मनसबदारी प्रथा (व्यवस्था) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)सेना के सभी सिपाहियों को मनसब आबंटित किया गया था ।
- (b)सामान्यतः वंश (ancestry) के आधार पर मनसब दिए जाते थे ।
- (c)मनसबदारों के पद और वेतन को ज़ात (zat) नामक संख्यात्मक पदनाम द्वारा सूचित किया जाता था ।
- (d)मनसबदारों को कभी भी नकद में भुगतान नहीं किया जाता था ।
उत्तर
क्यों
सही — C। अकबर की मनसबदारी व्यवस्था में प्रत्येक धारक को दो संख्यात्मक पद दिए जाते थे: ज़ात और सवार। ज़ात मनसबदार की शाही पदानुक्रम में व्यक्तिगत स्थिति निर्धारित करता था और उसका वेतन तय करता था, जबकि सवार यह तय करता था कि उसे कितने घुड़सवार रखने होंगे।
अतः यह ठीक-ठीक ज़ात संख्या ही थी जो किसी मनसबदार के पद और वेतन को दर्शाती थी, जिससे कथन C सही सिद्ध होता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)सेना के सभी सिपाहियों को मनसब आबंटित किया गया था । — मनसब राज्य के अधिकारियों और सामंतों को दिए जाते थे, प्रत्येक साधारण सिपाही को नहीं; सामान्य घुड़सवार किसी मनसबदार के अधीन सेवा करते थे, स्वयं मनसब धारण नहीं करते थे।
- (b)सामान्यतः वंश (ancestry) के आधार पर मनसब दिए जाते थे । — मनसब बादशाह द्वारा सेवा और योग्यता के आधार पर प्रदान किए जाते थे और उनकी इच्छा से बढ़ाए, घटाए या वापस लिए जा सकते थे; ये वंशानुगत या वंश-आधारित नहीं थे।
- (d)मनसबदारों को कभी भी नकद में भुगतान नहीं किया जाता था । — मनसबदारों को कोष से नकद (नक़दी) में, या अधिकतर किसी आबंटित जागीर के राजस्व के माध्यम से भुगतान किया जा सकता था — इसलिए 'कभी नकद में भुगतान नहीं' असत्य है।
अवधारणा
अकबर द्वारा व्यवस्थित मनसबदारी प्रथा, मुग़ल साम्राज्य की संयुक्त सैन्य और प्रशासनिक श्रेणी-व्यवस्था थी। प्रत्येक अधिकारी (मनसबदार) दो अंकों से बने एक संख्यात्मक पद का धारक होता था — ज़ात और सवार। ज़ात उसका व्यक्तिगत पद और वेतन दर्शाता था; सवार उस घुड़सवार-दल को दर्शाता था जिसे उसे बनाए रखना होता था। इसने कुलीन वर्ग और सेना को प्रत्यक्ष शाही नियंत्रण के अधीन संगठित, श्रेणीबद्ध और वेतन-भुगतान किया।
विकर्षक विकल्प इस व्यवस्था की एक-एक वास्तविक विशेषता पर आघात करते हैं: यह सार्वभौमिक नहीं थी (केवल अधिकारी मनसब धारण करते थे), वंशानुगत नहीं थी (बादशाह योग्यता पर पद देता और समायोजित करता था), और न ही केवल-नकद या नकद-रहित थी (भुगतान नकद में या, प्रायः, जागीर के रूप में होता था)। केवल ज़ात वाला कथन सटीक है।
मुख्य तथ्य
- ज़ात, मनसबदार की पदानुक्रम में स्थिति और उसका व्यक्तिगत वेतन निर्धारित करता था; सवार उसके द्वारा बनाए रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या तय करता था।
- पद छोटी संख्याओं से लेकर कई हज़ार तक जाते थे; राजकुमारों के पास सर्वोच्च मनसब होते थे।
- मनसब बादशाह द्वारा प्रदान, पदोन्नत, पदावनत या रद्द किए जाते थे — ये वंशानुगत नहीं थे।
- भुगतान नकद (नक़दी) में, या अधिकतर किसी जागीर के आबंटन द्वारा होता था, जिसका राजस्व वेतन पूरा करता था।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि मनसब यूरोपीय जागीरों (fiefs) की भाँति वंशानुगत थे — ये बादशाह की इच्छा पर धारण किए जाते थे।
- ज़ात (पद और वेतन) को सवार (घुड़सवारों की संख्या) से मिला देना।
यह 'कौन-सा कथन सही है' प्रकार के प्रश्न के रूप में पूछा जाता है, जो ज़ात, सवार, भुगतान और पात्रता के सटीक ज्ञान को पुरस्कृत करता है।
संबंधित PYQ
मध्यकालीन भारत में, मनसबदारी व्यवस्था मुख्यतः किसके लिए प्रवर्तित की गई थी
- (a) सेना में भर्ती करने के लिए
- (b) राजस्व संग्रह को सुगम बनाने के लिए
- (c) धार्मिक सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए
- (d) स्वच्छ प्रशासन प्रभावी बनाने के लिए
उत्तर(a) सेना में भर्ती करने के लिए
वही संस्था — मनसबदारी व्यवस्था। UPSC इसके प्राथमिक उद्देश्य (सेना का संगठन और भर्ती) को परखता है, जो इस NDA प्रश्न के उस केंद्र बिंदु का पूरक है कि ज़ात पद ने पद और वेतन को कैसे श्रेणीबद्ध किया।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मुग़ल मनसबदारी व्यवस्था में, किसी मनसबदार को कितने घुड़सवार रखने होंगे, यह किससे दर्शाया जाता था ?
- (a)ज़ात पद से
- (b)सवार पद से
- (c)जागीर से
- (d)खालिसा से
उत्तर(b) सवार पद से — जबकि ज़ात पद और वेतन तय करता था। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मनसबदारी व्यवस्था को किस मुग़ल बादशाह ने व्यवस्थित किया था ?
- (a)बाबर
- (b)अकबर
- (c)औरंगज़ेब
- (d)शाहजहाँ
उत्तर(b) अकबर।