निम्नलिखित में से कौन-सा संविधान संशोधन पहला संवैधानिक संशोधन था, जिसे संविधान के अनुच्छेद 368 (2) के परन्तुक की अपेक्षाओं के अनुरूप राज्य विधानमण्डलों द्वारा अनुसमर्थित किया गया ?
- (a)प्रथम संविधान संशोधन, 1951
- (b)द्वितीय संविधान संशोधन, 1952
- (c)तृतीय संविधान संशोधन, 1954
- (d)चतुर्थ संविधान संशोधन, 1954
सही उत्तर — (c) तृतीय संविधान संशोधन अधिनियम, 1954। इसने समवर्ती सूची (सूची III, सप्तम अनुसूची) की प्रविष्टि 33 को पुनः अधिनियमित किया ताकि खाद्यान्न, कच्ची कपास, कच्चा जूट और पशु-चारा जैसी आवश्यक वस्तुओं के व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण पर संघ/राज्य की शक्ति व्यापक हो सके। चूँकि इसने सप्तम अनुसूची की किसी सूची की प्रविष्टि में परिवर्तन किया — जो अनुच्छेद 368(2) के परन्तुक के तहत संरक्षित श्रेणियों में से एक है — इसलिए इसे कई राज्य विधानमंडलों से अनुसमर्थन की आवश्यकता हुई और अभिलेखों के अनुसार यह प्राप्त भी हुआ, जिससे यह उस मार्ग से वास्तव में पारित होने वाला पहला संशोधन बना।
- (a)प्रथम संविधान संशोधन, 1951 — मुख्यतः वाक्-स्वातंत्र्य के आधारों (अनुच्छेद 19) को सीमित किया और भूमि-सुधार कानूनों के लिए नौवीं अनुसूची जोड़ी — इसने सप्तम अनुसूची की किसी सूची या अनुच्छेद 368(2)-परन्तुक की किसी अन्य श्रेणी को नहीं छुआ, अतः इसमें कोई राज्य अनुसमर्थन शामिल नहीं था।
- (b)द्वितीय संविधान संशोधन, 1952 — 1951 की जनगणना के बाद संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की ऊपरी जनसंख्या-सीमा हटाने हेतु अनुच्छेद 81(1)(ख) में संशोधन किया — यह एक तंत्र-संबंधी परिवर्तन है; यह वह संशोधन नहीं माना जाता जिसे अनुच्छेद 368(2) के परन्तुक के तहत पहली बार राज्यों द्वारा अनुसमर्थित किया गया।
- (d)चतुर्थ संविधान संशोधन, 1954 — तृतीय संशोधन के बाद आया और मुख्यतः संपत्ति-प्रतिकर संबंधी मामलों (अनुच्छेद 31) से जुड़ा था — यह राज्य-अनुसमर्थन मार्ग से पहला संशोधन नहीं माना जाता।
अनुच्छेद 368(2) का परन्तुक कुछ 'संघीय' उपबंधों को अलग करता है — जैसे राष्ट्रपति का निर्वाचन, संघ/राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालय संबंधी उपबंध, विधायी शक्तियों का वितरण, सप्तम अनुसूची की कोई सूची, तथा संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व — जहाँ किसी संविधान संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत के साथ-साथ कम-से-कम आधे राज्य विधानमंडलों का अनुसमर्थन आवश्यक होता है, क्योंकि ये उपबंध संघीय ढांचे को ही स्पर्श करते हैं।
अधिकांश साधारण संशोधन (जैसे प्रथम, जिसने केवल मूल अधिकारों की सीमाओं को पुनः गढ़ा) को केवल संसदीय विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। जाल यह मान लेने में है कि राज्य-अनुसमर्थन हर संशोधन पर लागू होता है, या संख्या के अनुसार 'पहला' या 'सबसे पुराना' संशोधन चुन लेने में है, बजाय उस पहले संशोधन के जिसने वास्तव में अनुसमर्थन परन्तुक को सक्रिय किया।
- अनुच्छेद 368(2) परन्तुक: सूचीबद्ध संघीय उपबंधों (जैसे सप्तम अनुसूची की कोई सूची, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, उच्चतम/उच्च न्यायालय संबंधी उपबंध, अनुच्छेद 368 स्वयं) को छूने वाले संशोधनों के लिए कम-से-कम आधे राज्य विधानमंडलों का अनुसमर्थन आवश्यक
- तृतीय संशोधन अधिनियम, 1954 ने समवर्ती सूची (सूची III) की प्रविष्टि 33 को पुनः अधिनियमित किया, जो आवश्यक-वस्तु व्यापार एवं उत्पादन से संबंधित है
- परन्तुक की सूचीबद्ध श्रेणियों से बाहर के साधारण संशोधनों को केवल संसदीय विशेष बहुमत चाहिए, कोई राज्य अनुसमर्थन नहीं
केवल वे संशोधन जो अनुच्छेद 368(2)-परन्तुक की किसी श्रेणी (जैसे सप्तम अनुसूची की कोई सूची) को छूते हैं, राज्य-विधानमंडल अनुसमर्थन को प्रेरित करते हैं।
- यह मान लेना कि हर प्रारंभिक संशोधन को राज्य-अनुसमर्थन चाहिए था
- 'समग्र रूप से पहला संशोधन' (1951) को 'परन्तुक के तहत पहला अनुसमर्थित संशोधन' (तृतीय, 1954) के साथ भ्रमित करना
सामान्यतः किसी विशिष्ट संशोधन/अनुच्छेद का नाम लेकर पूछा जाता है कि क्या उसे राज्य-विधानमंडल अनुसमर्थन की आवश्यकता थी, या परन्तुक किन श्रेणियों के उपबंधों को कवर करता है।
निम्नलिखित में से किन मामलों में संविधान संशोधन केवल कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन से ही संभव है? I. राष्ट्रपति का निर्वाचन II. संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व III. सप्तम अनुसूची की कोई भी सूची IV. किसी राज्य की विधान परिषद का उन्मूलन नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- (a) I, II और III
- (b) I, II और IV
- (c) I, III और IV
- (d) II, III और IV
उत्तर(a) I, II और III — राष्ट्रपति का निर्वाचन, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, और सप्तम अनुसूची की कोई भी सूची सभी अनुच्छेद 368(2) के परन्तुक के तहत आते हैं; किसी राज्य की विधान परिषद का उन्मूलन (अनुच्छेद 169) नहीं आता।
समान अवधारणा — संविधान संशोधन की किन श्रेणियों के लिए अनुच्छेद 368(2) के तहत राज्य-विधानमंडल अनुसमर्थन आवश्यक है।
संविधान का कोई संशोधन कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थित किया जाना अपेक्षित होगा:
- (a) यदि ऐसा संशोधन अनुच्छेद 53 में परिवर्तन करना चाहता है।
- (b) यदि ऐसा संशोधन अनुच्छेद 239 क में परिवर्तन करना चाहता है।
- (c) यदि ऐसा संशोधन अनुच्छेद 243 क में परिवर्तन करना चाहता है।
- (d) यदि ऐसा संशोधन अनुच्छेद 279 क में परिवर्तन करना चाहता है।
उत्तर(d) अनुच्छेद 279 क (जीएसटी परिषद संबंधी उपबंध) — एमपीपीएससी की स्वयं की आधिकारिक कुंजी के अनुसार।
वही अनुच्छेद 368(2) राज्य-अनुसमर्थन परन्तुक अवधारणा, तीन वर्ष बाद एमपीपीएससी द्वारा सीधे पूछी गई।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 368(2) के परन्तुक के तहत, निम्नलिखित में से किसे प्रभावित करने वाले संशोधन के लिए कम-से-कम आधे राज्य विधानमंडलों के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है?
- (a)अनुच्छेद 19 के तहत मूल अधिकार
- (b)सप्तम अनुसूची की कोई भी सूची
- (c)केवल प्रस्तावना
- (d)राज्य के नीति निदेशक तत्व
उत्तर(b) सप्तम अनुसूची की कोई भी सूची — अनुच्छेद 368(2) परन्तुक के तहत संरक्षित श्रेणियों में से एक।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 279 क (जीएसटी परिषद) को बदलने के उद्देश्य से किया गया संविधान संशोधन किसकी अपेक्षा रखेगा?
- (a)संसद में केवल साधारण बहुमत
- (b)संसद में केवल विशेष बहुमत
- (c)संसद में विशेष बहुमत के साथ-साथ कम-से-कम आधे राज्य विधानमंडलों का अनुसमर्थन
- (d)कोई संसदीय प्रक्रिया आवश्यक नहीं
उत्तर(c) संसद में विशेष बहुमत के साथ-साथ कम-से-कम आधे राज्य विधानमंडलों का अनुसमर्थन।