शंकर राव पंडित का सम्बन्ध किस विधा से था ?
- (a)सितार वादन
- (b)मृदंग वादन
- (c)ख्याल गायकी
- (d)कत्थक नृत्य
सही उत्तर — (c) ख्याल गायकी। पण्डित शंकर राव पंडित (1863–1949) हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक प्रमुख गायक तथा ग्वालियर घराने के एक स्तम्भ थे — जिसे परम्परा से सबसे प्राचीन ख्याल घराना माना जाता है, जिससे अधिकांश परवर्ती घराने निकले। उन्होंने बालकृष्णबुवा इचलकरंजीकर (जिन्होंने ग्वालियर घराने की ख्याल परम्परा को महाराष्ट्र तक पहुँचाया) से शिक्षा प्राप्त की, और उनके अपने पुत्र, कृष्णराव शंकर पंडित, आगे चलकर ग्वालियर घराने के 20वीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध ख्याल गायकों में से एक बने।
- (a)सितार वादन — सितार एक तंत्री वाद्य है जो हिन्दुस्तानी वाद्य-संगीत (जैसे मैहर/इमदादखानी परम्पराएँ) का केन्द्रीय भाग है — यह शंकर राव पंडित की विधा नहीं है, जो गायन थी।
- (b)मृदंग वादन — मृदंगम/मृदंग एक ताल-वाद्य है (मुख्यतः कर्नाटक संगीत का, जिसका हिन्दुस्तानी समकक्ष पखावज है) — यह भी एक वाद्य-परम्परा है, जो पंडित की गायन-आधारित ख्याल साधना से असम्बद्ध है।
- (d)कत्थक नृत्य — कत्थक उत्तर भारत का एक शास्त्रीय नृत्य रूप है (जिसके अपने लखनऊ, जयपुर तथा बनारस घराने हैं) — यह गायन-आधारित ख्याल संगीत से भिन्न एक प्रदर्शन-कला धारा है।
ख्याल उत्तर भारतीय (हिन्दुस्तानी) शास्त्रीय गायन-संगीत की प्रमुख विधा है, जो एक निश्चित बोल-समूह के इर्द-गिर्द निर्मित होती है और किसी राग के अन्तर्गत विलम्बित (धीमी) व द्रुत (तेज़) तात्कालिक विस्तार से विकसित होती है। ग्वालियर घराने को ख्याल घरानों में सबसे प्राचीन माना जाता है तथा वह उभयनिष्ठ मूल है जिससे परवर्ती घराने (आगरा, किराना, पटियाला, जयपुर-अतरौली) निकले।
MPPSC को ग्वालियर-घराने की कम-ज्ञात हस्तियों को नाम व विधा के आधार पर परखना पसन्द है — यहाँ तीनों ग़लत विकल्प हिन्दुस्तानी प्रदर्शन-कलाओं की अन्य व्यापक श्रेणियों (एक तंत्री वाद्य, एक ताल-वाद्य, तथा एक नृत्य-रूप) को समेटते हैं, ताकि जिस विद्यार्थी को केवल अस्पष्ट रूप से 'शास्त्रीय संगीत, ग्वालियर' याद हो, वह भी ग़लत श्रेणी की ओर खिंच सके।
- शंकर राव पंडित (1863–1949) ग्वालियर घराने के एक ख्याल गायक थे।
- उन्होंने बालकृष्णबुवा इचलकरंजीकर से शिक्षा प्राप्त की, जिन्हें ग्वालियर घराने की ख्याल शैली को महाराष्ट्र तक पहुँचाने का श्रेय दिया जाता है।
- उनके पुत्र, कृष्णराव शंकर पंडित, 20वीं शताब्दी के एक प्रमुख ग्वालियर-घराना ख्याल गायक बने तथा उन्होंने 1914 में ग्वालियर में शंकर गन्धर्व महाविद्यालय की स्थापना की।
- ग्वालियर घराना हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सबसे प्राचीन ख्याल घराना माना जाता है।
शंकर राव पंडित एक गायक थे, न कि वादक या नर्तक — ग्वालियर घराने के एक ख्याल प्रवर्तक।
- किसी वाद्य विकल्प (सितार/मृदंग) को इसलिए चुन लेना कि 'शास्त्रीय संगीत' को स्वतः वाद्य-संगीत मान लिया जाए
- शंकर राव पंडित (पिता, 1863–1949) को उनके पुत्र कृष्णराव शंकर पंडित के साथ भ्रमित कर देना — दोनों ग्वालियर-घराना ख्याल गायक हैं
MPPSC मध्यप्रदेश से जुड़े शास्त्रीय संगीतकारों (जिनमें से अनेक ग्वालियर घराने से सम्बद्ध हैं) को यह पूछकर परखता है कि वे किस विधा/वाद्य के लिए जाने जाते हैं — विकल्प चुनने से पहले सदैव गायन (ख्याल/ध्रुपद/ठुमरी) को वाद्य (सितार/सरोद) से तथा नृत्य (कत्थक) से अलग कर लें।
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए: सूची I — I. पण्डित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर, II. वेंकटमाखी, III. श्यामा शास्त्री, IV. अमीर खुसरो; सूची II — A. भारतीय संगीत के राग-वर्गीकरण की योजना प्रस्तुत की, B. कर्नाटक संगीत के प्रवर्तक, C. हिन्दुस्तानी संगीत की ख्याल विधा के प्रवर्तक, D. 'वन्दे मातरम्' गीत का संगीत रचा
- (a) I-D, II-A, III-C, IV-B
- (b) I-D, II-A, III-B, IV-C
- (c) I-A, II-D, III-C, IV-B
- (d) I-A, II-D, III-B, IV-C
उत्तर(b) I-D, II-A, III-B, IV-C
समान अवधारणा — किसी हस्ती का हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की ख्याल विधा से सम्बन्ध पहचानना (वहाँ, अमीर खुसरो को इस शैली के पारम्परिक प्रवर्तक के रूप में; यहाँ, शंकर राव पंडित को एक ग्वालियर-घराना प्रतिपादक के रूप में)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
ग्वालियर घराना, जिसे हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सबसे प्राचीन घराना माना जाता है, मुख्यतः किस गायन विधा से सम्बद्ध है?
- (a)ख्याल
- (b)ग़ज़ल
- (c)क़व्वाली
- (d)भजन
उत्तर(a) ख्याल।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कृष्णराव शंकर पंडित, शंकर राव पंडित के पुत्र व शिष्य, ने 1914 में ग्वालियर में किस संस्था की स्थापना की?
- (a)शंकर गन्धर्व महाविद्यालय
- (b)गन्धर्व महाविद्यालय, मुम्बई
- (c)भातखण्डे संगीत विद्यापीठ
- (d)प्रयाग संगीत समिति
उत्तर(a) शंकर गन्धर्व महाविद्यालय।