जब एक ही तापमान और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन को मापा जाता है, तो उनमें कणों की समान संख्या होती है । उपर्युक्त नियम को किसने प्रस्तावित किया था ?
- (a)चार्ल्स (Charles)
- (b)बॉयल (Boyle)
- (c)आवोगाद्रो (Avogadro)
- (d)लुसैक (Lussac)
उत्तर
क्यों
सही — C, आवोगाद्रो। अमेदेओ आवोगाद्रो ने 1811 में यह प्रस्तुत किया कि एक ही तापमान और दाब पर मापे गए सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं (कणों) की समान संख्या होती है। यही आवोगाद्रो का नियम है, और यही कारण है कि निश्चित तापमान और दाब पर किसी गैस का आयतन उसमें उपस्थित मोलों की संख्या के अनुक्रमानुपाती होता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)चार्ल्स (Charles) — चार्ल्स का नियम स्थिर दाब पर किसी निश्चित मात्रा की गैस के आयतन को उसके तापमान से जोड़ता है (आयतन परम ताप के अनुक्रमानुपाती होता है)। यह समान आयतन में समान संख्या के कणों के बारे में कुछ नहीं कहता।
- (b)बॉयल (Boyle) — बॉयल का नियम स्थिर तापमान पर किसी निश्चित मात्रा की गैस के दाब और आयतन को जोड़ता है (दाब आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है)। यह समान-संख्या-कण वाले कथन से भिन्न संबंध है।
- (d)लुसैक (Lussac) — गे-लुसैक ने गैसों के संयोजी आयतनों का नियम (और दाब-तापमान नियम) दिया, परंतु यह परिकल्पना कि समान आयतनों में अणुओं की समान संख्या होती है, आवोगाद्रो की थी, जो गे-लुसैक के प्रेक्षणों की व्याख्या के लिए प्रस्तुत की गई थी।
अवधारणा
आवोगाद्रो का नियम मूल गैस नियमों में से एक है। यह बताता है कि समान तापमान और दाब पर, किसी भी गैस के समान आयतन में अणुओं की समान संख्या होती है। चूँकि अणुओं की संख्या ही मोलों की संख्या तय करती है, अतः निश्चित तापमान और दाब पर गैस का आयतन गैस की मात्रा के सीधे अनुक्रमानुपाती होता है।
यहाँ जाल यह है कि अधिक परिचित नाम बॉयल या चार्ल्स की ओर चला जाए, या आवोगाद्रो को गे-लुसैक (जिन्होंने संयोजी आयतनों का अध्ययन किया) के साथ भ्रमित कर लिया जाए। इनमें से प्रत्येक नियम भिन्न राशियों के युग्म को जोड़ता है; केवल आवोगाद्रो का नियम आयतन को कणों की वास्तविक संख्या से जोड़ता है।
मुख्य तथ्य
- आवोगाद्रो का नियम कहता है कि समान तापमान और दाब पर सभी गैसों के समान आयतनों में अणुओं की समान संख्या होती है।
- इसे इतालवी वैज्ञानिक अमेदेओ आवोगाद्रो ने 1811 में प्रस्तावित किया था।
- इसके परिणामस्वरूप, किसी भी आदर्श गैस का एक मोल मानक तापमान और दाब पर लगभग 22.4 लीटर घेरता है।
- आवोगाद्रो संख्या, प्रति मोल लगभग 6.022 × 10²³ कण, उनके सम्मान में नामित है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आवोगाद्रो के नियम को गे-लुसैक के संयोजी आयतनों के नियम के साथ भ्रमित करना।
- यह मान लेना कि किसी भारी गैस के समान आयतन में अधिक अणु समा जाते हैं।
एनडीए कोई गैस नियम बताकर पूछता है कि उसे किसने प्रस्तावित किया, या वैज्ञानिक का नाम देकर नियम पूछता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मानक तापमान और दाब पर किसी भी आदर्श गैस का एक मोल लगभग कितना आयतन घेरता है:
- (a)11.2 लीटर
- (b)22.4 लीटर
- (c)24.4 लीटर
- (d)6.022 लीटर
उत्तर(b) 22.4 लीटर — STP पर मोलर आयतन, जो आवोगाद्रो के नियम का प्रत्यक्ष परिणाम है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बॉयल का नियम किसी निश्चित मात्रा की गैस के किन दो गुणों के बीच संबंध बताता है?
- (a)आयतन और तापमान
- (b)स्थिर तापमान पर दाब और आयतन
- (c)दाब और तापमान
- (d)मोलों की संख्या और आयतन
उत्तर(b) स्थिर तापमान पर दाब और आयतन — दाब आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है।