निम्नलिखित में से किस अरब लेखक ने कलचुरी शासक गांगेयदेव एवं उसकी राजधानी त्रिपुरी का विवरण दिया था ?
- (a)अल-बहरी
- (b)अल-मसूदी
- (c)अल-बरूनी
- (d)इब्न बतूता
सही उत्तर — (C) अल-बरूनी। अल-बरूनी (973–1048), ख्वारज़्म का बहुज्ञ विद्वान, जो महमूद गज़नवी के अभियानों के दौर से जुड़ा था और भारत में एक दशक से अधिक समय तक रहा, ने 'किताब-उल-हिन्द' (तहक़ीक़-ए-हिन्द) लिखी — भारतीय समाज, विज्ञान व भूगोल पर 11वीं सदी का विवरण। इसमें उसने समकालीन कलचुरी शासक गांगेयदेव को दाहल देश के शासक के रूप में वर्णित किया है तथा उसकी राजधानी त्रिपुरी (वर्तमान जबलपुर के निकट) का नाम दिया है।
- (a)अल-बहरी — यह इस काल का कोई मान्यताप्राप्त अरब इतिहासकार नहीं है — गांगेयदेव या त्रिपुरी के किसी विवरण का श्रेय इस नाम को नहीं दिया जाता।
- (b)अल-मसूदी — अल-मसूदी (मृत्यु 956 ई.) ने 10वीं सदी के आरंभ में भारत की यात्रा की थी — यह गांगेयदेव के शासनकाल (लगभग 1015–1041) के आरंभ से भी लगभग एक शताब्दी पहले की बात है, इसलिए वह उसका वर्णन नहीं कर सकता था।
- (d)इब्न बतूता — इब्न बतूता 14वीं सदी का मोरक्कन यात्री था, जिसने मुहम्मद बिन तुगलक़ के समय भारत की यात्रा की — गांगेयदेव के शासनकाल के तीन शताब्दी बाद, वर्णन देने के लिए बहुत देर से।
अल-बरूनी ख्वारज़्म का बहुज्ञ विद्वान था, जो सुल्तान महमूद गज़नवी के दरबारी घेरे से जुड़ा था, जिसने भारत में एक दशक से अधिक समय तक रहकर संस्कृत, खगोलशास्त्र व समाज का अध्ययन किया और 'किताब-उल-हिन्द' (तहक़ीक़-ए-हिन्द) लिखी — भारत का 11वीं सदी का नृजातीय विवरण। इसमें उसने कई समकालीन क्षेत्रीय शासकों का वर्णन किया है, जिनमें दाहल (चेदि) देश का कलचुरी शासक गांगेयदेव भी शामिल है।
जाल यह है कि बिना शताब्दी जाँचे किसी भी 'प्रसिद्ध अरब यात्री/लेखक' को चुन लिया जाए — केवल गांगेयदेव के 11वीं सदी के शासनकाल का समकालीन इतिहासकार ही उसका वर्णन कर सकता था; पहले (अल-मसूदी) या बहुत बाद (इब्न बतूता) के यात्री कालक्रम की दृष्टि से बाहर हो जाते हैं।
- अल-बरूनी महमूद गज़नवी के दौर में भारत में लगभग एक दशक से अधिक समय (लगभग 1017–1030 ई.) तक रहा, और उसने किताब-उल-हिन्द (तहक़ीक़-ए-हिन्द) लिखी।
- गांगेयदेव (शासनकाल लगभग 1015–1041) त्रिपुरी (चेदि/दाहल देश) का सबसे शक्तिशाली कलचुरी शासक था, जो वर्तमान मध्य प्रदेश के जबलपुर के निकट स्थित था।
- गांगेयदेव ने एक विशिष्ट स्वर्ण मुद्रा (बैठी हुई देवी लक्ष्मी प्रकार) जारी की, जिसका उत्तर भारत में व्यापक रूप से अनुकरण किया गया।
- अल-मसूदी (मृत्यु 956 ई.) और इब्न बतूता (14वीं सदी) दोनों ही गांगेयदेव के शासनकाल से बाहर पड़ते हैं — एक बहुत पहले, दूसरा बहुत बाद में।
- अल-मसूदी (10वीं सदी, बहुत पहले) को अल-बरूनी (11वीं सदी, गांगेयदेव का समकालीन) से भ्रमित करना
- इब्न बतूता (तुगलक़ काल का 14वीं सदी का यात्री) को पहले के अरब/मध्य एशियाई इतिहासकारों से भ्रमित करना
MPPSC और UPSC दोनों प्रायः 'शासक/स्थान X का वर्णन किसने दिया' विदेशी इतिहासकारों की सूची में से पूछते हैं — प्रत्येक नाम को उस शताब्दी व राजवंश से जोड़ें जिसका वह वास्तव में समकालीन था।
निम्नलिखित विदेशी यात्रियों पर विचार कीजिए और उन्हें आरोही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए: 1. इत्सिंग 2. अल-बरूनी 3. ह्वेनसांग (हुएन-त्सांग) 4. फाह्यान (फा-ह्यान) नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
- (a) 1, 2, 3, 4
- (b) 4, 3, 1, 2
- (c) 2, 1, 4, 3
- (d) 3, 4, 2, 1
उत्तर(b) 4, 3, 1, 2 — फाह्यान (5वीं सदी) → ह्वेनसांग (7वीं सदी) → इत्सिंग (7वीं सदी) → अल-बरूनी (11वीं सदी), आरोही कालानुक्रमिक क्रम में।
वही इतिहासकार, अल-बरूनी — UPPSC 2024 भारत के प्रमुख विदेशी यात्रियों/लेखकों में उसके सही कालानुक्रमिक स्थान की परीक्षा लेता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अल-बरूनी का भारतीय समाज, विज्ञान व भूगोल पर आधारित प्रसिद्ध 11वीं सदी का विवरण किस नाम से जाना जाता है ?
- (a)किताब-उल-हिन्द (तहक़ीक़-ए-हिन्द)
- (b)राजतरंगिणी
- (c)आइन-ए-अकबरी
- (d)तबक़ात-ए-नासिरी
उत्तर(A) किताब-उल-हिन्द (तहक़ीक़-ए-हिन्द) — अल-बरूनी का भारत संबंधी नृजातीय विवरण, जो उसके भारत में बिताए वर्षों के बाद लिखा गया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
त्रिपुरी के कलचुरी, जिनकी राजधानी वर्तमान जबलपुर के निकट थी, किस वैकल्पिक क्षेत्रीय नाम से भी जाने जाते हैं ?
- (a)चेदि (दाहल)
- (b)कल्याणी के चालुक्य
- (c)मालवा के परमार
- (d)जेजाकभुक्ति के चंदेल
उत्तर(A) चेदि (दाहल) — वह क्षेत्र/राजवंश नाम जिसके अंतर्गत त्रिपुरी के कलचुरी, जिनमें गांगेयदेव शामिल है, शासन करते थे।