भारत में लौह अयस्क के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
- (a)हमारे देश में मुख्यतः हेमेटाइट एवं मैग्नेटाइट लौह अयस्क के भण्डार हैं ।
- (b)देश के लौह अयस्क के कुल संचित भण्डार का लगभग 80% झारखंड एवं ओडिशा में हैं ।
- (c)कर्नाटक राज्य में बेल्लारी लौह अयस्क का प्रमुख खनन क्षेत्र है ।
- (d)मयूरभंज जिले का लौह अयस्क में ओडिशा में महत्त्वपूर्ण स्थान है ।
सही उत्तर — (B) ही वह कथन है जो सही नहीं है। ओडिशा व झारखंड वास्तव में भारत के दो अग्रणी लौह-अयस्क राज्य हैं, परन्तु यह दावा करना कि अकेले इन्हीं दोनों के पास राष्ट्रीय कुल का लगभग 80% है, उनके संयुक्त हिस्से को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है — यह परिमाण तभी पहुँचता है जब छत्तीसगढ़ व कर्नाटक को भी साथ गिना जाए। दावे की दिशा (ओडिशा/झारखंड आगे हैं) सही है; परिमाण (केवल इन दोनों से 80%) अतिरंजित है, जो इस कथन को गलत बनाता है।
- (a)हमारे देश में मुख्यतः हेमेटाइट एवं मैग्नेटाइट लौह अयस्क के भण्डार हैं । — यह कथन सही है — भारत में लौह अयस्क मुख्यतः हेमेटाइट व मैग्नेटाइट के रूप में मिलता है, अतः इसे 'सही नहीं' के रूप में चुनना ग़लत होगा।
- (c)कर्नाटक राज्य में बेल्लारी लौह अयस्क का प्रमुख खनन क्षेत्र है । — यह कथन सही है — कर्नाटक की बेल्लारी-होस्पेट पट्टी एक सुविख्यात लौह-अयस्क खनन क्षेत्र है, अतः इसे 'सही नहीं' के रूप में चुनना ग़लत होगा।
- (d)मयूरभंज जिले का लौह अयस्क में ओडिशा में महत्त्वपूर्ण स्थान है । — यह कथन सही है — मयूरभंज (जैसे गुरुमहिसानी व बदामपहाड़ खदानें) ओडिशा का एक प्रमुख लौह-अयस्क धारक ज़िला है, अतः इसे 'सही नहीं' के रूप में चुनना ग़लत होगा।
भारत का लौह अयस्क ओडिशा-झारखंड-छत्तीसगढ़-कर्नाटक पट्टी में संकेंद्रित है, जो मुख्यतः हेमेटाइट व मैग्नेटाइट के रूप में मिलता है। ओडिशा (मयूरभंज, सुंदरगढ़ व केओंझर जैसे ज़िले) व झारखंड सबसे बड़े भण्डार-धारक राज्य हैं, परन्तु राष्ट्रीय भण्डार का सामान्यतः उद्धृत लगभग 80% हिस्सा तभी पहुँचता है जब छत्तीसगढ़ व कर्नाटक को भी ओडिशा व झारखंड के साथ जोड़ा जाए — अकेले इन दो राज्यों से नहीं।
खनिजों पर MPPSC के 'कौन-सा कथन सही नहीं है' प्रकार के प्रश्न सामान्यतः प्रत्येक तथ्य की दिशा (नामित स्थान व राज्य वास्तव में महत्त्वपूर्ण हैं) को सही रखते हैं, परन्तु एक संख्या या दायरे को विकृत करते हैं — यहाँ, कई-राज्यों के हिस्से को केवल दो राज्यों पर आरोपित करके। नामित स्थानों के वास्तविक होने की जाँच के अलावा प्रतिशत व दायरे के दावों को ध्यान से पढ़ें।
- भारत में लौह अयस्क मुख्यतः हेमेटाइट व मैग्नेटाइट के रूप में मिलता है।
- ओडिशा व झारखंड अग्रणी लौह-अयस्क राज्य हैं, परन्तु अकेले इनका संयुक्त हिस्सा राष्ट्रीय कुल का लगभग 80% नहीं है — यह आँकड़ा तभी पहुँचता है जब छत्तीसगढ़ व कर्नाटक को भी शामिल किया जाए।
- बेल्लारी (कर्नाटक) एक सुविख्यात लौह-अयस्क खनन पट्टी है (बेल्लारी-होस्पेट पट्टी)।
- मयूरभंज ओडिशा का एक महत्त्वपूर्ण लौह-अयस्क धारक ज़िला है।
- किसी बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए प्रतिशत दावे को केवल इसलिए सत्य मान लेना क्योंकि नामित राज्य वास्तव में अग्रणी हैं
- हेमेटाइट (भारत का मुख्य अयस्क, मुख्यतः ओडिशा/झारखंड/छत्तीसगढ़) को मैग्नेटाइट (जो कर्नाटक के कुद्रेमुख जैसी जगहों में भी मिलता है) के साथ भ्रमित करना
MPPSC/UPSC लौह अयस्क को 'कौन-सा कथन सही है/नहीं है', खनन कस्बों को राज्यों से मिलाने (बेल्लारी, मयूरभंज, कुद्रेमुख), या राज्यों की लौह-अयस्क भण्डार/उत्पादन रैंकिंग की तुलना के ज़रिए परखते हैं।
मध्यप्रदेश में लौह अयस्क के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- (a) मध्यप्रदेश लौह अयस्क के उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है।
- (b) हेमेटाइट भण्डार जबलपुर ज़िले के उत्तर-पूर्वी भाग में हैं।
- (c) इन भण्डारों में अभ्रक व सिलिका की मात्रा अधिक है।
- (d) छत्तीसगढ़ राज्य के पृथक्करण के बाद लौह-अयस्क भण्डार कम हो गए हैं।
उत्तर(a) मध्यप्रदेश लौह-अयस्क उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर नहीं है — MP के हेमेटाइट भण्डार के बारे में अन्य तीन कथन सही हैं।
वही MPPSC 2022 पेपर, वही 'लौह अयस्क कथन — कौन-सा सही नहीं है' प्रारूप, परन्तु यहाँ पूछे गए राष्ट्रीय ओडिशा-झारखंड चित्र की बजाय मध्यप्रदेश-विशिष्ट तथ्यों को परखता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मैग्नेटाइट भण्डार के लिए प्रसिद्ध कुद्रेमुख लौह-अयस्क खदानें किस राज्य में स्थित हैं?
- (a)ओडिशा
- (b)कर्नाटक
- (c)छत्तीसगढ़
- (d)झारखंड
उत्तर(b) कर्नाटक — कुद्रेमुख खदानें एक सुविख्यात मैग्नेटाइट स्रोत हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा ज़िला ओडिशा का एक प्रमुख लौह-अयस्क धारक ज़िला है?
- (a)मयूरभंज
- (b)गंजाम
- (c)पुरी
- (d)बालासोर
उत्तर(a) मयूरभंज — गुरुमहिसानी व बदामपहाड़ जैसी सुविख्यात लौह-अयस्क खदानों का घर।