जेनेटिक कोड़ की विशिष्ट विशेषताएँ है i. यह प्राय: सार्वत्रिक होता है ii. यह तीन न्युक्लियोटाइड क्षारकों का बना होता है जो 20 अमिनो अम्लों के संगत होते हैं iii. यह अनतिव्यापी, गैर-अस्पष्ट एवं कोमारहित होता है iv. इनमें एक प्रारम्भन एवं एक समापन कोडॉन होता है इनमें से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)केवल i, ii और iv
- (b)केवल i, iii और iv
- (c)केवल i, ii और iii
- (d)उपरोक्त सभी
सही उत्तर — (d) उपरोक्त सभी, चारों कथन सत्य हैं। (i) यह कोड (लगभग) सार्वत्रिक है — जीवाणु से लेकर मनुष्य तक लगभग सभी जीवों में समान कोडॉन समान अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करते हैं। (ii) यह त्रिक (triplet) कोड है — प्रत्येक अमीनो अम्ल को तीन न्यूक्लियोटाइड क्षारकों के समूह (कोडॉन) के रूप में पढ़ा जाता है; 64 संभावित कोडॉन मिलकर 20 मानक अमीनो अम्लों को निर्दिष्ट करते हैं। (iii) यह अनतिव्यापी (प्रत्येक क्षारक केवल एक बार पढ़ा जाता है), गैर-अस्पष्ट/असंदिग्ध (एक कोडॉन केवल एक अमीनो अम्ल के लिए कोड करता है) एवं कोमारहित (बिना किसी अंतराल के लगातार पढ़ा जाता है) है। (iv) इसमें एक प्रारम्भन कोडॉन (AUG) तथा तीन समापन कोडॉन (UAA, UAG, UGA) होते हैं। NCERT/परीक्षा प्रयोजन हेतु सार्वत्रिकता को एक परिभाषित विशेषता माना जाता है, अतः आयोग की उत्तर-कुंजी हर कथन को सही मानती है।
- (a)केवल i, ii और iv — यह कथन (iii) को छोड़ देता है — कोड वास्तव में अनतिव्यापी, असंदिग्ध एवं कोमारहित है — अतः यह विकल्प अपूर्ण है।
- (b)केवल i, iii और iv — यह कथन (ii), त्रिक-कोड तथ्य (20 अमीनो अम्लों के लिए प्रति कोडॉन 3 क्षारक), को छोड़ देता है, जो सत्य है — अतः यह अपूर्ण है।
- (c)केवल i, ii और iii — यह कथन (iv) को छोड़ देता है — कोड में वास्तव में एक प्रारम्भन कोडॉन (AUG) तथा समापन कोडॉन (UAA/UAG/UGA) होते हैं — अतः यह अपूर्ण है।
जेनेटिक कोड नियमों का वह समूह है जिसके द्वारा mRNA के चार-अक्षरीय न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम को प्रोटीन की 20-अमीनो-अम्ल भाषा में अनूदित किया जाता है। क्षारकों को एक बार में तीन (कोडॉन) पढ़ा जाता है; 4 क्षारकों से 4x4x4 = 64 कोडॉन बनते हैं जो 20 अमीनो अम्लों के लिए हैं, इसलिए अधिकांश अमीनो अम्लों के एक से अधिक कोडॉन होते हैं — इस अधिकता (redundancy) को अपहासित (degeneracy) कहा जाता है।
यह प्रश्न कोड की क्लासिक 'सारभूत विशेषताओं' को सीधे NCERT जीव विज्ञान से सूचीबद्ध करता है, और हर एक मानक पाठ्यपुस्तक विशेषता है — इसलिए सुरक्षित पठन यह है कि सभी कथन सही हैं। जाल यह है कि कथन (i) को यह कहकर अस्वीकार कर दिया जाए कि कोड केवल 'लगभग' सार्वत्रिक है (दुर्लभ अपवाद मौजूद हैं, जैसे माइटोकॉन्ड्रिया में); लेकिन NCERT/MPPSC स्तर पर कोड को सार्वत्रिक ही पढ़ाया जाता है।
- त्रिक कोड: 3 क्षारक = 1 कोडॉन; 64 कोडॉन 20 मानक अमीनो अम्लों को निर्दिष्ट करते हैं।
- प्रारम्भन कोडॉन = AUG (जो मिथियोनीन के लिए भी कोड करता है); समापन कोडॉन = UAA, UAG, UGA।
- गुण: सार्वत्रिक, अनतिव्यापी, असंदिग्ध, कोमारहित एवं अपहासित (degenerate)।
- 1960 के दशक में विसंकेतित; 1968 का चिकित्सा नोबेल पुरस्कार निरेनबर्ग, खुराना और होली को मिला।
चारों विशेषताएँ सत्य हैं — अतः उत्तर 'उपरोक्त सभी' (d) है।
- कोड को 'अतिव्यापी' कहना — यह वास्तव में अनतिव्यापी है
- यह भूल जाना कि AUG प्रारम्भन कोडॉन भी है और मिथियोनीन के लिए भी कोड करता है
- यह मान लेना कि एक अमीनो अम्ल = एक कोडॉन (यह अपहासिता की अनदेखी करता है)
MPPSC/UPSC 'जेनेटिक कोड की कौन-सी विशेषताएँ सही हैं' या 'कोडॉन (AUG/UAA) को उसकी भूमिका से मिलाएँ' पूछते हैं — चारों गुण तथा प्रारम्भन/समापन कोडॉन याद रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मानक जेनेटिक कोड में कितने कोडॉन 'सेंस' (अमीनो-अम्ल कोडिंग) हैं और कितने समापन कोडॉन हैं?
- (a)61 कोडिंग + 3 समापन
- (b)64 कोडिंग + 0 समापन
- (c)20 कोडिंग + 44 समापन
- (d)60 कोडिंग + 4 समापन
उत्तर(a) 61 कोडिंग + 3 समापन — कुल 64 कोडॉन में से तीन समापन कोडॉन घटाने पर।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वह गुण जिसके कारण एक से अधिक कोडॉन एक ही अमीनो अम्ल के लिए कोड कर सकते हैं, कहलाता है:
- (a)अपहासिता (Degeneracy/redundancy)
- (b)अस्पष्टता (Ambiguity)
- (c)अतिव्यापन (Overlapping)
- (d)सार्वत्रिकता (Universality)
उत्तर(a) अपहासिता — कई कोडॉन एक अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट कर सकते हैं।