रेशम बुनकरों की श्रेणी की जानकारी निम्नलिखित किस शिलालेख से मिलती है ?
- (a)दशपुर शिलालेख
- (b)प्रयाग प्रशस्ति
- (c)एरण शिलालेख
- (d)हाथीगुम्फा शिलालेख
सही उत्तर — (a) दशपुर (मंदसौर) शिलालेख। यह गुप्तकालीन प्रस्तर-शिलालेख, कुमारगुप्त प्रथम तथा स्थानीय शासक बन्धुवर्मन के समय का है और कवि वत्सभट्टि द्वारा रचित है; इसमें एक रेशम-बुनकर श्रेणी (guild) का उल्लेख है जो लाट प्रदेश (गुजरात) से दशपुर (वर्तमान मंदसौर, मध्यप्रदेश) आ बसी थी तथा जिसने सूर्य मंदिर का निर्माण — और बाद में जीर्णोद्धार — किया। यह प्राचीन भारत की शिल्प-श्रेणी का शास्त्रीय अभिलेखीय प्रमाण है।
- (b)प्रयाग प्रशस्ति — इलाहाबाद (प्रयाग) स्तम्भ शिलालेख, जिसे हरिषेण ने रचा, समुद्रगुप्त की विजयों व शासन का प्रशस्ति-गान है — यह शाही सैन्य अभियानों के विषय में है, रेशम बुनकरों की श्रेणी के विषय में नहीं।
- (c)एरण शिलालेख — एरण शिलालेख (मध्यप्रदेश) अन्य बातों के लिए जाना जाता है — सती प्रथा का प्राचीनतम अभिलेखीय उल्लेख (510 ई.) तथा तोरमाण का वराह शिलालेख — रेशम बुनकरों की श्रेणी के लिए नहीं।
- (d)हाथीगुम्फा शिलालेख — हाथीगुम्फा शिलालेख (उदयगिरि, ओडिशा) कलिंग नरेश खारवेल की उपलब्धियों का अभिलेख है; इसका रेशम बुनकरों से कोई सम्बन्ध नहीं है।
श्रेणियाँ (guilds) प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था के केंद्र में स्वायत्त व्यावसायिक/शिल्प संगठन थीं; वे मजदूरी, मानक व मूल्य निर्धारित करती थीं तथा अपने सदस्यों पर न्यायिक अधिकार भी रखती थीं। दशपुर (मंदसौर) रेशम-बुनकर शिलालेख शिला में अंकित श्रेणी का पाठ्य-पुस्तक उदाहरण है, जो शिल्पी-गतिशीलता व श्रेणी द्वारा वित्त-पोषित मंदिर-निर्माण को दर्शाता है।
प्रत्येक विकल्प एक सुपरिचित शिलालेख है, अतः विभेदक तत्व प्रत्येक द्वारा अभिलिखित विशिष्ट विषय है। प्रत्येक शिलालेख को उसके 'मुख्य विषय' से जोड़ें — दशपुर ↔ रेशम बुनकर श्रेणी, प्रयाग प्रशस्ति ↔ समुद्रगुप्त, एरण ↔ सती/तोरमाण, हाथीगुम्फा ↔ खारवेल।
- दशपुर = मंदसौर (मध्यप्रदेश) का प्राचीन नाम।
- इस शिलालेख में रेशम बुनकर श्रेणी का उल्लेख है जो लाट (गुजरात) से आ बसी तथा सूर्य मंदिर बनवाया।
- कुमारगुप्त प्रथम/शासक बन्धुवर्मन के काल का; कवि वत्सभट्टि द्वारा रचित।
- श्रेणी = एक संघ/guild; यह मानक, मजदूरी व मूल्य निर्धारित करती थी तथा अपने सदस्यों का स्व-नियमन करती थी।
- यह मान लेना कि कोई भी प्रसिद्ध गुप्तकालीन शिलालेख श्रेणियों का उल्लेख करता है — केवल दशपुर (मंदसौर) रेशम बुनकरों को अभिलिखित करता है।
- एरण (सती/तोरमाण), प्रयाग प्रशस्ति (समुद्रगुप्त) व हाथीगुम्फा (खारवेल) को आपस में गड्डमड्ड करना।
MPPSC तथा UPSC दोनों पूछते हैं 'कौन-सा शिलालेख X अभिलिखित करता है' — दशपुर/मंदसौर ↔ रेशम बुनकर श्रेणी ↔ सूर्य मंदिर, तथा प्रत्येक प्रतिद्वंद्वी शिलालेख के अपने मुख्य विषय को याद रखें।
प्राचीन भारत की श्रेणियों (Shreni) के संदर्भ में, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ? 1. प्रत्येक श्रेणी राज्य के केंद्रीय प्राधिकरण के पास पंजीकृत होती थी तथा राजा उनका प्रमुख प्रशासनिक प्राधिकारी होता था। 2. मजदूरी, कार्य-नियम, मानक व मूल्य श्रेणी द्वारा निर्धारित किए जाते थे। 3. श्रेणी को अपने सदस्यों पर न्यायिक अधिकार प्राप्त थे।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(c) केवल 2 और 3 — श्रेणियाँ मजदूरी/मानक/मूल्य निर्धारित करती थीं तथा अपने सदस्यों का न्याय करती थीं।
समान अवधारणा — श्रेणी (guild), जिसका सर्वाधिक प्रसिद्ध अभिलेखीय प्रमाण यहाँ परखा गया दशपुर रेशम-बुनकर शिलालेख है।
कुमारगुप्त एवं बन्धुवर्मन के दशपुर शिलालेख के सम्बन्ध में कौन-सा कथन असत्य है ?
- (a) इस शिलालेख में रेशम बुनकरों के एक समूह द्वारा सूर्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख है।
- (b) यह भारत में विज्ञापन परम्परा का प्राचीनतम उदाहरण है।
- (c) इस शिलालेख में दशपुर को पश्चिमपुर भी कहा गया है।
- (d) यह शिलालेख भवभूति द्वारा रचित था।
उत्तर(d) — असत्य कथन; दशपुर/मंदसौर शिलालेख कवि वत्सभट्टि द्वारा रचित है, भवभूति द्वारा नहीं।
वही शिलालेख, जिसे MPPSC ने 2024 में प्रत्यक्ष रूप से पूछा — यह रेशम-बुनकर-श्रेणी व सूर्य-मंदिर के उस विवरण की पुष्टि करता है जो यहाँ दशपुर को उत्तर बनाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दशपुर (मंदसौर) शिलालेख के रेशम बुनकर किस क्षेत्र से आकर बसे थे, ऐसा कहा जाता है ?
- (a)कलिंग
- (b)लाट (गुजरात)
- (c)वंग (बंगाल)
- (d)गांधार
उत्तर(b) लाट, गुजरात क्षेत्र में।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्राचीन भारत में 'श्रेणी' थी:
- (a)एक भू-राजस्व इकाई
- (b)व्यापारियों अथवा शिल्पियों का एक संघ (guild)
- (c)एक सैन्य पद
- (d)एक प्रकार की मुद्रा
उत्तर(b) व्यापारियों अथवा शिल्पियों का एक संघ (guild)।