विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित 'द बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (अमेंडमेंट) एक्ट' [जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम], 2023 किस दिनांक को प्रकाशित किया गया था ?
- (a)13 जून
- (b)03 जुलाई
- (c)03 अगस्त
- (d)13 सितम्बर
सही उत्तर — (c) 3 अगस्त। जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 को 3 अगस्त, 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई और उसी दिन विधि एवं न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) द्वारा इसे अधिनियम संख्या 10/2023 के रूप में भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। संसद ने इसे कुछ दिन पहले ही पारित कर दिया था — लोकसभा ने विधेयक को 25 जुलाई, 2023 को और राज्यसभा ने 1 अगस्त, 2023 को पारित किया — अतः राष्ट्रपति की स्वीकृति और राजपत्र-प्रकाशन, राज्यसभा में मतदान के 48 घंटों के भीतर ही हो गए।
- (a)13 जून — इस विधि की किसी भी अवस्था का संबंध जून 2023 से नहीं है। जून के मध्य तक संशोधन विधेयक को किसी भी सदन ने पारित नहीं किया था — लोकसभा ने इसे केवल मानसून सत्र में, जुलाई में ही लिया।
- (b)03 जुलाई — यह सही उत्तर की ही तारीख-संख्या पर आधारित एक निकट-भ्रामक विकल्प है, बस एक महीना पहले का। जुलाई के प्रारंभ में विधेयक अभी भी संसद के समक्ष विचाराधीन था; उस समय न तो इसे स्वीकृति मिल सकती थी और न ही यह राजपत्रित हो सकता था।
- (d)13 सितम्बर — यह बहुत देर की तारीख है। 13 सितम्बर, 2023 तक यह अधिनियम पहले ही लगभग छह सप्ताह से विधि-पुस्तक में सम्मिलित हो चुका था — स्वीकृति और राजपत्र-प्रकाशन दोनों 3 अगस्त, 2023 को ही हो चुके थे।
मूल विधि जैव विविधता अधिनियम, 2002 है, जो जैव विविधता पर अभिसमय (1992) तथा बाद में पहुँच व लाभ-साझाकरण संबंधी नागोया प्रोटोकॉल (2010) के तहत भारत के दायित्वों को पूरा करने वाला कानून है। इसने एक त्रि-स्तरीय संरचना बनाई: चेन्नई में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड, तथा स्थानीय निकाय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ, जो पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर बनाए रखती हैं। 2023 का संशोधन उस अधिनियम का पहला व्यापक पुनर्लेखन है।
तिथि-आधारित प्रश्न में भरोसेमंद तरीका है एकल तिथि याद रखने के बजाय विधायी क्रम को समझना: विधेयक पहले दोनों सदनों से पारित होता है, फिर स्वीकृति मिलती है, फिर यह राजपत्रित होता है — प्रायः कुछ ही दिनों में। यहाँ राज्यसभा में मतदान 1 अगस्त, 2023 को हुआ था, इसलिए उससे पहले का कोई भी विकल्प (13 जून, 3 जुलाई) प्रत्यक्षतः असंभव है, और पाँच सप्ताह बाद की तारीख (13 सितम्बर) भी असंभाव्य है क्योंकि स्वीकृति शायद ही पारण के इतने बाद होती है। इस प्रकार शेष रह जाती है 3 अगस्त।
- जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 — राष्ट्रपति की स्वीकृति और भारत के राजपत्र में प्रकाशन दोनों 3 अगस्त, 2023 को; विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा अधिनियम संख्या 10/2023 के रूप में अधिसूचित
- लोकसभा द्वारा 25 जुलाई, 2023 को और राज्यसभा द्वारा 1 अगस्त, 2023 को पारित; मूल विधेयक दिसम्बर 2021 में प्रस्तुत किया गया था और संसद की एक संयुक्त समिति द्वारा परीक्षित हुआ था
- यह जैव विविधता अधिनियम, 2002 में संशोधन करता है — वह विधि जो भारत में जैव विविधता अभिसमय और नागोया प्रोटोकॉल को क्रियान्वित करती है
- मुख्य परिवर्तन: पंजीकृत आयुष चिकित्सकों और संहिताबद्ध पारंपरिक ज्ञान के उपयोगकर्ताओं को लाभ-साझाकरण की आवश्यकताओं से छूट देना, औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान व पेटेंट आवेदनों के लिए स्वीकृति मार्ग को सरल बनाना, तथा कारावास के स्थान पर एक निर्णायक अधिकारी द्वारा तय मौद्रिक दंड लागू कर अपराधों को गैर-आपराधिक बनाना
- अपरिवर्तित त्रि-स्तरीय संरचना: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (चेन्नई) — राज्य जैव विविधता बोर्ड — जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ, जो पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर तैयार करती हैं
- 1992 — रियो पृथ्वी सम्मेलन में जैव विविधता पर अभिसमय अंगीकृत; भारत ने 1994 में इसका अनुसमर्थन किया
- 2002 — जैव विविधता अधिनियम अधिनियमित; 2003 में चेन्नई में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना
- 2010 — पहुँच व लाभ-साझाकरण पर नागोया प्रोटोकॉल अंगीकृत; भारत ने इसका अनुसमर्थन किया और 2012 में हैदराबाद में CBD CoP-11 की मेज़बानी की
- दिसम्बर 2021 — जैव विविधता (संशोधन) विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत, संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया
- 25 जुलाई, 2023 — लोकसभा ने विधेयक पारित किया; 1 अगस्त, 2023 — राज्यसभा ने इसे पारित किया
- 3 अगस्त, 2023 — राष्ट्रपति की स्वीकृति; विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित
स्वीकृति और राजपत्र-प्रकाशन, राज्यसभा में मतदान के दो दिन बाद हुए — यही कारण है कि 3 अगस्त ही उत्तर है, अन्य तीन तिथियों में से कोई नहीं।
- संसद द्वारा विधेयक पारित करने की तिथि को राष्ट्रपति की स्वीकृति या राजपत्र-प्रकाशन की तिथि से भ्रमित करना
- यह मान लेना कि जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ 2023 के संशोधन से बनाई गईं — जबकि ये 2002 के अधिनियम से आती हैं
- सांविधिक जैव विविधता अधिनियम को 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा से गड्डमड्ड करना, जो एक वैज्ञानिक वर्गीकरण है, कानूनी श्रेणी नहीं
MPPSC किसी हालिया केंद्रीय विधि की सटीक तिथि, अधिनियम संख्या या संशोधन वर्ष पूछना पसंद करता है; UPSC लगभग कभी तिथि नहीं पूछता — वह पूछता है कि अधिनियम के तहत बनाई गई कोई संस्था कानूनी रूप से क्या कर सकती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारत में, जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। 2. जैव विविधता प्रबंधन समितियों के पहुँच व लाभ-साझाकरण के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण कार्य हैं, जिसमें अपने क्षेत्राधिकार में जैविक संसाधनों तक पहुँच पर संग्रहण शुल्क लगाने की शक्ति भी शामिल है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(c) 1 और 2 दोनों
उसी विधि को दूसरे कोण से देखना — जैव विविधता अधिनियम का स्थानीय स्तर (जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ) क्या करता है, और यह भारत के नागोया प्रोटोकॉल दायित्वों को कैसे पूरा करता है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) भारतीय कृषि की सुरक्षा में किस प्रकार सहायक है ? 1. NBA जैव-चोरी की जाँच करता है और स्वदेशी व पारंपरिक आनुवंशिक संसाधनों की रक्षा करता है। 2. NBA फसली पौधों के आनुवंशिक रूपांतरण संबंधी वैज्ञानिक अनुसंधान की सीधे निगरानी व पर्यवेक्षण करता है। 3. आनुवंशिक/जैविक संसाधनों से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार के लिए आवेदन NBA की स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(c) केवल 1 और 3
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, वह शीर्ष निकाय जिसे उसी अधिनियम ने बनाया जिसमें 2023 में संशोधन हुआ — जैविक संसाधनों पर जैव-चोरी की जाँच और IPR आवेदनों के द्वारपाल के रूप में इसकी भूमिका।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 किस मूल विधि में संशोधन करता है ?
- (a)पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- (b)जैव विविधता अधिनियम, 2002
- (c)वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
- (d)वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
उत्तर(b) जैव विविधता अधिनियम, 2002 — वह विधि जिसने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना की।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जैव विविधता अधिनियम के अंतर्गत, पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर तैयार किए जाते हैं :
- (a)राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण
- (b)राज्य जैव विविधता बोर्ड
- (c)जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ
- (d)पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
उत्तर(c) जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ — यह स्थानीय-निकाय स्तर स्थानीय जैविक संसाधनों और संबंधित ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण करता है।