टूरिया जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व किसने किया ?
- (a)ठाकुर मोहकम सिंह
- (b)रामू गोंड
- (c)गंजन सिंह कोरकू
- (d)मूका लोहार
सही उत्तर — (d) मूका लोहार। आयोग की उत्तर-कुंजी सिवनी ज़िले के टूरिया में जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व करने का श्रेय मूका लोहार को देती है। जंगल सत्याग्रह, 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन का सेंट्रल प्रॉविंसेस (मध्य प्रांत) का अपना रूप था: जहाँ तट पर नमक कानून तोड़ा गया, वहीं वन-ग्रामों ने वन कानून तोड़ा — आरक्षित वनों के भीतर घास काटना, लकड़ी काटना व मवेशी चराना, जिनसे औपनिवेशिक वन नियमों ने उन्हें वंचित कर रखा था — और इन विरोधों का सामना पुलिस बल से किया गया।
- (a)ठाकुर मोहकम सिंह — यह टूरिया के लिए अभिलिखित नाम नहीं है। मध्यप्रदेश के स्वतंत्रता-संग्राम अध्याय में कई 'ठाकुर' उपाधि वाले नेता हैं, और प्रश्नपत्र यहाँ उनमें से एक को चारे के रूप में प्रयोग करता है।
- (b)रामू गोंड — एक जंगल सत्याग्रह के लिए यह विश्वसनीय-सा लगने वाला जनजातीय नाम है, परंतु यह वह नेता नहीं है जिसे आयोग की उत्तर-कुंजी टूरिया की घटना से जोड़ती है।
- (c)गंजन सिंह कोरकू — गंजन सिंह कोरकू को उसी 1930 की लहर के दौरान बैतूल ज़िला क्षेत्र (घोरा डोंगरी आंदोलन) के जंगल सत्याग्रह के विवरणों में स्मरण किया जाता है — यह टूरिया से भिन्न स्थल है, और यही इस विकल्प का जाल है।
औपनिवेशिक वन कानून — भारतीय वन अधिनियम 1878 और फिर 1927 — ने वनों को आरक्षित, संरक्षित व ग्राम श्रेणियों में विभाजित किया और प्रथागत उपयोग (चराई, ईंधन-लकड़ी, लघु वनोपज, स्थानांतरी कृषि) को दंडनीय अपराध बना दिया। जब कांग्रेस ने 1930 में सविनय अवज्ञा का आह्वान किया, तो सेंट्रल प्रॉविंसेस व मध्य भारत के वन-आश्रित समुदायों ने इसे अपने ढंग से व्यक्त किया: वन विभाग की खुली अवज्ञा में घास व लकड़ी काटने के लिए आरक्षित वनों में सामूहिक प्रवेश। यही जंगल सत्याग्रह हैं, और सिवनी ज़िले का टूरिया इनके स्थलों में से एक है।
आयोग यह नहीं पूछता कि 'जंगल सत्याग्रह क्या था' — वह पूछता है कि किसका नेतृत्व किसने किया, इसलिए नामों को स्थानों के साथ जोड़कर स्मृति में रखना होगा: सिवनी का टूरिया, और उसी वर्ष का बैतूल-ज़िला आंदोलन। विकल्प-समूह पर भी तर्क करें: यह वन-समुदायों द्वारा किया गया वन-कानून विरोध है, इसलिए उत्तर हमेशा किसी उपाधिधारी भू-स्वामी के बजाय एक स्थानीय, गैर-अभिजात्य नाम ही होने वाला था। नाम से परे, बड़े चाप को याद रखें — 1927 के अधिनियम द्वारा समाप्त किए गए अधिकार वही अधिकार हैं जिन्हें 2006 के वन अधिकार अधिनियम ने बहाल करने का प्रयास किया।
- जंगल सत्याग्रह — औपनिवेशिक वन कानून की अवज्ञा (आरक्षित वनों में घास काटना, लकड़ी काटना, चराई) 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के स्थानीय रूप के तौर पर
- टूरिया मध्यप्रदेश के सिवनी ज़िले में, पेंच नदी के आस-पास सतपुड़ा पठार की सागौन-वन पट्टी में स्थित है
- औपनिवेशिक ढाँचा भारतीय वन अधिनियम, 1927 (1878 के अधिनियम के बाद) था, जिसने वनों को आरक्षित, संरक्षित व ग्राम वनों में वर्गीकृत किया
- बैतूल ज़िले में भी उसी 1930 की लहर में जंगल सत्याग्रह हुआ, जो गंजन सिंह कोरकू से संबद्ध है
- अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 स्वतंत्रता के बाद ठीक उसी शिकायत का उत्तर है जिसे इन सत्याग्रहों ने उठाया था

- गलत नेता को गलत स्थल से जोड़ना — टूरिया (सिवनी) व बैतूल-ज़िला सत्याग्रह एक ही वर्ष के हैं परंतु भिन्न नामों के
- जंगल सत्याग्रह को कांग्रेस कार्यक्रम से असंबद्ध विशुद्ध जनजातीय आंदोलन मान लेना — यह 1930 में सविनय अवज्ञा की स्थानीय अभिव्यक्ति थी
- भारतीय वन अधिनियम, 1927 (औपनिवेशिक नियंत्रण) को वन अधिकार अधिनियम, 2006 (अधिकारों की बहाली) के साथ भ्रमित करना
MPPSC पूछता है कि किसी नामित सत्याग्रह का नेतृत्व किसने किया, या यह कहाँ व कब हुआ; UPSC इसका वैचारिक रूप पूछता है — जनजातीय आंदोलन किसका प्रतिरोध कर रहे थे, या आज कौन-सा कानून वन निवासियों के अधिकारों को मान्यता देता है।
भारत के इतिहास के संदर्भ में, "उलगुलान" अथवा महाविद्रोह निम्नलिखित में से किस घटना का वर्णन है ?
- (a) 1857 का विद्रोह
- (b) 1921 का मोपला विद्रोह
- (c) 1859-60 का नील विद्रोह
- (d) 1899-1900 का बिरसा मुंडा का विद्रोह
उत्तर(d) 1899-1900 का बिरसा मुंडा का विद्रोह
राष्ट्रीय स्तर पर वही विचार — औपनिवेशिक भूमि-व-वन व्यवस्था के विरुद्ध एक नामित जनजातीय-नेतृत्व वाला आंदोलन, जिसकी परीक्षा आंदोलन को उसके नेता से जोड़कर ली जाती है।
जनजातीय नेता सीताराम कँवर और रघुनाथ सिंह मंडलोई ने किस वर्ष हुए अंग्रेज़-विरोधी विद्रोह में भाग लिया था?
- (a) 1842 ई.
- (b) 1857 ई.
- (c) 1927 ई.
- (d) 1942 ई.
उत्तर(b) 1857 ई.
वही आवर्ती विषय — मध्य प्रदेश के जनजातीय नेताओं को उनके अंग्रेज़-विरोधी कार्य से मिलाना, जो 1930 के संदर्भ में तुरिया प्रश्न भी पूछता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सेंट्रल प्रॉविंसेस में 1930 के 'जंगल सत्याग्रह' मुख्यतः किसके विरुद्ध निर्देशित थे :
- (a)नमक कर
- (b)औपनिवेशिक वन कानून जो वनों के प्रथागत उपयोग को प्रतिबंधित करते थे
- (c)स्थायी बंदोबस्त
- (d)रॉलेट अधिनियम
उत्तर(b) औपनिवेशिक वन कानून — सत्याग्रहियों ने वन नियमों के जान-बूझकर उल्लंघन में घास व लकड़ी काटने के लिए आरक्षित वनों में प्रवेश किया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत, वन अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया आरंभ करने वाला प्राधिकरण है :
- (a)राज्य वन विभाग
- (b)ज़िला कलेक्टर
- (c)ग्राम सभा
- (d)जनजातीय कार्य मंत्रालय
उत्तर(c) ग्राम सभा — यह वन अधिकारों की प्रकृति व विस्तार के निर्धारण की प्रक्रिया आरंभ करती है।