संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत निम्नलिखित में से किसकी आवश्यकता है ?
- (a)राष्ट्रपति का आशय
- (b)राष्ट्रपति का समाधान
- (c)राष्ट्रपति का अनुदेश
- (d)राष्ट्रपति की सहमति
सही उत्तर — (a) राष्ट्रपति का आशय (intention)। अनुच्छेद 108(1) के अनुसार, यदि एक सदन द्वारा पारित कोई विधेयक दूसरे सदन द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाए, या सदन संशोधनों पर असहमत हों, या छह माह बीत जाने पर भी दूसरा सदन उस पर कोई कार्रवाई न करे, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों को संदेश द्वारा संयुक्त बैठक हेतु बुलाने के अपने 'आशय' की सूचना दे सकता है। यह अधिसूचित 'आशय' ही — न कि कोई 'समाधान', 'अनुदेश' या 'सहमति' — इस संवैधानिक प्रावधान को सक्रिय करने वाला कारक है।
- (b)राष्ट्रपति का समाधान — गलत शब्द — 'राष्ट्रपति का समाधान (satisfaction)' अन्य शक्तियों (जैसे अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल, अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन) के लिए प्रयुक्त भाषा है, अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक बुलाने के लिए नहीं।
- (c)राष्ट्रपति का अनुदेश — यह संवैधानिक भाषा नहीं है — राष्ट्रपति अपने 'आशय' की सूचना देता है; वह सदनों को संयुक्त बैठक आयोजित करने का 'अनुदेश (instruction)' नहीं देता।
- (d)राष्ट्रपति की सहमति — अनुच्छेद 108 के तहत यह प्रेरक कारक नहीं है — संयुक्त बैठक राष्ट्रपति द्वारा अपने आशय की सूचना देने से सक्रिय होती है, सदनों द्वारा प्रस्तावित किसी बात पर उसकी सहमति से नहीं।
अनुच्छेद 108 राष्ट्रपति को लोकसभा तथा राज्यसभा के बीच किसी साधारण विधेयक (धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक नहीं) पर विधायी गतिरोध को संयुक्त बैठक बुलाकर सुलझाने की शक्ति देता है। इसे सक्रिय करने वाला कारक सटीक शब्दों में परिभाषित है: एक सदन द्वारा विधेयक पारित कर दूसरे को भेजे जाने के बाद, यदि वह अस्वीकृत कर दिया जाए, या सदन संशोधनों पर सहमत न हो सकें, या छह माह से अधिक बीत जाने पर भी दूसरा सदन उसे पारित न करे, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों को संदेश द्वारा संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय की सूचना देता है। लोकसभा अध्यक्ष इसकी अध्यक्षता करता है, और मामला दोनों सदनों के उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से तय होता है।
परीक्षा का जाल सटीक शब्द में है: 'आशय (intention)', न कि 'समाधान (satisfaction)' (आपातकालीन-प्रकार की शक्तियों के लिए प्रयुक्त शब्द) या 'सहमति/अनुदेश' (यहाँ प्रयुक्त संवैधानिक शब्द ही नहीं हैं)। साथ ही याद रखें कि अनुच्छेद 108 धन विधेयकों या संविधान संशोधन विधेयकों पर लागू नहीं होता — केवल साधारण विधान पर।
- अनुच्छेद 108 — लोकसभा और राज्यसभा के बीच गतिरोध-समाधान तंत्र, केवल साधारण विधेयकों के लिए
- प्रेरक कारक: राष्ट्रपति संदेश द्वारा दोनों सदनों को संयुक्त बैठक बुलाने के अपने 'आशय' की सूचना देता है
- धन विधेयकों (अनुच्छेद 108 के परन्तुक) या संविधान संशोधन विधेयकों पर लागू नहीं होता
- लोकसभा अध्यक्ष संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है; दोनों सदनों के उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से निर्णय होता है
- एक सदन द्वारा पारित विधेयक दूसरे द्वारा अस्वीकृत / सदन संशोधनों पर असहमत / 6 माह बीतने पर भी कोई कार्रवाई नहीं
- राष्ट्रपति दोनों सदनों को संदेश द्वारा संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय की सूचना देता है (अनुच्छेद 108(1))
- सदन एक साथ मिलते हैं; लोकसभा अध्यक्ष अध्यक्षता करता है; दोनों सदनों के उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से निर्णय
यह राष्ट्रपति का अधिसूचित 'आशय' ही है — न कि उसका 'समाधान', 'अनुदेश' या 'सहमति' — जो अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक को सक्रिय करता है।
- 'आशय' के स्थान पर 'समाधान'/'सहमति'/'अनुदेश' रखना — प्रत्येक एक अलग राष्ट्रपति-शक्ति से जुड़ा विशिष्ट संवैधानिक शब्द है
- यह मान लेना कि धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक संयुक्त बैठक में जा सकते हैं — वे नहीं जा सकते
अक्सर एक 'कथनों पर विचार कीजिए' प्रश्न जो अनुच्छेद 108 को संयुक्त बैठक के इतिहास/पूर्वदृष्टांतों के साथ मिलाता है, या इस जैसा प्रत्यक्ष शब्द-स्मरण प्रश्न।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत स्वीकृत है। 2. लोकसभा व राज्यसभा की पहली संयुक्त बैठक वर्ष 1961 में आयोजित हुई थी। 3. भारतीय संसद के दोनों सदनों की दूसरी संयुक्त बैठक बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक पारित करने के लिए आयोजित हुई थी। इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- (a) 1 और 2
- (b) 2 और 3
- (c) 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(d) 1, 2 और 3 — अनुच्छेद 108 संयुक्त बैठक को स्वीकृति देता है; पहली बैठक 1961 में (दहेज प्रतिषेध विधेयक) तथा दूसरी 1978 में (बैंकिंग सेवा आयोग निरसन विधेयक) हुई।
वही संवैधानिक प्रावधान — अनुच्छेद 108 का संयुक्त-बैठक तंत्र — वहाँ इसके इतिहास/पूर्वदृष्टांतों के माध्यम से, यहाँ इसके प्रेरक शब्द के माध्यम से परखा गया।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के संदेश के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी अभिव्यक्ति उपयुक्त है?
- (a) राष्ट्रपति का आशय
- (b) राष्ट्रपति का निर्देश
- (c) राष्ट्रपति की बुद्धिमत्ता
- (d) राष्ट्रपति की सहमति
उत्तर(a) राष्ट्रपति का आशय — यह प्रश्न ठीक यही तथ्य परखता है, लगभग समान शब्दों में।
इसी प्रश्न की लगभग समरूप MPPSC पुनरावृत्ति — वही अनुच्छेद 108 शब्द-जाल, एक वर्ष पहले (और एक MPPSC चक्र पहले) पूछा गया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 108 के तहत बुलाई गई संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?
- (a)भारत के राष्ट्रपति
- (b)भारत के उपराष्ट्रपति
- (c)लोकसभा अध्यक्ष
- (d)राज्यसभा के उपसभापति
उत्तर(c) लोकसभा अध्यक्ष संयुक्त बैठक की प्रक्रिया-नियमों के अंतर्गत इसकी अध्यक्षता करता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक निम्नलिखित में से किस पर गतिरोध सुलझाने के लिए नहीं बुलाई जा सकती?
- (a)राज्यसभा द्वारा अस्वीकृत साधारण विधेयक
- (b)वह साधारण विधेयक जिस पर दोनों सदन संशोधनों पर असहमत हों
- (c)धन विधेयक
- (d)वह साधारण विधेयक जो दूसरे सदन में छह माह से अधिक समय से लंबित हो
उत्तर(c) धन विधेयक — अनुच्छेद 108 स्पष्ट रूप से धन विधेयकों को अपवर्जित करता है; अनुच्छेद 109 के तहत धन विधेयक पर लोकसभा का निर्णय अंतिम होता है।