‘आदि ब्रह्मसमाज’ की स्थापना किसने की?
- (a)देवेन्द्रनाथ टैगोर
- (b)केशव चन्द्र सेन
- (c)राजा राम मोहन राय
- (d)रवीन्द्रनाथ टैगोर
सही उत्तर — (a) देवेन्द्रनाथ टैगोर। 1866 में ब्रह्म समाज के विभाजन के समय केशव चन्द्र सेन के अनुयायियों ने ‘भारतवर्षीय ब्रह्म समाज’ बनाया, जबकि देवेन्द्रनाथ टैगोर के नेतृत्व वाला पुराना, अपेक्षाकृत रूढ़िवादी गुट ‘आदि (मूल) ब्रह्म समाज’ कहलाया।
- (b)केशव चन्द्र सेन — केशव चन्द्र सेन ने 1866 में अलग हुए ‘भारतवर्षीय ब्रह्म समाज’ का नेतृत्व किया — स्थापना उन्होंने नहीं की।
- (c)राजा राम मोहन राय — राजा राम मोहन राय ने मूल ब्रह्म सभा (1828) बनाई; ‘आदि’ शाखा 1866 के विभाजन से बनी — उनकी मृत्यु (1833) के बाद।
- (d)रवीन्द्रनाथ टैगोर — रवीन्द्रनाथ टैगोर कवि व देवेन्द्रनाथ के पुत्र थे — उन्होंने आदि ब्रह्म समाज की स्थापना नहीं की।
ब्रह्म आंदोलन राजा राम मोहन राय की ब्रह्म सभा (1828) से आरंभ हुआ। देवेन्द्रनाथ टैगोर ने इसे पुनर्जीवित किया (तत्त्वबोधिनी सभा, 1839; 1843 में जुड़े)। 1866 के विभाजन से केशव का ‘भारतवर्षीय ब्रह्म समाज’ व देवेन्द्रनाथ का ‘आदि ब्रह्म समाज’ बने; 1878 में एक और विभाजन से ‘साधारण ब्रह्म समाज’ बना।
‘आदि’ अर्थात मूल/प्रथम — वह गुट जो केशव के अलग होने के बाद देवेन्द्रनाथ के साथ रहा।
- ब्रह्म सभा (1828) की स्थापना राजा राम मोहन राय ने की (मूल संस्था)।
- देवेन्द्रनाथ टैगोर ने तत्त्वबोधिनी सभा के माध्यम से आंदोलन का नेतृत्व किया (1843 से)।
- 1866 विभाजन: केशव चन्द्र सेन → भारतवर्षीय ब्रह्म समाज; देवेन्द्रनाथ → आदि ब्रह्म समाज।
- 1878: केशव के गुट से साधारण ब्रह्म समाज अलग हुआ।
- 1828 — ब्रह्म सभा की स्थापना (राजा राम मोहन राय)
- 1843 — देवेन्द्रनाथ टैगोर द्वारा पुनरुद्धार व नेतृत्व
- 1866 — विभाजन: केशव चन्द्र सेन ने ‘भारतवर्षीय ब्रह्म समाज’ बनाया
- आदि (मूल) ब्रह्म समाज — देवेन्द्रनाथ टैगोर के नेतृत्व में जारी
‘आदि’ = 1866 के विभाजन के बाद देवेन्द्रनाथ के साथ रहा मूल गुट।
- आदि ब्रह्म समाज (देवेन्द्रनाथ) को भारतवर्षीय ब्रह्म समाज (केशव) से भ्रमित करना।
- ‘आदि’ शाखा का श्रेय राम मोहन राय को देना, जबकि उन्होंने मूल ब्रह्म सभा बनाई।
संस्थापक-संगठन मिलान व ‘विभाजन के बाद किस गुट का नेतृत्व किसने किया’।
ब्रह्म समाज के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. इसने मूर्तिपूजा का विरोध किया। 2. इसने धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या हेतु पुरोहित-वर्ग की आवश्यकता को नकारा। 3. इसने इस सिद्धांत का प्रचार किया कि वेद अचूक हैं। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- (a) केवल 1
- (b) केवल 1 और 2
- (c) केवल 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(b) केवल 1 और 2
UPSC 2012 — ब्रह्म समाज के मूल सिद्धांत (मूर्तिपूजा व पुरोहित-वर्ग का विरोध); वही आंदोलन जिसके ‘आदि’ गुट का नेतृत्व देवेन्द्रनाथ ने किया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1866 के ब्रह्म समाज विभाजन से बना ‘भारतवर्षीय ब्रह्म समाज’ किसके नेतृत्व में था?
- (a)केशव चन्द्र सेन
- (b)देवेन्द्रनाथ टैगोर
- (c)राजा राम मोहन राय
- (d)ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
उत्तर(a) केशव चन्द्र सेन।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मूल ब्रह्म सभा (1828) की स्थापना किसने की?
- (a)राजा राम मोहन राय
- (b)देवेन्द्रनाथ टैगोर
- (c)ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
- (d)केशव चन्द्र सेन
उत्तर(a) राजा राम मोहन राय।