स्वतन्त्रता सेनानी रघुनाथ सिंह मण्डलोई _______ से सम्बन्धित हैं ।
- (a)भारिया जनजाति
- (b)भिलाला जनजाति
- (c)कोरकू जनजाति
- (d)बैगा जनजाति
सही उत्तर — (B), भिलाला जनजाति। रघुनाथ सिंह मण्डलोई निमाड़-मालवा क्षेत्र (वर्तमान बड़वानी/धार के आसपास) के एक भिलाला जनजातीय नेता थे, जिन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेज़ों से संघर्ष किया — 30 सितंबर 1858 को बालमुकुंद की पुलिस चौकी पर कब्जा किया तथा 18 अक्तूबर 1858 को जामुनी के पुलिस थाने को जलाया, साथी जनजातीय विद्रोहियों जैसे टंट्या भील, भीमा नायक, खजिया नायक तथा सीताराम कँवर के साथ। उनका उपनाम 'मण्डलोई' स्वयं बहुत कुछ बता देता है: यह निमाड़ क्षेत्र में भिलाला ग्राम मुखिया की परंपरागत वंशानुगत उपाधि है, जो उनकी भिलाला पहचान के अनुरूप है।
- (a)भारिया जनजाति — छिंदवाड़ा जिले की पातालकोट घाटी तक सीमित एक छोटा PVTG — निमाड़-क्षेत्र की भिलाला/मण्डलोई वंशावली से भौगोलिक एवं सांस्कृतिक रूप से असंबद्ध।
- (c)कोरकू जनजाति — बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर एवं हरदा की एक मुंडा (आस्ट्रो-एशियाई भाषा-परिवार) जनजाति — भाषायी एवं सांस्कृतिक रूप से भिलाला से भिन्न।
- (d)बैगा जनजाति — पूर्व-मध्य मध्यप्रदेश की डिंडौरी-मंडला-बालाघाट पट्टी का एक PVTG — निमाड़-आधारित भिलाला से भिन्न जनजाति।
भिलाला मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र (खरगौन, बड़वानी, धार) का एक मिश्रित भील-राजपूत समुदाय है, जिसके बारे में परंपरागत रूप से समझा जाता है कि यह राजपूत बसने वालों/सरदारों तथा स्थानीय भील आबादी के बीच वैवाहिक संबंधों से बना। 'मण्डलोई' इस क्षेत्र में भिलाला ग्राम मुखिया की वंशानुगत उपाधि है, जिसे आज भी अनेक भिलाला परिवार उपनाम के रूप में धारण करते हैं। रघुनाथ सिंह मण्डलोई सहित कई भिलाला नेताओं ने 1857 के विद्रोह के दौरान निमाड़-मालवा क्षेत्र में अंग्रेज़ों के विरुद्ध हथियार उठाए, टंट्या भील एवं भीमा नायक जैसे अधिक प्रसिद्ध जनजातीय विद्रोहियों के साथ।
MPPSC प्रायः किसी कम-ज्ञात स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी की जनजातीय संबद्धता को उनके उपनाम या उपाधि के माध्यम से परखता है — 'मण्डलोई' को भिलाला-संकेतक के रूप में पहचानना एक उपयोगी संकेत है, यद्यपि इसे अकेले भरोसा करने के बजाय पुष्ट तथ्यों के साथ मिलाकर उपयोग किया जाना चाहिए।
- भिलाला — मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र (खरगौन, बड़वानी, धार) का एक मिश्रित भील-राजपूत जनजातीय समुदाय।
- 'मण्डलोई' निमाड़ में भिलाला ग्राम मुखिया की परंपरागत वंशानुगत उपाधि है, जो सामान्यतः उपनाम के रूप में धारण की जाती है।
- रघुनाथ सिंह मण्डलोई ने 1857 के विद्रोह के दौरान निमाड़-मालवा क्षेत्र में अंग्रेज़ों से संघर्ष किया, साथी जनजातीय नेताओं टंट्या भील, भीमा नायक, खजिया नायक तथा सीताराम कँवर के साथ।
- अनेक भिलाला परिवार अपनी वंशावली उन राजपूत बसने वालों से जोड़ने का दावा करते हैं जिन्होंने स्थानीय भील सरदार परिवारों से गठबंधन किया या विवाह किया।
- भील एवं भिलाला को एक ही समुदाय मान लेना — वे भूभाग साझा करते हैं किंतु मानवशास्त्रीय दृष्टि से भिन्न हैं (भिलाला में दावा किया गया राजपूत मिश्रण तथा 'मण्डलोई' मुखिया उपाधि है)
- यह मान लेना कि निमाड़-क्षेत्र का कोई भी उपनाम स्वतः भिलाला के बजाय भील से जुड़ा है — विशिष्ट उपाधि या वंश-संकेतक की जाँच करें
MPPSC नियमित रूप से किसी विशिष्ट, स्थानीय रूप से स्मरणीय स्वतंत्रता सेनानी का नाम लेता है और उनके जनजातीय समुदाय के बारे में पूछता है — यह एक राज्य-सामान्य ज्ञान स्मरण मद है जो 'मण्डलोई' जैसी क्षेत्रीय उपाधियों को पहचानने का प्रतिफल देती है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भिलाला जनजाति में ग्राम मुखिया की वंशानुगत उपाधि 'मण्डलोई' मध्यप्रदेश के किस क्षेत्र से सर्वाधिक संबद्ध है ?
- (a)निमाड़
- (b)बस्तर
- (c)बुंदेलखंड
- (d)बघेलखंड
उत्तर(a) निमाड़।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मध्यप्रदेश की निम्नलिखित में से कौन-सी जनजाति के बारे में परंपरागत रूप से समझा जाता है कि यह राजपूत बसने वालों तथा भील समुदाय के बीच अंतर्विवाह से बनी ?
- (a)गोंड
- (b)भिलाला
- (c)कोरकू
- (d)कोल
उत्तर(b) भिलाला।