भारत के सर्वोच्च न्यायालय में निम्नलिखित में से किस प्रकार के न्यायाधीश/न्यायाधीशों की नियुक्ति की जा सकती है ? (i) तदर्थ न्यायाधीश (ii) अतिरिक्त न्यायाधीश कूट :
- (a)(i) सही है और (ii) गलत है
- (b)(i) गलत है और (ii) सही है
- (c)(i) और (ii) दोनों सही हैं
- (d)(i) और (ii) दोनों गलत हैं
सही उत्तर — (a), '(i) सही है और (ii) गलत है'। अनुच्छेद 127 भारत के मुख्य न्यायाधीश को, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी उपयुक्त योग्यता वाले उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को सर्वोच्च न्यायालय का तदर्थ (ad hoc) न्यायाधीश नियुक्त करने की शक्ति देता है, जब स्थायी न्यायाधीशों की गणपूर्ति (कोरम) किसी बैठक को संचालित करने या जारी रखने के लिए पर्याप्त न हो — इसलिए (i) सही है। संविधान 'अतिरिक्त न्यायाधीशों' का प्रावधान केवल उच्च न्यायालयों में करता है (अनुच्छेद 224), कार्य के अस्थायी बढ़ोतरी को निपटाने हेतु; सर्वोच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश का कोई प्रावधान नहीं है — इसलिए (ii) गलत है।
- (b)(i) गलत है और (ii) सही है — सत्य मूल्यों को उलट देता है। सर्वोच्च न्यायालय के तदर्थ न्यायाधीश वास्तव में होते हैं (अनुच्छेद 127), और सर्वोच्च न्यायालय में 'अतिरिक्त न्यायाधीश' नामक कोई पद नहीं है।
- (c)(i) और (ii) दोनों सही हैं — कथन (ii) गलत है — 'अतिरिक्त न्यायाधीश' उच्च न्यायालय की अवधारणा है (अनुच्छेद 224), सर्वोच्च न्यायालय की नहीं।
- (d)(i) और (ii) दोनों गलत हैं — कथन (i) सही है — अनुच्छेद 127 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति एक वास्तविक संवैधानिक प्रावधान है।
अपने स्थायी न्यायाधीशों (अनुच्छेद 124 के अंतर्गत नियुक्त) के अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय में अनुच्छेद 127 के अंतर्गत तदर्थ न्यायाधीश (जब गणपूर्ति कम पड़े) तथा अनुच्छेद 128 के अंतर्गत सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जो बैठने को सहमत हों, शामिल हो सकते हैं। 'अतिरिक्त' व 'स्थानापन्न (कार्यकारी)' न्यायाधीश उच्च न्यायालयों (अनुच्छेद 224) की विशेषताएँ हैं, सर्वोच्च न्यायालय की नहीं।
'अतिरिक्त न्यायाधीश' शीर्ष न्यायालय के लिए भी प्रशंसनीय लगता है, यही असली जाल है। अनुच्छेदों को अलग-अलग रखें: अनुच्छेद 127 = सर्वोच्च न्यायालय का तदर्थ न्यायाधीश; अनुच्छेद 224 = उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश।
- अनुच्छेद 127 — सर्वोच्च न्यायालय के तदर्थ न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करते हैं, राष्ट्रपति सहमति देते हैं)।
- अनुच्छेद 128 — सेवानिवृत्त न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में बैठ सकते हैं व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य कर सकते हैं।
- अनुच्छेद 224 — उच्च न्यायालय के अतिरिक्त व स्थानापन्न (कार्यकारी) न्यायाधीश (सर्वोच्च न्यायालय के नहीं)।
- अनुच्छेद 224क — सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से उच्च न्यायालयों में बैठने का अनुरोध किया जा सकता है।
- यह मानना कि सर्वोच्च न्यायालय में 'अतिरिक्त न्यायाधीश' होते हैं — यह तो उच्च न्यायालयों के लिए अनुच्छेद 224 है
- तदर्थ न्यायाधीशों (अनुच्छेद 127) को सेवानिवृत्त-न्यायाधीश बैठकों (अनुच्छेद 128) से गड्डमड्ड करना
प्रायः सही/गलत या अनुच्छेद-मिलान प्रश्न — अनुच्छेद 127 = सर्वोच्च न्यायालय का तदर्थ न्यायाधीश तथा अनुच्छेद 224 = उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश स्थिर रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश की नियुक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत हो सकती है ?
- (a)अनुच्छेद 124
- (b)अनुच्छेद 127
- (c)अनुच्छेद 128
- (d)अनुच्छेद 224
उत्तर(b) अनुच्छेद 127।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान 'अतिरिक्त न्यायाधीशों' की नियुक्ति का प्रावधान निम्नलिखित में से किसमें करता है ?
- (a)केवल सर्वोच्च न्यायालय
- (b)केवल उच्च न्यायालय
- (c)सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय दोनों
- (d)किसी में नहीं
उत्तर(b) केवल उच्च न्यायालय — अनुच्छेद 224 के अंतर्गत।