निम्नलिखित में से कौन, यह पद स्थायी रूप से समाप्ति से पहले भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल थे
- (a)लॉर्ड माउंटबेटन
- (b)चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
- (c)लॉर्ड वेवेल
- (d)लॉर्ड लिनलिथगो
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी)। लॉर्ड माउंटबेटन के भारतीय अधिराज्य के प्रथम गवर्नर-जनरल पद से हटने के बाद सी. राजगोपालाचारी ने 21 जून 1948 को कार्यभार सँभाला और 26 जनवरी 1950 तक इस पद पर रहे। वे इस पद पर पहुँचने वाले एकमात्र भारतीय और अंतिम व्यक्ति थे: उसी तिथि को भारत गणराज्य बना और गवर्नर-जनरल का पद स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया, जिसके स्थान पर राष्ट्रपति (डॉ. राजेंद्र प्रसाद) आए।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)लॉर्ड माउंटबेटन — माउंटबेटन स्वतंत्र (अधिराज्य) भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल थे (15 अगस्त 1947 से 21 जून 1948); उन्होंने राजगोपालाचारी को कार्यभार सौंपा, अतः वे अंतिम नहीं थे।
- (c)लॉर्ड वेवेल — वेवेल ब्रिटिश भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल थे (1943-1947), माउंटबेटन से पहले और स्वतंत्रता से पहले — 1950 में पद की समाप्ति से उनका कोई संबंध नहीं।
- (d)लॉर्ड लिनलिथगो — लिनलिथगो 1936 से 1943 तक वायसराय रहे, वेवेल से भी पहले; स्वतंत्रता के बाद के अंतिम गवर्नर-जनरल पद से उनका कोई संबंध नहीं था।
अवधारणा
स्वतंत्रता (15 अगस्त 1947) और संविधान के प्रवर्तन (26 जनवरी 1950) के बीच भारत एक अधिराज्य था जिसका प्रमुख गवर्नर-जनरल होता था। इस पद पर केवल दो व्यक्ति रहे: लॉर्ड माउंटबेटन और उसके बाद सी. राजगोपालाचारी। 1950 में गणराज्य की स्थापना के साथ यह पद समाप्त कर दिया गया और उसकी भूमिका राष्ट्रपति को सौंप दी गई।
स्वतंत्रता-पूर्व के वायसरायों/गवर्नर-जनरलों (लिनलिथगो, वेवेल, वायसराय के रूप में माउंटबेटन) को 15 अगस्त 1947 के बाद के दो अधिराज्य गवर्नर-जनरलों से अलग कीजिए। स्वतंत्रता के बाद की अवधि में केवल माउंटबेटन और राजगोपालाचारी आते हैं, और चूँकि माउंटबेटन प्रथम थे, अतः राजगोपालाचारी ही अंतिम होंगे। लिनलिथगो और वेवेल औपनिवेशिक काल के विकर्षक हैं।
मुख्य तथ्य
- सी. राजगोपालाचारी 21 जून 1948 से 26 जनवरी 1950 तक भारतीय अधिराज्य के गवर्नर-जनरल रहे।
- वे इस पद पर आने वाले एकमात्र भारतीय और अंतिम व्यक्ति थे।
- लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र (अधिराज्य) भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल थे (अगस्त 1947-जून 1948)।
- 26 जनवरी 1950 को भारत के गणराज्य बनने पर यह पद समाप्त हो गया; डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति बने।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- माउंटबेटन को स्वतंत्र भारत का अंतिम गवर्नर-जनरल बता देना (वे प्रथम थे)।
- स्वतंत्रता-पूर्व के वायसरायों (लिनलिथगो, वेवेल) को दोनों अधिराज्य गवर्नर-जनरलों से भ्रमित कर देना।
- यह भूल जाना कि यह पद 1950 में समाप्त हुआ, 1947 में नहीं।
NDA/UPSC स्वतंत्र भारत के प्रथम या अंतिम गवर्नर-जनरल पूछते हैं, अथवा वायसरायों/गवर्नर-जनरलों का क्रम — 1947 के बाद के दोनों नाम (पहले माउंटबेटन, फिर राजगोपालाचारी) और 1950 की समाप्ति-तिथि पक्की कर लीजिए।
संबंधित PYQ
कथन (A): स्वतंत्र भारत में ब्रिटिश प्रभुसत्ता बनी रही। कारण (R): स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल की नियुक्ति ब्रिटिश सम्राट ने की थी। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
- (a) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
- (b) A और R दोनों सही हैं किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- (c) A सही है किंतु R गलत है
- (d) A गलत है किंतु R सही है
उत्तर(d) A गलत है किंतु R सही है
वही संकल्पना — स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल (सी. राजगोपालाचारी, जिनकी नियुक्ति ब्रिटिश सम्राट के अधीन हुई जबकि प्रभुसत्ता भारतीय जनता को हस्तांतरित हो चुकी थी)। यह 1947 के बाद के उसी अधिराज्य गवर्नर-जनरल पद की जाँच करता है जिसका नाम यह NDA प्रश्न पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
स्वतंत्र (अधिराज्य) भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल कौन थे ?
- (a)सी. राजगोपालाचारी
- (b)लॉर्ड माउंटबेटन
- (c)लॉर्ड वेवेल
- (d)डॉ. राजेंद्र प्रसाद
उत्तर(b) लॉर्ड माउंटबेटन — वे राजगोपालाचारी से पहले 15 अगस्त 1947 से 21 जून 1948 तक इस पद पर रहे। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के गणराज्य बनने पर गवर्नर-जनरल का पद समाप्त कर उसके स्थान पर राष्ट्रपति का पद कब लाया गया ?
- (a)1947
- (b)1948
- (c)1950
- (d)1952
उत्तर(c) 1950 — 26 जनवरी 1950 को संविधान प्रवृत्त हुआ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति बने।