निम्न में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है ?
- (a)हरिशंकर परसाई - हंसते है रोते है, रानी नागफनी की कहानी
- (b)भवानी प्रसाद - गीत फरोश, सतपुड़ा के घने जंगल, हिमतरंगिनी
- (c)गजानन माधव मुक्तिबोध - चाँद का मुँह टेढ़ा है, काठ का सपना
- (d)केशवदास - रसिकप्रिया, कविप्रिया
सही उत्तर — (b) भवानी प्रसाद (भवानी प्रसाद मिश्र)। उनकी सूचीबद्ध दो रचनाएँ वास्तव में उनकी हैं — 'गीत फरोश' (उनका पहला कविता-संग्रह) और 'सतपुड़ा के घने जंगल' (उनकी अपनी मातृभूमि के सतपुड़ा जंगलों पर लिखी उनकी सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से एक) — लेकिन 'हिमतरंगिनी' उनकी रचना नहीं है। हिमतरंगिनी साहित्य अकादमी पुरस्कार (1955) विजेता कविता-संग्रह है माखनलाल चतुर्वेदी का, जो मध्यप्रदेश के ही एक अन्य प्रतिष्ठित हिंदी कवि हैं। चतुर्वेदी की पुस्तक को भवानी प्रसाद मिश्र के नाम से जोड़ना ही इस युग्म को गलत सुमेलित बनाता है।
- (a)हरिशंकर परसाई - हंसते है रोते है, रानी नागफनी की कहानी — यह जोड़ी सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं है — दोनों शीर्षक हरिशंकर परसाई, मध्यप्रदेश के हिंदी व्यंग्यकार, जो अपनी तीखी व्यंग्य रचनाओं के लिए जाने जाते हैं, की वास्तविक रचनाएँ हैं।
- (c)गजानन माधव मुक्तिबोध - चाँद का मुँह टेढ़ा है, काठ का सपना — यह जोड़ी सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं है — 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' (1964) मुक्तिबोध का महत्वपूर्ण कविता-संग्रह है और 'काठ का सपना' उनकी गद्य/कथा रचनाओं में से एक है; दोनों वास्तव में उनकी हैं।
- (d)केशवदास - रसिकप्रिया, कविप्रिया — यह जोड़ी सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं है — रसिकप्रिया (1591) और कविप्रिया (1601) केशवदास की हिंदी रीतिकाल शैली की बृजभाषा की मूल रचनाएँ हैं, रामचंद्रिका के साथ-साथ।
यह प्रश्न मध्यप्रदेश से जुड़े प्रमुख हिंदी साहित्यकारों और उनकी विशिष्ट रचनाओं की पहचान परखता है — हरिशंकर परसाई (व्यंग्य), भवानी प्रसाद मिश्र व माखनलाल चतुर्वेदी (गांधीवादी/राष्ट्रवादी-युग की कविता, दोनों होशंगाबाद जिले के मूल निवासी), गजानन माधव मुक्तिबोध (नई कविता/आधुनिकतावादी कविता), और केशवदास (ओरछा के मध्यकालीन रीतिकाल दरबारी कवि)।
गलत सुमेलित विकल्प जानबूझकर एक वास्तविक, सुप्रसिद्ध, पुरस्कार-विजेता पुस्तक (हिमतरंगिनी) को गलत कवि (भवानी प्रसाद मिश्र, उनके वास्तविक लेखक माखनलाल चतुर्वेदी की बजाय) से जोड़ता है — दोनों समान युग के वास्तविक, मध्यप्रदेश-संबद्ध हिंदी कवि हैं, जिससे यह अदला-बदली तब तक चूकना आसान है जब तक छात्र दोनों लेखकों की ग्रंथ-सूची सटीक रूप से न जानता हो।
- हरिशंकर परसाई: 'हंसते है रोते है', 'रानी नागफनी की कहानी' — हिंदी व्यंग्य
- भवानी प्रसाद मिश्र: 'गीत फरोश', 'सतपुड़ा के घने जंगल', 'बुनी हुई रस्सी' (साहित्य अकादमी पुरस्कार 1972) — 'हिमतरंगिनी' नहीं
- 'हिमतरंगिनी' (साहित्य अकादमी पुरस्कार 1955) भवानी प्रसाद मिश्र की नहीं, बल्कि माखनलाल चतुर्वेदी की रचना है
- गजानन माधव मुक्तिबोध: 'चाँद का मुँह टेढ़ा है', 'काठ का सपना' — आधुनिकतावादी हिंदी कविता/गद्य
- केशवदास: 'रसिकप्रिया', 'कविप्रिया' (साथ ही 'रामचंद्रिका') — ओरछा दरबार के रीतिकाल बृजभाषा कवि
- यह मान लेना कि किसी जोड़ी में हर शीर्षक उसी नामित लेखक की है क्योंकि दोनों समान रूप से संभावित मध्यप्रदेश-संबद्ध हिंदी लेखक लगते हैं
- भवानी प्रसाद मिश्र और माखनलाल चतुर्वेदी को आपस में मिलाना — दोनों होशंगाबाद जिले के, दोनों देशभक्ति/प्रकृति कविता से जुड़े
MPPSC के साहित्य प्रश्न अक्सर चार जोड़ियों में प्रति लेखक 2-3 रचनाएँ सूचीबद्ध करते हैं और पूछते हैं कौन-सी जोड़ी गलत है — गलती आमतौर पर पूर्णतः गढ़ी गई किताब की बजाय दो समान लेखकों के बीच अदला-बदली शीर्षक होती है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1955) विजेता कौन-सा हिंदी कविता-संग्रह माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित है ?
- (a)हिमतरंगिनी
- (b)गीत फरोश
- (c)कविप्रिया
- (d)चाँद का मुँह टेढ़ा है
उत्तर(a) हिमतरंगिनी — 1955 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मध्यप्रदेश के हिंदी व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई निम्नलिखित में से किस रचना के लेखक हैं ?
- (a)रसिकप्रिया
- (b)रानी नागफनी की कहानी
- (c)चाँद का मुँह टेढ़ा है
- (d)हिमतरंगिनी
उत्तर(b) रानी नागफनी की कहानी — हरिशंकर परसाई की एक प्रसिद्ध व्यंग्य रचना।