किसी ऐसे स्थान में एक धन आवेश (charge) दक्षिण की ओर गति कर रहा है, जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र उत्तर दिशा की ओर निर्देश कर रहा है । गतिमान आवेश पर :
- (a)उत्तर दिशा की ओर विक्षेपक बल लगेगा ।
- (b)पूर्व दिशा की ओर विक्षेपक बल लगेगा ।
- (c)पश्चिम दिशा की ओर विक्षेपक बल लगेगा ।
- (d)कोई विक्षेपक बल नहीं लगेगा ।
उत्तर
क्यों
सही — D, कोई विक्षेपक बल नहीं लगेगा। किसी गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल F = qv × B होता है, जिसका परिमाण F = qvB·sinθ होता है, जहाँ θ वेग और क्षेत्र के बीच का कोण है। यहाँ आवेश दक्षिण की ओर गति करता है जबकि क्षेत्र उत्तर की ओर निर्देशित है, इसलिए v और B विपरीत-समांतर (antiparallel) हैं और θ = 180° है।
चूँकि sin 180° = 0 है, बल शून्य होता है — क्षेत्र के समांतर या विपरीत-समांतर गति करने वाले आवेश पर कोई चुंबकीय बल अनुभव नहीं होता, चाहे उसका चिह्न कुछ भी हो।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)उत्तर दिशा की ओर विक्षेपक बल लगेगा । — चुंबकीय बल सदैव v और B दोनों के लंबवत होता है (सदिश गुणनफल से); यह कभी भी क्षेत्र की दिशा में निर्देशित नहीं हो सकता। इसके अतिरिक्त, v के B के विपरीत-समांतर होने पर बल शून्य होता है, इसलिए कोई उत्तर दिशा में विक्षेपण नहीं होता।
- (b)पूर्व दिशा की ओर विक्षेपक बल लगेगा । — किसी भी पार्श्व (पूर्व दिशा) बल के लिए वेग का B के लंबवत घटक आवश्यक होगा, परंतु यहाँ v ठीक B के विपरीत-समांतर है, जिससे sinθ = 0 और बल शून्य मिलता है।
- (c)पश्चिम दिशा की ओर विक्षेपक बल लगेगा । — पूर्व वाले विकल्प जैसा ही कारण — वेग का कोई लंबवत घटक नहीं है, इसलिए v × B = 0 है और कोई पश्चिम दिशा (या किसी भी दिशा) में विक्षेपण नहीं होता।
अवधारणा
किसी चुंबकीय क्षेत्र से गुजरने वाला आवेशित कण लॉरेंत्ज़ चुंबकीय बल F = qv × B अनुभव करता है। इसका परिमाण वेग और क्षेत्र के बीच के कोण की ज्या (sine) पर निर्भर करता है: यह तब सबसे अधिक होता है जब गति क्षेत्र के लंबवत हो (θ = 90°) और तब शून्य होता है जब गति क्षेत्र के अनुदिश हो, चाहे समांतर (θ = 0°) हो या विपरीत-समांतर (θ = 180°)। जब बल विद्यमान होता है, तो वह सदैव v और B दोनों के लंबवत होता है।
दिशा-सूचक (compass) दिशाएँ एक भटकाव हैं। एक बार यह देख लेने पर कि 'दक्षिण' और 'उत्तर', v और B को विपरीत-समांतर बना देते हैं, sinθ गुणक शून्य हो जाता है और कोई बल कार्य नहीं करता। केवल क्षेत्र रेखाओं के आर-पार वेग का कोई घटक ही विक्षेपण उत्पन्न करता।
मुख्य तथ्य
- गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल: F = qv × B, परिमाण qvB·sinθ।
- θ = 0° या 180° (क्षेत्र के अनुदिश गति) पर sinθ = 0 मिलता है और इसलिए बल शून्य होता है।
- बल तब अधिकतम होता है जब v, B के लंबवत हो (θ = 90°)।
- कोई भी चुंबकीय बल वेग और क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है, इसलिए यह कभी B की दिशा में निर्देशित नहीं होता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहले यह जाँचे बिना कि कोई बल विद्यमान है भी या नहीं, बल को कोई दिशा-सूचक दिशा दे देना।
- यह भूल जाना कि क्षेत्र के समांतर या विपरीत-समांतर गति से चुंबकीय बल शून्य मिलता है।
यह एक संकल्पनात्मक विद्युतचुंबकत्व प्रश्न के रूप में पूछा जाता है, जो चुंबकीय बल की sinθ निर्भरता को परखता है।
संबंधित PYQ
NDA_GAT_2020_I_II_Q1322020एक प्रोटॉन ऊपर दर्शाए अनुसार, किसी चुंबकीय क्षेत्र में समकोण पर प्रवेश करता है । प्रोटॉन पर कार्यरत बल की दिशा होगी
- (a) दाईं ओर
- (b) बाईं ओर
- (c) पृष्ठ से बाहर की ओर
- (d) पृष्ठ के अंदर की ओर
उत्तर(d) पृष्ठ के अंदर की ओर
वही अवधारणा — गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल (F = qv × B)। उस NDA प्रश्न में प्रोटॉन B के लंबवत गति करता है (अधिकतम बल), जो इस प्रश्न का पूरक मामला है जहाँ गति विपरीत-समांतर है और बल शून्य है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समांतर गति करने वाला आवेशित कण जो चुंबकीय बल अनुभव करता है, वह है :
- (a)अधिकतम
- (b)अधिकतम का आधा
- (c)शून्य
- (d)क्षेत्र की दिशा में निर्देशित
उत्तर(c) शून्य — क्योंकि v के B के अनुदिश होने पर sinθ = 0 होता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल तब अधिकतम होता है जब उसके वेग और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण होता है :
- (a)0°
- (b)45°
- (c)90°
- (d)180°
उत्तर(c) 90° — बल परिमाण qvB·sinθ होता है, जो θ = 90° पर अधिकतम होता है।