मध्यप्रदेश का वह जिला जिसमें लिंग अनुपात सबसे कम है
- (a)बालाघाट
- (b)डिन्डोरी
- (c)भिण्ड
- (d)छिन्दवाड़ा
सही उत्तर — (c) भिण्ड। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र (उत्तरी मध्य प्रदेश) में स्थित भिण्ड जिला, राज्य के जिलों में सबसे कम स्त्री-पुरुष लिंग अनुपात दर्ज करता है। चंबल पट्टी (भिण्ड, मुरैना, श्योपुर) में लंबे समय से प्रबल पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे और बालिकाओं के लिए कमज़ोर स्वास्थ्य/शिक्षा संकेतकों से जुड़ा तिरछा लिंग अनुपात देखा गया है — यह मध्य प्रदेश के जनजाति-बहुल पूर्वी पट्टी के ठीक विपरीत प्रवृत्ति है।
- (a)बालाघाट — पूर्वी मध्य प्रदेश के गोंडवाना पट्टी का एक जनजाति-बहुल जिला — जनजातीय समाजों में सामान्यतः अधिक संतुलित, समता के करीब लिंग अनुपात पाया जाता है, जिससे बालाघाट मध्य प्रदेश के स्पेक्ट्रम के अनुकूल छोर की ओर आता है, न कि न्यूनतम छोर पर।
- (b)डिन्डोरी — महाकौशल क्षेत्र का एक और जनजाति-बहुल जिला (बैगा जनजाति का केंद्र) — बालाघाट की तरह, यह भी मध्य प्रदेश के लिंग-अनुपात स्पेक्ट्रम के अनुकूल छोर पर आता है, न कि न्यूनतम पर।
- (d)छिन्दवाड़ा — दक्षिणी मध्य प्रदेश का एक मिश्रित कृषि जिला जिसका लिंग अनुपात मध्यम स्तर का है — राज्य के चरम बिंदुओं में शामिल नहीं।
लिंग अनुपात (प्रति 1,000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या) जनगणना का एक संकेतक है जो लैंगिक संतुलन और अप्रत्यक्ष रूप से बालिकाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाता है — तिरछा अनुपात कन्या भ्रूण-हत्या और बालिका उपेक्षा जैसी प्रथाओं की ओर इशारा करता है। मध्य प्रदेश में यह अनुपात क्षेत्र के अनुसार तीव्र रूप से भिन्न है: जनजाति पट्टी (महाकौशल-गोंडवाना जिले जैसे बालाघाट और डिन्डोरी) स्त्रियों के प्रति अधिक अनुकूल रहती है, जबकि चंबल-ग्वालियर पट्टी (भिण्ड, मुरैना, श्योपुर), अपने प्रबल पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे के साथ, राज्य का सबसे कम अनुपात दर्ज करती है।
MPPSC नियमित रूप से जनगणना संकेतकों (लिंग अनुपात, साक्षरता, घनत्व, वन आवरण) के आधार पर जिला-स्तरीय 'सर्वाधिक/न्यूनतम' तथ्यों की परीक्षा लेता है। सामान्य जाल दिशा-उलटफेर है — यह याद रखना कि कोई जिला चरम स्थिति में है, लेकिन यह भ्रमित करना कि वह सर्वाधिक है या न्यूनतम।
- लिंग अनुपात = प्रति 1,000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या (भारत की जनगणना का एक मूल संकेतक)।
- भिण्ड उत्तरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में स्थित है।
- मध्य प्रदेश के जनजाति-पट्टी जिले (जैसे बालाघाट, डिन्डोरी) लिंग-अनुपात स्पेक्ट्रम के अनुकूल छोर पर हैं; चंबल पट्टी तिरछे छोर पर है।
- तिरछे लिंग अनुपात को सामान्यतः कन्या भ्रूण-हत्या और लिंग-आधारित उपेक्षा से जोड़ा जाता है, जिसे PCPNDT अधिनियम जैसे कानूनों से संबोधित किया जाता है।
चंबल-पट्टी जिले मध्य प्रदेश के लिंग-अनुपात स्पेक्ट्रम के तिरछे छोर पर हैं; जनजाति-पट्टी जिले अनुकूल छोर पर हैं।
- सबसे कम लिंग अनुपात वाले जिले को सबसे अधिक वाले जिले (भिण्ड बनाम बालाघाट) से भ्रमित करना
- यह मान लेना कि जनजाति जिलों के सभी सामाजिक संकेतक कमज़ोर होते हैं — लिंग अनुपात प्रायः इसके विपरीत होता है
MPPSC अक्सर पूछता है 'मध्य प्रदेश के किस जिले में [संकेतक] सर्वाधिक/न्यूनतम है' — दिशा (अधिकतम बनाम न्यूनतम) को स्थिर करें, न कि केवल जिले का नाम।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय जनगणना में 'लिंग अनुपात' शब्द का अर्थ है:
- (a)प्रति 1,000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या
- (b)प्रति 1,000 स्त्रियों पर पुरुषों की संख्या
- (c)कुल जनसंख्या में स्त्रियों का प्रतिशत
- (d)बाल-वयस्क जनसंख्या का अनुपात
उत्तर(a) प्रति 1,000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या — भारत की जनगणना की मानक परिभाषा।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मध्य प्रदेश का कौन-सा क्षेत्र सामाजिक-सांस्कृतिक कारणों से ऐतिहासिक रूप से तिरछे (कम) लिंग अनुपात से सर्वाधिक जुड़ा है ?
- (a)चंबल क्षेत्र (भिण्ड-मुरैना पट्टी)
- (b)महाकौशल जनजाति पट्टी
- (c)मालवा का पठार
- (d)निमाड़ के मैदान
उत्तर(a) चंबल क्षेत्र (भिण्ड-मुरैना पट्टी)।