मृदारचक प्रवृत्ति (soil-forming regime) में, जिस क्षेत्र में वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन वर्षण से काफी अधिक होता है, वहाँ निम्नलिखित में से कौन-सा होता है ?
- (a)कैल्सीभवन (Calcification)
- (b)लैटेराइटीभवन (Laterization)
- (c)पॉडसोलीभवन (Podsolization)
- (d)ग्लेभवन (Gleization)
उत्तर
क्यों
सही — A, कैल्सीभवन। जहाँ वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन वर्षण से काफी अधिक होता है (अर्ध-शुष्क/शुष्क जलवायु), वहाँ जल ऊपर की ओर गति करता है और मृदा-रूपरेखा में कैल्शियम कार्बोनेट जमा हो जाता है, जिससे चूना-समृद्ध (कंकर/कैलिचे) परतें बनती हैं।
यह मृदा-निर्माण प्रक्रिया कैल्सीभवन कहलाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)लैटेराइटीभवन (Laterization) — लैटेराइटीभवन गर्म, आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु में होता है जहाँ भारी वर्षा सिलिका और क्षारकों को निक्षालित (leach) कर देती है, केवल लौह और एल्युमिनियम ऑक्साइड बचाकर — यह विपरीत आर्द्रता व्यवस्था है।
- (c)पॉडसोलीभवन (Podsolization) — पॉडसोलीभवन ठंडे, आर्द्र (प्रायः शंकुधारी) क्षेत्रों में होता है जहाँ अम्लीय निक्षालन ऊपरी मृदा से लौह और एल्युमिनियम निकाल देता है — फिर से एक आर्द्र, निक्षालन वाला परिवेश।
- (d)ग्लेभवन (Gleization) — ग्लेभवन जलाक्रांत, कुनिकासित (poorly drained) मृदाओं में होता है जहाँ अपचायक परिस्थितियाँ धूसर, चित्तीदार 'ग्ले' परतें बनाती हैं — एक संतृप्त, न कि शुष्क, परिवेश।
अवधारणा
मृदा-निर्माण (पेडोजेनिक) प्रवृत्तियाँ नमी और तापमान के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वर्षा वाष्पन से अधिक होती है, तो जल नीचे की ओर रिसता है और घुलनशील पदार्थ को निक्षालित करता है (आर्द्र उष्णकटिबंध में लैटेराइटीभवन, ठंडे आर्द्र क्षेत्रों में पॉडसोलीभवन)।
जब वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन वर्षण से अधिक होता है, तो केशिका जल ऊपर उठता है और सतह के निकट लवण तथा कार्बोनेट जमा करता है — कैल्सीभवन। जलजमाव ग्लेभवन देता है।
मुख्य वाक्यांश है 'वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन वर्षण से अधिक' — नमी की कमी जिसमें जल ऊपर की ओर गति करता है, जो कैल्शियम कार्बोनेट जमा करता है: कैल्सीभवन। अन्य प्रक्रियाएँ आर्द्र या जलाक्रांत प्रवृत्तियों से संबंधित हैं।
मुख्य तथ्य
- कैल्सीभवन: जहाँ वाष्पन वर्षा से अधिक हो (शुष्क क्षेत्र), वहाँ कैल्शियम कार्बोनेट जमा होता है।
- लैटेराइटीभवन: गर्म आर्द्र उष्णकटिबंध में सिलिका/क्षारकों का निक्षालन → लौह/एल्युमिनियम ऑक्साइड।
- पॉडसोलीभवन: ठंडे आर्द्र (शंकुधारी) क्षेत्रों में अम्लीय निक्षालन।
- ग्लेभवन: जलाक्रांत परिस्थितियों में अपचायक, धूसर 'ग्ले' मृदाएँ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- लैटेराइटीभवन/पॉडसोलीभवन चुन लेना, जिनके लिए जल-आधिक्य (निक्षालन) आवश्यक है।
- कैल्सीभवन (शुष्क) को ग्लेभवन (जलाक्रांत) के साथ भ्रमित करना।
यह पूछा जाता है कि कौन-सी मृदा प्रक्रिया किसी दी गई नमी-व्यवस्था से मेल खाती है, विशेषकर शुष्क (वाष्पन-प्रधान) क्षेत्रों में।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
लैटेराइटीभवन किस जलवायु की विशिष्टता है?
- (a)शीत मरुस्थल
- (b)गर्म और आर्द्र उष्णकटिबंध
- (c)अर्ध-शुष्क
- (d)जलाक्रांत
उत्तर(b) गर्म और आर्द्र उष्णकटिबंध। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
धूसर, चित्तीदार 'ग्ले' मृदाएँ किस परिस्थिति में बनती हैं?
- (a)प्रबल वाष्पन
- (b)जलाक्रांतता (कुनिकासन)
- (c)अम्लीय निक्षालन
- (d)चूना संचय
उत्तर(b) जलाक्रांतता (कुनिकासन)।