अधिकांश बॉल्सनों के निम्नतम भाग पर एक भू-आकृति (स्थलरूप) होती है जिसे प्लाया कहते हैं । यह किस श्रेणी की भू-आकृति रचना को निरूपित करती है ?
- (a)नदीय (जलोढ़) भू-आकृति
- (b)शुष्क भू-आकृति
- (c)हिमनदीय भू-आकृति
- (d)परिहिमनदीय भू-आकृति
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, शुष्क भू-आकृति। बॉल्सन एक बंद मरुस्थलीय द्रोणी है (जो दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका और मेक्सिको के बेसिन-एंड-रेंज प्रदेश की विशेषता है); उसके निम्नतम तल पर प्लाया होता है — एक समतल, क्षणभंगुर, लवण-आवरित झील-तल जो विरल वर्षा के बाद थोड़े समय के लिए भर जाता है और फिर वाष्पन से सूख जाता है। बॉल्सन और उसका प्लाया दोनों ही मरुस्थलीय (शुष्क) प्रक्रियाओं की उपज हैं, अतः वे भू-आकृतियों की शुष्क श्रेणी में आते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नदीय (जलोढ़) भू-आकृति — नदीय भू-आकृतियाँ स्थायी रूप से बहने वाली नदियों से बनती हैं (विसर्प, बाढ़ के मैदान, डेल्टा)। प्लाया तो अंतःस्थलीय अपवाह वाली मरुस्थलीय द्रोणी में स्थित होता है जहाँ जल केवल थोड़े समय ठहरकर वाष्पित हो जाता है — यह नदी-जनित भू-आकृति नहीं है।
- (c)हिमनदीय भू-आकृति — हिमनदीय भू-आकृतियाँ (हिमोढ़, सर्क, U-आकार की घाटियाँ) ठंडे प्रदेशों में गतिशील हिम द्वारा तराशी जाती हैं, जो बॉल्सन/प्लाया के गर्म मरुस्थलीय परिवेश में होती ही नहीं।
- (d)परिहिमनदीय भू-आकृति — परिहिमनदीय भू-आकृतियाँ हिमचादरों के किनारों पर तुषार-क्रिया और स्थायी तुषार-भूमि से बनती हैं — यह शीत-जलवायु की प्रक्रिया है, जिसका प्लाया बनाने वाले मरुस्थलीय वाष्पन से कोई संबंध नहीं।
अवधारणा
शुष्क (मरुस्थलीय) प्रदेशों में पर्वतों से घिरी ऐसी द्रोणियाँ जिनका समुद्र तक कोई निकास नहीं होता, बॉल्सन कहलाती हैं। आसपास की ढालों से बहकर आया अवसाद जलोढ़ पंख और बजादा बनाता है, और द्रोणी का निम्नतम बिंदु प्लाया बन जाता है — लवण/चिकनी मिट्टी वाला क्षणभंगुर झील-तल, जो अधिकांश समय सूखा ही रहता है। ये क्लासिक शुष्क मरुस्थलीय भू-आकृतियाँ हैं।
परिवेश पर ध्यान दीजिए: बॉल्सन और प्लाया ऐसे मरुस्थल में होते हैं जहाँ अपवाह अंतःस्थलीय और वाष्पन उच्च होता है। इससे हिम-आधारित विकल्प (हिमनदीय, परिहिमनदीय) तुरंत बाहर हो जाते हैं। यद्यपि परत-प्रवाह थोड़े समय के लिए जल ले आता है, किंतु परिभाषक और स्थायी प्रक्रिया बंद द्रोणी में मरुस्थलीय वाष्पन ही है — इसलिए इस भू-आकृति को शुष्क श्रेणी में रखा जाता है, नदीय में नहीं।
मुख्य तथ्य
- बॉल्सन — पर्वतों से घिरी, बंद और अंतःस्थलीय अपवाह वाली मरुस्थलीय द्रोणी (दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका/मेक्सिको के बेसिन-एंड-रेंज में सामान्य)।
- प्लाया — बॉल्सन के तल पर स्थित समतल, क्षणभंगुर लवण/चिकनी मिट्टी वाला झील-तल; वर्षा के बाद थोड़े समय गीला, शेष समय सूखा और दरारदार लवण-मैदान।
- संबद्ध शुष्क भू-आकृतियाँ: जलोढ़ पंख, बजादा, इंसेलबर्ग, पेडिमेंट और यारडांग।
- प्लाया-प्रकार की लवणीय झीलों के भारतीय उदाहरण: शुष्क राजस्थान की साँभर, डीडवाना और कुचामन।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्लाया को 'नदीय' कह देना क्योंकि उसमें कभी-कभी जल बहकर आता है — परिभाषक और स्थायी प्रक्रिया मरुस्थलीय वाष्पन है, अतः वह शुष्क है।
- प्लाया (मरुस्थलीय लवण-मैदान) को गोखुर झील अथवा हिमनदीय टार्न से भ्रमित कर देना।
किसी मरुस्थलीय आकृति (प्लाया, बजादा, यारडांग, इंसेलबर्ग) का नाम देकर उसकी भू-आकृति श्रेणी पूछी जाती है, अथवा भारतीय लवणीय झीलों को शुष्क राजस्थान से मिलाने को कहा जाता है।
संबंधित PYQ
भारत के संदर्भ में, डीडवाना, कुचामन, सरगोल और खाटू किसके नाम हैं ?
- (a) हिमनद
- (b) मैंग्रोव क्षेत्र
- (c) रामसर स्थल
- (d) लवणीय झीलें
उत्तर(d) लवणीय झीलें
ये शुष्क राजस्थान की अंतःस्थलीय प्लाया-प्रकार की लवणीय झीलें हैं — वही शुष्क द्रोणी/प्लाया वाली संकल्पना जिसे यह NDA प्रश्न जाँचता है।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
'बजादा' किस प्रकार के परिवेश से संबद्ध भू-आकृति है ?
- (a)हिमनदीय
- (b)तटीय
- (c)शुष्क/मरुस्थलीय
- (d)कार्स्ट
उत्तर(c) शुष्क/मरुस्थलीय — बजादा मरुस्थलीय पर्वतों के पाद पर जुड़े हुए जलोढ़ पंखों की सतत पट्टी है। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान की डीडवाना और साँभर किसके उदाहरण हैं ?
- (a)मीठे जल की टार्न झीलें
- (b)प्लाया-प्रकार की लवणीय झीलें
- (c)गोखुर झीलें
- (d)क्रेटर झीलें
उत्तर(b) प्लाया-प्रकार की लवणीय झीलें — शुष्क राजस्थान की द्रोणी की क्षणभंगुर लवण झीलें।