राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण कीजिए : (i) मानव अधिकार आयोग, मानव अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है । (ii) आयोग का काम मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान करना भी है । निम्नलिखित में से उत्तर दीजिए ।
- (a)कथन (i) सत्य है ।
- (b)कथन (ii) सत्य है ।
- (c)कथन (i) कथन (ii) की सही व्याख्या करता है ।
- (d)दोनों कथन (i) और (ii) सत्य हैं ।
सही उत्तर — (C) और (D) (दोनों को मान्यता दी गई)। कथन (ii) — कि NHRC मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान भी करता है — मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12(छ) के अंतर्गत आयोग का एक वास्तविक कार्य है, और कथन (i) — कि आयोग मानवाधिकार क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) व संस्थाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित करता है — भी उसी धारा के अंतर्गत एक वास्तविक कार्य है। चूँकि दोनों कथन स्वतंत्र रूप से सत्य हैं, इसलिए विकल्प (d) स्पष्टतः सही है। विकल्प (c), जो कथन (i) को कथन (ii) की 'सही व्याख्या' के रूप में प्रस्तुत करता है, को भी आधिकारिक उत्तर कुंजी में श्रेय दिया गया — यद्यपि, कड़ाई से देखें तो, दोनों कथन NHRC के दो अलग-अलग कार्यों (नागरिक-समाज के प्रयासों को प्रोत्साहित करना और आयोग का अपना अनुसंधान करना) का वर्णन करते हैं, न कि किसी वास्तविक कारण-व्याख्या युग्म का — इस अन्यथा मानक 'कौन-से कथन सत्य हैं' प्रारूप में (c) को दिया गया ग्रेस-क्रेडिट संभवतः इसी अस्पष्टता को दर्शाता है।
- (a)कथन (i) सत्य है। — अधूरा — कथन (i) वास्तव में सत्य है, परंतु कथन (ii) भी सत्य है; केवल एक को चुनना सही उत्तर को कम आँकता है।
- (b)कथन (ii) सत्य है। — अधूरा — कथन (ii) वास्तव में सत्य है, परंतु कथन (i) भी सत्य है; केवल एक को चुनना सही उत्तर को कम आँकता है।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के पास धारा 12 के अंतर्गत एक व्यापक सांविधिक जनादेश है, जो केवल शिकायतों की जाँच से कहीं आगे जाता है — यह मानवाधिकारों से संबंधित संधियों व विधिक सुरक्षोपायों की समीक्षा भी करता है, मानवाधिकार साक्षरता को बढ़ावा देता है, इस क्षेत्र में कार्यरत NGOs व संस्थाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित करता है, तथा मानवाधिकार पर अनुसंधान करता व बढ़ावा देता है।
MPPSC प्रायः कई वास्तविक-किंतु-अलग NHRC कार्यों को 'कथन' के रूप में सूचीबद्ध कर पूछता है कि कौन-से सत्य हैं — यहाँ जाल यह मान लेना है कि केवल एक ही कार्य सही हो सकता है, जबकि अधिनियम आयोग को एक व्यापक, बहु-आयामी जनादेश प्रदान करता है।
- NHRC के धारा 12 के कार्यों में शामिल हैं: शिकायतों की जाँच (स्वप्रेरणा से या याचिका पर), संवैधानिक/विधिक सुरक्षोपायों की समीक्षा, मानवाधिकार क्षेत्र में कार्यरत NGOs को प्रोत्साहित करना, मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना, तथा मानवाधिकार साक्षरता फैलाना
- NHRC के अध्यक्ष का भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना अनिवार्य है
- NHRC की सिफारिशें सरकार के लिए अनुशंसात्मक हैं, बाध्यकारी नहीं
- NHRC मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत एक सांविधिक निकाय है — संवैधानिक निकाय नहीं
- यह मान लेना कि NHRC की भूमिका केवल शिकायत-जाँच तक सीमित है और इसके अनुसंधान/शिक्षा/NGO-प्रोत्साहन कार्यों को नज़रअंदाज़ करना
- NHRC की सिफारिशों को सरकार के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी मान लेना
MPPSC प्रायः NHRC के 2-3 वास्तविक कार्यों को अलग-अलग कथन के रूप में सूचीबद्ध कर पूछता है कि कौन-से सत्य हैं — सुरक्षित तरीका यह है कि केवल जाँच को ही महत्व न देकर धारा 12 की पूरी सूची जानी जाए।
कथन: भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) मानवाधिकारों की रक्षा व संवर्धन हेतु उत्तरदायी है, जिन्हें अधिनियम द्वारा जीवन, स्वतंत्रता, समानता व व्यक्ति की गरिमा से संबंधित उन अधिकारों के रूप में परिभाषित किया गया है जो संविधान द्वारा गारंटीकृत हैं या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित हैं। तर्क I: मानवाधिकार उल्लंघन पर, NHRC स्वयं अथवा किसी पीड़ित द्वारा दायर याचिका पर जाँच आरंभ कर सकता है। तर्क II: NHRC मानवाधिकार मुद्दों पर अनुसंधान को बढ़ावा देता है व करता है। कौन-सा/से तर्क सशक्त है/हैं?
- (a) तर्क I सशक्त है
- (b) तर्क II सशक्त है
- (c) तर्क I और II सशक्त हैं
- (d) न तो तर्क I और न ही II सशक्त है
उत्तर(c) तर्क I और II सशक्त हैं — दोनों ही मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत वास्तविक NHRC कार्य हैं: स्वप्रेरणा/याचिका-आधारित जाँच, तथा मानवाधिकार मुद्दों पर अनुसंधान को बढ़ावा देना व करना।
एक वर्ष पहले परखा गया वही मूल तथ्य — कि NHRC का जनादेश शिकायत-आधारित जाँच व अनुसंधान दोनों को कवर करता है, केवल एक को नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन-सा NHRC का कार्य नहीं है?
- (a)मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जाँच करना
- (b)मानवाधिकार हेतु संविधान के अंतर्गत सुरक्षोपायों की समीक्षा करना
- (c)सिविल न्यायालय की डिक्री की तरह सीधे प्रवर्तनीय क्षतिपूर्ति प्रदान करना
- (d)मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना
उत्तर(c) NHRC के निष्कर्ष व सिफारिशें अनुशंसात्मक हैं, सिविल न्यायालय की डिक्री की तरह सीधे प्रवर्तनीय नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को निम्नलिखित में से कौन-सा पद धारण किया होना आवश्यक है?
- (a)उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- (b)भारत के मुख्य न्यायाधीश
- (c)भारत के महान्यायवादी
- (d)मुख्य निर्वाचन आयुक्त
उत्तर(b) भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, जैसा कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में अपेक्षित है।