नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की छुट्टी मंजूर करने या नामंजूर करने की शक्ति निहित होगी
- (a)वित्तमंत्री में
- (b)राष्ट्रपति में
- (c)प्रधानमंत्री में
- (d)भारत के मुख्य न्यायाधीश में
सही उत्तर — (b) राष्ट्रपति। CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 148 के अंतर्गत की जाती है तथा इसे केवल उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को, ताकि देश का शीर्ष लेखापरीक्षक राजनीतिक कार्यपालिका से स्वतंत्र रहे। इसी सुरक्षा-दृष्टिकोण के अनुरूप, CAG से संबंधित व्यक्तिगत सेवा-मामले — जिसमें छुट्टी मंजूर या नामंजूर करना शामिल है — किसी एक मंत्री के बजाय राष्ट्रपति के पास ही रखे गए हैं, ताकि सरकार का कोई भी सदस्य, जिसका CAG लेखापरीक्षण करता है, छुट्टी स्वीकृतियों के माध्यम से CAG पर अनौपचारिक रूप से दबाव न डाल सके।
- (a)वित्तमंत्री में — वित्त मंत्रालय स्वयं उन निकायों में से एक है जिसका CAG लेखापरीक्षण करता है; इसे CAG की छुट्टी पर नियंत्रण देना स्वतंत्र लेखापरीक्षण के उद्देश्य को ही विफल कर देगा।
- (c)प्रधानमंत्री में — CAG की व्यक्तिगत सेवा-शर्तों में प्रधानमंत्री की कोई औपचारिक भूमिका नहीं है; यह भूमिका राष्ट्रपति के पास है।
- (d)भारत के मुख्य न्यायाधीश में — CAG पर CJI का कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं है; न्यायिक सुरक्षा-उपायों की समानता CAG के निष्कासन-सुरक्षा को कवर करती है, दैनिक छुट्टी प्रशासन को नहीं।
अनुच्छेद 148 CAG को सरकारी वित्त पर एक संवैधानिक निगरानीकर्ता बनाता है, तथा — सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से उधार ली गई निष्कासन-सुरक्षा की तरह — संविधान CAG के व्यक्तिगत सेवा-मामलों को नियमित मंत्रिस्तरीय नियंत्रण से दूर रखता है। CAG की छुट्टी मंजूर या नामंजूर करने की शक्ति वित्त मंत्रालय के बजाय राष्ट्रपति में निहित है, ठीक इसलिए क्योंकि CAG उसी मंत्रालय का लेखापरीक्षण करता है।
यह एक 'स्वतंत्रता-तर्क का अनुसरण करें' प्रश्न है: एक बार जब विद्यार्थी जान लेता है कि CAG का निष्कासन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है (अनुच्छेद 148(1)), तो वह यह तर्क कर सकता है कि अन्य व्यक्तिगत सेवा-मामले, जैसे छुट्टी, भी किसी मंत्री के बजाय सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति) के पास ही होंगे।
- CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 148 के अंतर्गत की जाती है
- CAG को केवल उसी तरीके व उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को
- CAG का वेतन व सेवा-शर्तें नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियाँ एवं सेवा-शर्तें) अधिनियम, 1971 द्वारा शासित हैं
- CAG की छुट्टी मंजूर या नामंजूर करना राष्ट्रपति में निहित शक्ति है, किसी मंत्री में नहीं, जो CAG की उस कार्यपालिका से स्वतंत्रता को सुदृढ़ करता है जिसका वह लेखापरीक्षण करता है

- यह मान लेना कि वित्तमंत्री — जिसका CAG लेखापरीक्षण करता है — CAG की छुट्टी या सेवा-शर्तों पर कोई कहना रखता है
- निष्कासन सुरक्षा-उपायों (सर्वोच्च-न्यायालय-न्यायाधीश-शैली) को नियमित सेवा-मामलों (राष्ट्रपति की शक्ति) जैसे छुट्टी से गड्डमड्ड करना
MPPSC CEC, CAG व PSC अध्यक्षों में 'संवैधानिक प्राधिकरण X पर प्रशासनिक शक्ति किसके पास है' जैसे प्रश्न परखता है — संघ-स्तरीय संवैधानिक पदों हेतु राष्ट्रपति एक आवर्ती उत्तर है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत की जाती है ?
- (a)अनुच्छेद 143
- (b)अनुच्छेद 148
- (c)अनुच्छेद 156
- (d)अनुच्छेद 165
उत्तर(b) अनुच्छेद 148 — राष्ट्रपति के हस्ताक्षर व मुहर सहित वारंट द्वारा।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का कर्तव्य नहीं है ?
- (a)भारत की संचित निधि से व्यय का लेखापरीक्षण करना
- (b)सरकारी व्यापारिक व विनिर्माण उपक्रमों के खातों का लेखापरीक्षण करना
- (c)राजकोष से सार्वजनिक धन की प्राप्ति व निर्गमन को नियंत्रित करना
- (d)आकस्मिकता निधि व लोक लेखा से व्यय का लेखापरीक्षण करना
उत्तर(c) सार्वजनिक धन की प्राप्ति व निर्गमन को नियंत्रित करना — यह एक कार्यपालिका/राजकोष कार्य है, CAG का नहीं।