भारत में किसी राज्य को विशेष दर्जा देने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा पैरामीटर सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता है ?
- (a)पहाड़ी व कठिन भू-भाग
- (b)कम जनसंख्या घनत्व
- (c)अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी
- (d)अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ रणनीतिक स्थान
सही उत्तर — (c) 'अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी'। राष्ट्रीय विकास परिषद ने विशेष श्रेणी दर्जे (Special Category Status) के लिए 1969 में जिन पैरामीटरों को वास्तव में अपनाया, वे किसी बड़ी अनुपात में जनजातीय (Scheduled Tribe) आबादी की बात करते हैं — अनुसूचित जातियाँ कभी उस सूची का हिस्सा नहीं रहीं। स्वीकृत सेट है: (i) पहाड़ी व कठिन भू-भाग, (ii) कम जनसंख्या घनत्व और/अथवा बड़ी जनजातीय आबादी, (iii) पड़ोसी देशों की सीमाओं के साथ रणनीतिक स्थिति, (iv) आर्थिक व अवसंरचनात्मक पिछड़ापन, तथा (v) राज्य के वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति। विकल्प (a), (b) और (d) उसी सूची से सीधे लिए गए हैं; केवल (c) उसमें SC जोड़कर उसे बदल देता है, अतः यही असंगत विकल्प है।
- (a)पहाड़ी व कठिन भू-भाग — यह एक वास्तविक मानदंड है — यह स्वीकृत सूची का पहला पैरामीटर है, और वही कारण है जिससे हर उत्तर-पूर्वी राज्य के साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड योग्य ठहरे।
- (b)कम जनसंख्या घनत्व — यह एक वास्तविक मानदंड है — 'कम जनसंख्या घनत्व और/अथवा बड़ी जनजातीय आबादी का अनुपात' एक ही स्वीकृत पैरामीटर है। कई अभ्यर्थी घनत्व को इसलिए गलती से खारिज कर देते हैं क्योंकि यह वित्तीय के बजाय भूगोल का तथ्य लगता है।
- (d)अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ रणनीतिक स्थान — यह एक वास्तविक मानदंड है — चीन, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल या पाकिस्तान से लगे राज्य ठीक इसी रणनीतिक-स्थिति आधार पर योग्य ठहरे।
विशेष श्रेणी दर्जा (SCS) एक प्रशासनिक श्रेणी थी, संवैधानिक नहीं। इसे 1969 में राष्ट्रीय विकास परिषद ने, पाँचवें वित्त आयोग के दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, संरचनात्मक रूप से विकलांग राज्यों को अधिक उदार केन्द्रीय योजना सहायता देने के लिए बनाया था। गाडगिल (बाद में गाडगिल–मुखर्जी) फॉर्मूले के अंतर्गत, SCS राज्यों को 90% अनुदान : 10% ऋण के मिश्रण में केन्द्रीय योजना सहायता मिलती थी, जो सामान्य श्रेणी राज्यों के लिए कहीं कम अनुकूल अनुदान-ऋण अनुपात के विपरीत था, साथ ही कुल योजना-पूल में एक वरीयता प्राप्त हिस्सा भी।
यह प्रश्न 'छेड़छाड़ किए गए मद को पहचानो' प्रकार का है। तीन विकल्प आधिकारिक पैरामीटरों को शब्दशः दोहराते हैं; चौथा चुपके से 'जनजातीय आबादी' को 'अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आबादी' से बदल देता है। जिन विद्यार्थियों ने सूची को ढीले ढंग से याद किया है, वे प्रायः (b) कम जनसंख्या घनत्व को काट देते हैं — जो वास्तव में एक वास्तविक पैरामीटर है — और (c) में SC के जोड़े जाने को चूक जाते हैं।
- विशेष श्रेणी दर्जा राष्ट्रीय विकास परिषद (1969) द्वारा दिया गया — संविधान में इसका कहीं उल्लेख नहीं है।
- स्वीकृत पैरामीटर: पहाड़ी/कठिन भू-भाग; कम जनसंख्या घनत्व और/अथवा बड़ी जनजातीय आबादी; अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ रणनीतिक स्थिति; आर्थिक व अवसंरचनात्मक पिछड़ापन; राज्य के वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति।
- ग्यारह राज्यों को यह दर्जा प्राप्त था — आठ उत्तर-पूर्वी राज्य, साथ ही हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड और तत्कालीन जम्मू व कश्मीर राज्य।
- SCS राज्यों को गाडगिल–मुखर्जी फॉर्मूले के अंतर्गत केन्द्रीय योजना सहायता अधिकांशतः ऋण के बजाय अनुदान (90:10) के रूप में मिलती थी, साथ ही योजना-पूल में वरीयता प्राप्त हिस्सा।
- चौदहवें वित्त आयोग (2015–20) ने अंतरण में विशेष/सामान्य श्रेणी का कोई भेद नहीं रखा और राज्यों का विभाज्य पूल में हिस्सा बढ़ाकर 42% किया; योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग आने से SCS लाभों का पुराना योजना-सहायता मार्ग समाप्त हो गया।
NDC के 1969 के मानदंडों में अनुसूचित जातियों का कहीं उल्लेख नहीं — यही एक शब्द विकल्प (c) को उत्तर बनाता है।
- 'कम जनसंख्या घनत्व' को काट देना — यह जनजातीय आबादी के साथ जुड़ा एक वास्तविक पैरामीटर है।
- यह मानना कि SCS संवैधानिक है या कोई वित्त आयोग इसे प्रदान करता है — यह NDC का निर्णय था।
- SCS को अनुच्छेद 370/371 के विशेष प्रावधानों या पाँचवीं/छठी अनुसूची के दर्जे से भ्रमित करना।
MPPSC और UPSC दोनों 'कौन-सा मानदंड नहीं है' प्रारूप का प्रयोग करते हैं, या इसे वित्त आयोग के अंतरण मानदंडों से जोड़ते हैं — अतः पाँचों NDC पैरामीटर सटीक रूप से सीखें, और ध्यान रखें कि उनमें ST, न कि SC, आता है।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए : 1. जनसांख्यिकीय निष्पादन 2. वन और पारिस्थितिकी 3. शासन सुधार 4. स्थिर सरकार 5. कर व राजकोषीय प्रयास क्षैतिज कर अंतरण के लिए, पंद्रहवें वित्त आयोग ने जनसंख्या, क्षेत्रफल और आय दूरी के अतिरिक्त उपर्युक्त में से कितने मानदंडों का प्रयोग किया ?
- (a) केवल दो
- (b) केवल तीन
- (c) केवल चार
- (d) सभी पाँच
उत्तर(b) केवल तीन — जनसांख्यिकीय निष्पादन, वन व पारिस्थितिकी, तथा कर व राजकोषीय प्रयास
उसी विषय पर वही कौशल — राज्यों को केन्द्रीय अंतरण के लिए आधिकारिक रूप से मान्य पैरामीटरों को प्रशंसनीय-से-दिखने वाले किन्तु अस्वीकृत पैरामीटरों से अलग करना।
निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन करते हैं ? 1. प्रधानमंत्री 2. वित्त आयोग के अध्यक्ष 3. संघीय मंत्रिमंडल के मंत्री 4. राज्यों के मुख्यमंत्री नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a) 1, 2 और 3 केवल
- (b) 1, 3 और 4 केवल
- (c) 2 और 4 केवल
- (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर(b) 1, 3 और 4 केवल — प्रधानमंत्री, संघीय मंत्रिमंडल के मंत्री और मुख्यमंत्री; वित्त आयोग के अध्यक्ष सदस्य नहीं हैं
राष्ट्रीय विकास परिषद ठीक वही निकाय है जिसने 1969 में विशेष श्रेणी दर्जा बनाया और प्रदान किया — UPSC ने इसकी संरचना परखी, MPPSC ने इसके मानदंड।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय राज्यों को विशेष श्रेणी दर्जा किस निकाय द्वारा दिया गया ?
- (a)राष्ट्रीय विकास परिषद
- (b)वित्त आयोग
- (c)अन्तर-राज्य परिषद
- (d)अनुच्छेद 371 के अंतर्गत राष्ट्रपति
उत्तर(a) राष्ट्रीय विकास परिषद — इसने 1969 में यह दर्जा आरम्भ किया; इसके लिए कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
गाडगिल फॉर्मूले का उपयोग किसे निर्धारित करने के लिए किया गया ?
- (a)राज्यों के मध्य केन्द्रीय करों का अंतरण
- (b)राज्यों को केन्द्रीय योजना सहायता का आबंटन
- (c)अनुच्छेद 275 के अंतर्गत सहायता-अनुदान
- (d)अन्तर-राज्यीय नदी जल का बँटवारा
उत्तर(b) राज्यों को केन्द्रीय योजना सहायता का आबंटन — 1969 में NDC द्वारा अपनाया गया और 1991 में गाडगिल–मुखर्जी फॉर्मूले के रूप में संशोधित।