भारत के निम्नलिखित में से किन राज्यों में पवन ऊर्जा के विकास की संभावनाएँ अधिक हैं ?
- (a)उत्तर प्रदेश एवं पंजाब
- (b)बिहार एवं झारखण्ड
- (c)तमिलनाडु एवं गुजरात
- (d)राजस्थान एवं उड़ीसा
सही उत्तर — (c) तमिलनाडु एवं गुजरात। पवन ऊर्जा की संभावना तेज़ व स्थिर पवनों पर निर्भर करती है, जो भारत को अपने पश्चिमी व दक्षिणी तटों तथा प्रायद्वीपीय दर्रों पर प्राप्त होती हैं। तमिलनाडु (पालघाट गैप व कन्याकुमारी के निकट मुप्पंदल क्षेत्र) व गुजरात (कच्छ व सौराष्ट्र तट) दोनों में शक्तिशाली मानसूनी व तटीय पवन व्यवस्थाएँ हैं और ये देश की स्थापित पवन क्षमता में लगातार अग्रणी रहे हैं। अतः यही वह युग्म है जिसमें पवन-ऊर्जा विकास की अधिक संभावनाएँ हैं।
- (a)उत्तर प्रदेश एवं पंजाब — आंतरिक उत्तरी मैदानों में पवन की गति कमज़ोर व निम्न है, तथा पवन-ऊर्जा की संभावना नगण्य है; दोनों राज्य पवन क्षमता में निम्न स्थान पर हैं।
- (b)बिहार एवं झारखण्ड — संरक्षित पूर्वी आंतरिक क्षेत्र में स्थित, जहाँ पवन व्यवस्था खराब है — पवन-ऊर्जा की संभावना नगण्य है।
- (d)राजस्थान एवं उड़ीसा — राजस्थान में वास्तविक पवन संभावना है (जैसलमेर), किंतु उड़ीसा की संभावना सीमित है, अतः यह युग्म तमिलनाडु व गुजरात की तुलना में कमज़ोर है, जो दोनों सशक्त पवन-राज्य हैं।
पवन ऊर्जा एक नवीकरणीय संसाधन है जो उच्च व सतत पवन गति वाले क्षेत्रों में केंद्रित है — भारत का पश्चिमी तट (गुजरात, महाराष्ट्र), प्रायद्वीपीय दर्रे व दक्षिणी छोर (तमिलनाडु, कर्नाटक), तथा पश्चिमी शुष्क क्षेत्र के कुछ भाग (राजस्थान)। तटीय व पहाड़ी-दर्रा स्थान मानसूनी व समुद्री पवनों को माध्यम देते हैं, जिससे सर्वोत्तम उत्पादन होता है। तमिलनाडु व गुजरात लंबे समय से भारत की स्थापित पवन क्षमता में अग्रणी रहे हैं।
विकल्प (distractor) युग्म सभी आंतरिक/पूर्वी राज्य हैं जिनमें पवन कमज़ोर है। यह पहचानना कि पवन ऊर्जा पवनयुक्त पश्चिमी तट व प्रायद्वीपीय दर्रों के अनुकूल है, सीधे तमिलनाडु व गुजरात की ओर संकेत करता है, न कि यूपी-पंजाब या बिहार-झारखण्ड के मैदानों की ओर।
- सर्वोत्तम पवन व्यवस्था: पश्चिमी तट (गुजरात, महाराष्ट्र) व दक्षिणी प्रायद्वीप (तमिलनाडु, कर्नाटक)।
- तमिलनाडु (मुप्पंदल/पालघाट गैप) व गुजरात (कच्छ) स्थापित पवन क्षमता में स्थायी अग्रणी हैं।
- पवन क्षमता हेतु उच्च, स्थिर पवन गति आवश्यक है — तट व पहाड़ी दर्रे संरक्षित आंतरिक क्षेत्र से बेहतर हैं।
- राजस्थान में उल्लेखनीय पवन संभावना है (जैसलमेर), किंतु उड़ीसा के साथ युग्मित होने पर यह कमज़ोर विकल्प है।
- यह मान लेना कि समतल, खुले उत्तरी मैदान (यूपी, पंजाब) पवनयुक्त हैं — इनकी पवन गति वास्तव में कम है।
- राजस्थान (वास्तविक संभावना) को उड़ीसा (सीमित) के साथ जोड़कर इस युग्म को अधिक आँकना।
MPPSC व UPSC 'किन राज्यों में पवन-ऊर्जा की संभावना/क्षमता सर्वाधिक है' या ऊर्जा स्रोत को क्षेत्र से मिलाने का प्रश्न पूछते हैं। पवन ऊर्जा को पश्चिमी तट (गुजरात) व दक्षिणी प्रायद्वीप (तमिलनाडु) से जोड़कर याद रखें।
भारत में पवन-ऊर्जा क्षमता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- (a) भारत में पवन-ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- (b) देश की कुल पवन-ऊर्जा क्षमता का लगभग 22% गुजरात के पास है।
- (c) वर्ष 2021 में तमिलनाडु की पवन-ऊर्जा क्षमता देश की लगभग 24% थी।
- (d) पवन-ऊर्जा क्षमता में मध्य प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है।
उत्तर(d) पवन-ऊर्जा क्षमता में मध्य प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है।
वही अवधारणा — भारत के अग्रणी पवन-ऊर्जा राज्य। इसके विकल्प गुजरात (~22%) व तमिलनाडु (~24%) को क्षमता में अग्रणी पुष्टि करते हैं।
दिसंबर 2025 तक नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में राज्यों का सही आरोही क्रम कौन-सा था?
- (a) गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र
- (b) कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात
- (c) तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात
- (d) कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान
उत्तर(c) तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात
निकट संबंधित — राज्यों को स्थापित नवीकरणीय-ऊर्जा क्षमता के आधार पर क्रमबद्ध करना, जिसमें गुजरात व तमिलनाडु फिर शीर्ष पर हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के सबसे बड़े पवन फार्मों में से एक, मुप्पंदल पवन फार्म, किस राज्य में स्थित है?
- (a)गुजरात
- (b)राजस्थान
- (c)तमिलनाडु
- (d)महाराष्ट्र
उत्तर(c) तमिलनाडु — कन्याकुमारी के निकट, पवनयुक्त अरलवैमोझी दर्रे पर।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत में पवन-ऊर्जा की संभावना सामान्यतः सर्वाधिक कहाँ है?
- (a)उत्तरी गंगा के मैदान
- (b)तटीय व प्रायद्वीपीय क्षेत्र
- (c)हिमालयी घाटियाँ
- (d)छोटानागपुर पठार
उत्तर(b) तटीय व प्रायद्वीपीय क्षेत्र — जहाँ पवन गति उच्च व स्थिर है।