पारिस्थितिकी-तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह निम्न से उच्च पोषण (ट्रॉफिक) स्तर पर जाने से कम होता है । इसे निम्नलिखित द्वारा समझा जा सकता है :
- (a)ऊष्मागतिकी (थर्मोडायनेमिक्स) के प्रथम नियम द्वारा
- (b)ऊष्मागतिकी (थर्मोडायनेमिक्स) के द्वितीय नियम द्वारा
- (c)न्यूटन के द्वितीय नियम द्वारा
- (d)न्यूटन के तृतीय नियम द्वारा
सही उत्तर — (b) ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम द्वारा। किसी पारिस्थितिकी-तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है, और कोई भी ऊर्जा रूपांतरण कभी 100% कुशल नहीं होता: प्रत्येक पोषण-स्तर स्थानांतरण पर, ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा मुख्यतः श्वसन के माध्यम से ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है, बजाय उपयोगी जैवभार (बायोमास) के रूप में आगे बढ़ने के। निम्न से उच्च पोषण स्तर तक प्रवाह में यह क्रमिक कमी — जिसे यहाँ परखा जा रहा है — ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम (एन्ट्रॉपी बढ़ती है; कुछ ऊर्जा हमेशा अनुपयोगी ऊष्मा के रूप में क्षय होती है) का प्रत्यक्ष परिणाम है।
- (a)ऊष्मागतिकी (थर्मोडायनेमिक्स) के प्रथम नियम द्वारा — प्रथम नियम (ऊर्जा संरक्षण) केवल यह कहता है कि कुल ऊर्जा न तो बनाई जाती है न नष्ट होती है — यह समग्र ऊर्जा संतुलन को समझाता है, न कि यह कि प्रत्येक पोषण-स्तर स्थानांतरण पर विशेष रूप से उपयोगी ऊर्जा ही क्यों घटती है; वह कमी द्वितीय-नियम (एन्ट्रॉपी/ऊष्मा-हानि) की घटना है।
- (c)न्यूटन के द्वितीय नियम द्वारा — न्यूटन का द्वितीय नियम (F = ma) यांत्रिकी में बल, द्रव्यमान और त्वरण से संबंधित है — पारिस्थितिकी-तंत्र में ऊर्जा स्थानांतरण दक्षता से इसका कोई संबंध नहीं है।
- (d)न्यूटन के तृतीय नियम द्वारा — न्यूटन का तृतीय नियम परस्पर क्रिया करने वाले पिंडों के बीच बराबर-व-विपरीत युग्मित बलों का वर्णन करता है — पोषण-स्तरीय ऊर्जा प्रवाह से अप्रासंगिक।
किसी पारिस्थितिकी-तंत्र में ऊर्जा केवल एक ही दिशा में — उत्पादकों से क्रमिक उपभोक्ता स्तरों तक — प्रवाहित होती है, और कभी पूर्णतः आगे नहीं बढ़ती: प्रत्येक पोषण-स्तर स्थानांतरण पर एक बड़ा अंश (सामान्यतः लगभग 80-90% बताया जाता है) मुख्यतः श्वसन के माध्यम से ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है, इसलिए अगले स्तर पर केवल एक छोटा-सा भाग ही नया जैवभार बनता है। उपयोगी ऊर्जा की यह चरणबद्ध हानि ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है: कोई भी ऊर्जा-रूपांतरण पूर्णतः कुशल नहीं होता, और कुछ ऊर्जा हमेशा ऊष्मा के रूप में क्षय हो जाती है, बजाय जैविक कार्य हेतु उपलब्ध रहने के।
यहाँ जाल प्रथम नियम को चुनना है क्योंकि यह 'ऊर्जा से संबंधित सामान्य नियम' जैसा लगता है। प्रथम नियम केवल यह सुनिश्चित करता है कि कुल ऊर्जा कहीं-न-कहीं (ऊष्मा, जैवभार आदि के रूप में) संरक्षित रहती है; यह प्रत्येक चरण पर उपयोगी ऊर्जा में हुई कमी के बारे में कुछ नहीं कहता — वह विशिष्ट कमी वही है जिसे द्वितीय नियम समझाता है।
- पोषण स्तरों के बीच ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय होता है, उत्पादकों से ऊपर की ओर, और कभी पूर्णतः कुशल नहीं होता
- प्रत्येक पोषण-स्तर स्थानांतरण पर ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा ऊष्मा के रूप में (मुख्यतः श्वसन के माध्यम से) नष्ट होता है
- प्रत्येक चरण में उपयोगी ऊर्जा में होने वाली कमी ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम (एन्ट्रॉपी) का अनुसरण करती है
- यह अवधारणा प्रायः 'दस प्रतिशत नियम' के रूप में संक्षेपित पारिस्थितिक दक्षता की अवधारणा का आधार है
- उत्पादक — प्रकाश-संश्लेषण द्वारा स्थिर ऊर्जा
- प्राथमिक उपभोक्ता — अधिकांश ऊर्जा ऊष्मा (श्वसन) के रूप में नष्ट
- द्वितीयक उपभोक्ता — ऊर्जा और घटती है
- तृतीयक उपभोक्ता — सबसे कम ऊर्जा उपलब्ध
प्रत्येक स्थानांतरण पर, ऊर्जा आगे बढ़ने के बजाय ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है — यह ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम का एक अनुप्रयोग है।
- प्रथम नियम (ऊर्जा संरक्षण) को द्वितीय नियम (उपयोगी ऊर्जा क्यों घटती है) के साथ भ्रमित करना
- यह मान लेना कि ऊर्जा से जुड़ा कोई भी 'नियम' विकल्प बिना यह जाँचे सही होगा कि विशेष रूप से कौन-सा नियम इस कमी को समझाता है
MPPSC/UPSC अक्सर खाद्य शृंखलाओं में ऊर्जा-प्रवाह की कमी के ऊष्मागतिकीय आधार का परीक्षण करते हैं, या विद्यार्थियों से सीधे 'दस प्रतिशत नियम' / पारिस्थितिक दक्षता की पहचान कराते हैं।
किसी पारिस्थितिकी-तंत्र में एक पोषण स्तर से दूसरे स्तर पर स्थानांतरण के दौरान ऊर्जा की मात्रा (a) बढ़ती है (b) घटती है (c) स्थिर रहती है (d) बढ़ या घट सकती है
- (a) बढ़ती है
- (b) घटती है
- (c) स्थिर रहती है
- (d) बढ़ या घट सकती है
उत्तर(b) घटती है — वही सुस्थापित पारिस्थितिक-ऊर्जा-प्रवाह तथ्य; ध्यान दें कि स्टोर में इस स्टेट-PCS प्रश्न के लिए कोई सत्यापित correct_answer उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह मानक पाठ्यपुस्तक तथ्य को दर्शाता है, न कि किसी स्टोर-पुष्ट उत्तर-कुंजी को।
वही मूल तथ्य — पोषण स्तरों के बीच स्थानांतरित ऊर्जा प्रत्येक चरण पर घटती है — बिना ऊष्मागतिकीय नियम का नाम लिए, अधिक सीधे ढंग से पूछा गया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
पारिस्थितिकी में 'दस प्रतिशत नियम', जो बताता है कि एक पोषण स्तर से अगले स्तर तक केवल लगभग दस प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है, किस भौतिक नियम के अनुरूप है?
- (a)न्यूटन का प्रथम नियम
- (b)ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम
- (c)द्रव्यमान संरक्षण का नियम
- (d)हार्डी-वाइनबर्ग नियम
उत्तर(b) ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम — प्रत्येक स्थानांतरण पर अधिकांश ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है, जिससे अगले स्तर पर केवल एक छोटा-सा भाग ही उपयोगी बचता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
खाद्य शृंखला में, पोषण स्तरों के बीच खोई गई ऊर्जा का प्रमुख हिस्सा मुख्यतः किस रूप में क्षय होता है?
- (a)प्रकाश
- (b)ऊष्मा (श्वसन के माध्यम से)
- (c)ध्वनि
- (d)गति की गतिज ऊर्जा
उत्तर(b) ऊष्मा, श्वसन के माध्यम से — यही श्वसन-जनित हानि इसका कारण है कि उच्चतर पोषण स्तर पर उपयोगी ऊर्जा घट जाती है।