तड़ित् (Lightning) का कारण क्या है ?
- (a)मेघ के विभिन्न भागों के बीच आवेशों का प्रवाह
- (b)मेघ के ऊपरी और निचली सतहों के बीच आवेशों का लघु-पथन (शॉर्टसर्किंटिंग)
- (c)मेघ के आधार पर धनावेशित कणों का संचयन और शीर्ष पर ऋणावेशित कणों का संचयन
- (d)मेघ के आधार पर ऋणात्मक आवेश के नीचे के जमीन पर धनात्मक आवेश का प्रेरण
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, 'मेघ के आधार पर ऋणात्मक आवेश के नीचे के जमीन पर धनात्मक आवेश का प्रेरण'। गर्जन-मेघ में आवेश-पृथक्करण के कारण उसका आधार प्रबल रूप से ऋणावेशित हो जाता है। यह ऋणावेशित आधार ठीक अपने नीचे की जमीन पर विपरीत (धन) आवेश प्रेरित कर देता है। जैसे-जैसे विभवांतर बढ़ता है, बीच की वायु अंततः भंजित हो जाती है और मेघ-आधार तथा भूमि के बीच एक विसर्जन — तड़ित् — कौंध जाता है। विकल्प (d) इसी प्रेरण-फिर-विसर्जन क्रियाविधि को पकड़ता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)मेघ के विभिन्न भागों के बीच आवेशों का प्रवाह — यह वस्तुतः अंतः-मेघ तड़ित् का वर्णन है, जो वास्तविक है और सबसे सामान्य रूप भी; किंतु प्रश्न मेघ-से-भूमि प्रक्रिया के इर्द-गिर्द रचा गया है, जिसका विशिष्ट कारण (d) में वर्णित भूमि-प्रेरण है। (a) को अभीष्ट उत्तर के बजाय आंशिक/कम पूर्ण वर्णन मानिए।
- (b)मेघ के ऊपरी और निचली सतहों के बीच आवेशों का लघु-पथन (शॉर्टसर्किंटिंग) — तड़ित् आयनित वायु में से होने वाला परावैद्युत भंजन/विसर्जन है, कोई 'लघु-पथ' नहीं; और यह विकल्प भी घटना को मेघ के भीतर ही सीमित कर देता है, जबकि प्रश्न का लक्ष्य मेघ-से-भूमि प्रेरण है।
- (c)मेघ के आधार पर धनावेशित कणों का संचयन और शीर्ष पर ऋणावेशित कणों का संचयन — इसमें ध्रुवता उलटी है। किसी प्रारूपी कपासी-वर्षी मेघ में शीर्ष धनावेशित और आधार ऋणावेशित होता है — इस विकल्प के कथन से ठीक उल्टा — अतः यह तथ्यतः गलत है।
अवधारणा
तड़ित् एक विशाल स्थिर-वैद्युत विसर्जन है। कपासी-वर्षी मेघ के भीतर टकराते हुए हिम-क्रिस्टल और जल-बूँदें आवेश को इस प्रकार पृथक कर देती हैं कि मेघ का शीर्ष धनावेशित और आधार ऋणावेशित हो जाता है। ऋणावेशित आधार नीचे की जमीन पर धनावेश प्रेरित करता है। जब विद्युत क्षेत्र बीच की वायु को आयनित करने के लिए पर्याप्त प्रबल हो जाता है, तब एक तीव्र विसर्जन (तड़ित्) आवेश को उदासीन कर देता है और वायु को विस्फोटक रूप से गरम कर देता है (जिसे हम गर्जन के रूप में सुनते हैं)।
आवेश-पृथक्करण से विसर्जन तक तर्क कीजिए। सबसे पहले तथ्य-जाँच से विकल्प (c) हटा दीजिए — मेघ का आधार ऋणावेशित होता है, धनावेशित नहीं। फिर यह पहचानिए कि यद्यपि मेघ के भीतर भी आवेश चलते हैं (विकल्प a, अंतः-मेघ तड़ित्), प्रश्न मेघ-से-भूमि कारण पूछ रहा है, जो (d) में वर्णित जमीन पर विपरीत आवेश का प्रेरण है। यह ऐसा प्रसंग है जहाँ एक से अधिक विकल्प किसी सत्य को छूते हैं, अतः सर्वाधिक पूर्ण और सही दिशा वाला वर्णन चुनिए।
मुख्य तथ्य
- प्रारूपी गर्जन-मेघ में शीर्ष धनावेशित और आधार ऋणावेशित होता है।
- ऋणावेशित मेघ-आधार अपने नीचे की जमीन पर धनावेश प्रेरित कर देता है (स्थिर-वैद्युत प्रेरण)।
- तड़ित् वह विसर्जन है जो तब होता है जब बीच की वायु भंजित होकर आयनित हो जाती है।
- गर्जन उस वायु की ध्वनि है जो तड़ित्-विसर्जन से अत्यधिक गरम होकर विस्फोटक रूप से फैलती है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मेघ की ध्रुवता उलट देना — आधार ऋणावेशित होता है, शीर्ष धनावेशित।
- तड़ित् को 'लघु-पथ' कह देना; यह आयनित वायु में से होने वाला विसर्जन है।
- जब प्रश्न मेघ-से-भूमि कारण पूछ रहा हो, तब अंतः-मेघ वाला वर्णन चुन लेना।
NDA तड़ित् का कारण अथवा तड़ित् चालक की कार्यविधि पूछता है — उत्तर को मेघ में आवेश-पृथक्करण, जमीन पर प्रेरण तथा आयनित वायु में से विसर्जन पर टिकाइए।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
किसी ऊँचे भवन पर लगा तड़ित् चालक उसकी रक्षा किस प्रकार करता है ?
- (a)सभी मेघों को भवन से दूर खींचकर
- (b)विसर्जन को सुरक्षित रूप से जमीन तक ले जाने के लिए कम प्रतिरोध का पथ देकर
- (c)भवन का आवेश बढ़ाकर
- (d)तड़ित् को वापस मेघ की ओर परावर्तित करके
उत्तर(b) विसर्जन को सुरक्षित रूप से जमीन तक ले जाने के लिए कम प्रतिरोध का पथ देकर, जिससे संरचना बच जाती है। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
गर्जन-तूफ़ान के दौरान हमें तड़ित् की कौंध गर्जन सुनाई देने से पहले दिखती है, क्योंकि
- (a)पहले प्रकाश उत्पन्न होता है और ध्वनि बाद में
- (b)प्रकाश ध्वनि की तुलना में कहीं अधिक तेज़ चलता है
- (c)गर्जन तड़ित् से दुर्बल होता है
- (d)हमारी आँखें कानों से तेज़ प्रतिक्रिया करती हैं
उत्तर(b) प्रकाश ध्वनि की तुलना में कहीं अधिक तेज़ चलता है, इसलिए उसी विसर्जन की कौंध गर्जन से पहले हम तक पहुँच जाती है।