सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के अन्तर्गत निम्नलिखित में से कौन जुर्माना लगा सकता है ?
- (a)केवल केन्द्रीय सूचना आयोग
- (b)केवल राज्य सूचना आयोग
- (c)केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग
- (d)उच्च न्यायालय या केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग
सही उत्तर — (c) केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग। RTI अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) सूचना आयोग — केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरणों हेतु CIC, या राज्य सार्वजनिक प्राधिकरणों हेतु संबंधित SIC — को उस लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना लगाने का अधिकार देती है जिसने बिना उचित कारण अनुरोध अस्वीकार किया, निर्धारित समय से देर की, दुर्भावनापूर्वक अस्वीकार किया, अधूरी/गलत/भ्रामक जानकारी दी, या अनुरोधित जानकारी नष्ट कर दी।
- (a)केवल केन्द्रीय सूचना आयोग — अधूरा। यह इस बात को नज़रअंदाज़ करता है कि राज्य सूचना आयोग के पास राज्य सार्वजनिक प्राधिकरणों के PIO पर वही धारा 20 जुर्माना शक्ति है।
- (b)केवल राज्य सूचना आयोग — अधूरा। यह इस बात को नज़रअंदाज़ करता है कि केंद्रीय सूचना आयोग के पास केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरणों के PIO पर वही शक्ति है।
- (d)उच्च न्यायालय या केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग — गलत — इस प्रशासनिक जुर्माने में न्यायालयों की कोई भूमिका नहीं है; धारा 20 यह शक्ति केवल दो सूचना आयोगों में निहित करती है।
RTI अधिनियम की धारा 20 चूककर्ता PIO के विरुद्ध जवाबदेही तंत्र है, जो किसी अस्वीकृति के विरुद्ध नागरिक के अपील के अधिकार से भिन्न है। यह केवल सूचना आयोगों — केंद्रीय या राज्य, जो भी संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण पर अधिकार क्षेत्र रखता हो — को PIO पर निर्दिष्ट चूकों के लिए, एक विधिक दैनिक सीमा तक, जुर्माना लगाने की शक्ति देती है।
MPPSC/UPSC यह परखती हैं कि क्या जुर्माने की शक्ति आयोग (न कि न्यायालय) के पास है, और क्या केंद्रीय व राज्य दोनों आयोगों के पास अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में यह शक्ति है — केवल एक के पास नहीं।
- RTI अधिनियम की धारा 20(1) CIC या संबंधित SIC को PIO पर अनुचित अस्वीकार/देरी, दुर्भावनापूर्ण अस्वीकृति, या गलत/अधूरी जानकारी के लिए जुर्माना लगाने की शक्ति देती है
- जुर्माना विलंब के प्रत्येक दिन के लिए ₹250, अधिकतम ₹25,000 तक
- आयोग धारा 20(2) के अंतर्गत PIO के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकता है
- इस जुर्माने को लगाने में न्यायालयों की कोई भूमिका नहीं है — यह पूर्णतः सूचना आयोग की शक्ति है
- PIO अस्वीकार/देरी/दुर्भावनापूर्ण अस्वीकृति करता है या गलत जानकारी देता है
- नागरिक की दूसरी अपील सूचना आयोग तक पहुँचती है
- केन्द्रीय सूचना आयोग (केंद्रीय PIO के लिए) या राज्य सूचना आयोग (राज्य PIO के लिए)
- जुर्माना: विलंब के प्रत्येक दिन ₹250, ₹25,000 तक (धारा 20(1)); अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है (धारा 20(2))
धारा 20 की जुर्माना शक्ति केवल सूचना आयोग — केंद्रीय या राज्य, अधिकार क्षेत्र के अनुसार — के पास है, कभी न्यायालय के पास नहीं।
- यह मान लेना कि केवल CIC (न कि SIC) के पास जुर्माने की शक्ति है
- यह मानना कि न्यायालय/उच्च न्यायालय धारा 20 का जुर्माना लगाते हैं
MPPSC/UPSC आमतौर पर 'RTI के अंतर्गत X शक्ति किसके पास है' परखते हैं — अपेक्षा करें कि सही उत्तर एक की बजाय दोनों आयोगों को नाम दे।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
RTI अधिनियम, 2005 की धारा 20 के अंतर्गत सूचना आयोग किसी लोक सूचना अधिकारी पर अधिकतम कितना जुर्माना लगा सकता है ?
- (a)₹10,000
- (b)₹25,000
- (c)₹50,000
- (d)कोई ऊपरी सीमा नहीं
उत्तर(b) ₹25,000 — विलंब के प्रत्येक दिन ₹250 की दर से।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
RTI अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील सबसे पहले किसके समक्ष होती है ?
- (a)सीधे सूचना आयोग के समक्ष
- (b)प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (उसी सार्वजनिक प्राधिकरण में एक वरिष्ठ अधिकारी) के समक्ष
- (c)उच्च न्यायालय के समक्ष
- (d)राज्य सरकार के समक्ष
उत्तर(b) प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष — केवल दूसरी अपील सूचना आयोग के पास जाती है।