीन निवेशों से बढ़ता है — पवन की गति, पवन के चलने की अवधि, और तरंग-परिसर (खुले जल की वह दूरी जिस पर पवन चलती है)। चूँकि गहरे जल में घर्षण से हानि नगण्य है, महासागरीय स्वेल हजारों किलोमीटर चलकर भी अपनी अधिकांश ऊर्जा के साथ पहुँच सकता है और उसे तभी खर्च करता है जब वह तल को ‘महसूस’ करके तट के निकट टूटता है।
प्रत्येक कथन एक अलग, भली-भाँति स्थापित तथ्य है, इसलिए सुरक्षित तरीका यह है कि किसी एक जाल की तलाश करने के बजाय उन्हें एक-एक करके जाँचा जाए। तीनों मानक पाठ्यपुस्तक परिणाम हैं, जो ‘सभी सही’ वाले विकल्प की ओर संकेत करते हैं।
मुख्य तथ्य
- तरंग की ऊंचाई पवन की गति, पवन की अवधि और तरंग-परिसर (खुले जल की वह दूरी जिस पर पवन चलती है) पर निर्भर करती है।
- तरंग की ऊर्जा तरंग-ऊंचाई के वर्ग के समानुपाती होती है।
- तरंगें ऊर्जा को गति देती हैं, जल-राशि को नहीं; गहरे जल में कण लगभग वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं।
- गहरे जल में घर्षण-हानि कम होती है, इसलिए तरंगें उथले जल में टूटने तक अपनी अधिकांश ऊर्जा बनाए रखती हैं।
तीनों कथन सही हैं, इसलिए उत्तर 1, 2 और 3 है — विकल्प (d)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- तरंगें ऊर्जा ले जाती हैं, जल नहीं — यह न सोचें कि जल स्वयं पूरे महासागर को पार करता है।
- ऊर्जा ऊंचाई के वर्ग के अनुपात में बढ़ती है, सीधे ऊंचाई के अनुपात में नहीं, इसलिए ऊंचाई का छोटा-सा परिवर्तन भी बहुत मायने रखता है।
प्रायः ‘कौन-से कथन सही हैं’ वाले समुच्चय के रूप में पूछा जाता है, जो ऊंचाई के नियंत्रकों (पवन गति/अवधि/तरंग-परिसर) को ऊर्जा-संबंध तथा गहरे जल में ऊर्जा के बने रहने के साथ मिला देता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
खुले जल की वह अबाध दूरी, जिस पर पवन चलकर तरंगें बनाती है, कहलाती है :
- (a)स्वैश
- (b)तरंग-परिसर (fetch)
- (c)तरंगदैर्घ्य
- (d)तरंग आवर्तकाल
उत्तर(b) तरंग-परिसर (fetch) — लंबा तरंग-परिसर (प्रबल, लंबे समय तक चलने वाली पवन के साथ) बड़ी तरंगें बनाता है। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
गहरे जल में तरंग के गुजरने पर जल-कण मुख्यतः :
- (a)तरंग के साथ महासागर पार करते हुए आगे बढ़ते हैं
- (b)लगभग वृत्ताकार कक्षाओं में घूमकर अपने मूल स्थान के निकट लौट आते हैं
- (c)स्थायी रूप से समुद्र तल पर बैठ जाते हैं
- (d)पूरी तरह स्थिर रहते हैं
उत्तर(b) लगभग वृत्ताकार कक्षाओं में घूमकर अपने मूल स्थान के निकट लौट आते हैं — ऊर्जा यात्रा करती है, जल नहीं।