वैश्विक ताप की वृद्धि के लिए निम्न में से कौन-सी गैस का योगदान अधिकतम है ?
- (a)कार्बन-डाय-ऑक्साइड
- (b)क्लोरोफ्लोरोकार्बन
- (c)नाइट्रस ऑक्साइड
- (d)मीथेन
सही उत्तर — (a), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)। यद्यपि CO2 प्रति अणु सूचीबद्ध अन्य गैसों की तुलना में कम ऊष्मा रोकती है, तथापि यह कहीं अधिक मात्रा में उत्सर्जित होती है (जीवाश्म-ईंधन दहन, वनों की कटाई) और वायुमंडल में लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप यह मानवजनित ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन के लगभग तीन-चौथाई भाग के लिए उत्तरदायी है और वैश्विक तापन में सबसे बड़ा एकल योगदानकर्ता है।
- (b)क्लोरोफ्लोरोकार्बन — CFC प्रति अणु बहुत उच्च तापन क्षमता रखते हैं और ओज़ोन को भी नष्ट करते हैं, किंतु ये अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में मौजूद हैं और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत चरणबद्ध रूप से समाप्त किए जा रहे हैं, इसलिए इनका समग्र योगदान छोटा है।
- (c)नाइट्रस ऑक्साइड — N2O प्रति इकाई द्रव्यमान एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है (मुख्यतः उर्वरकों से), किंतु यह CO2 से कहीं कम मात्रा में उत्सर्जित होती है, इसलिए इसका कुल हिस्सा केवल कुछ प्रतिशत है।
- (d)मीथेन — मीथेन दूसरी सबसे बड़ी योगदानकर्ता गैस है और प्रति अणु CO2 से अधिक ऊष्मा रोकती है, किंतु इसका कुल उत्सर्जन व वायुमंडलीय मात्रा कहीं कम है, इसलिए CO2 का ही प्रभुत्व बना रहता है।
किसी गैस का तापन पर प्रभाव दो बातों पर निर्भर करता है : प्रत्येक अणु कितनी प्रबलता से ऊष्मा रोकता है (वैश्विक तापन क्षमता, GWP) और यह कितनी मात्रा में उत्सर्जित होती है। CO2 की GWP कम है किंतु उत्सर्जन मात्रा व वायुमंडलीय जीवनकाल बहुत अधिक है, इसलिए यह कुल विकिरण-बल में प्रभावी रहती है। CH4, N2O व CFC की GWP उच्च है किंतु मात्रा कम।
जाल यह है कि अभ्यर्थी याद रखते हैं कि मीथेन या CFC 'प्रति अणु अधिक शक्तिशाली' हैं और उन्हें चुन लेते हैं। प्रश्न सबसे अधिक समग्र योगदान पूछता है, जो मात्रा × क्षमता × जीवनकाल है — और वहाँ CO2 की जीत होती है।
- CO2 मानवजनित ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन का लगभग तीन-चौथाई (सबसे बड़ा हिस्सा) है
- मीथेन दूसरे स्थान पर है; इसकी प्रति-अणु GWP अधिक है किंतु कुल उत्सर्जन कहीं कम
- N2O तथा फ्लोरीनयुक्त गैसें (CFC/HFC) शक्तिशाली हैं किंतु मात्रा में कम
- योगदान = उत्सर्जन मात्रा × तापन क्षमता × वायुमंडलीय जीवनकाल
- 'प्रति-अणु सर्वाधिक क्षमता' (मीथेन/CFC) को 'सर्वाधिक कुल योगदान' (CO2) समझ लेना
- यह मान लेना कि CFC अग्रणी है क्योंकि यह ओज़ोन भी नष्ट करती है
MPPSC/UPSC पूछते हैं कि कौन-सी गैस तापन में सबसे अधिक योगदान देती है, या गैसों की GWP की तुलना कराते हैं; याद रखें CO2 मात्रा में अग्रणी है, मीथेन प्रति-अणु क्षमता में।
कथन-I : वायुमंडल आने वाली सौर विकिरण की तुलना में पार्थिव विकिरण द्वारा अधिक गर्म होता है। कथन-II : वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य ग्रीनहाउस गैसें दीर्घ तरंग विकिरण की अच्छी अवशोषक हैं। इनमें से कौन-सा सही है ?
- (a) दोनों सही हैं और II, I की व्याख्या करता है
- (b) दोनों सही हैं किंतु II, I की व्याख्या नहीं करता
- (c) I सही है, II गलत है
- (d) I गलत है, किंतु II सही है
उत्तर(d) कथन-I गलत है, किंतु कथन-II सही है — CO2 तथा अन्य ग्रीनहाउस गैसें दीर्घ तरंग (पार्थिव) विकिरण की कुशल अवशोषक हैं।
समान अवधारणा — CO2 प्रमुख ग्रीनहाउस गैस क्यों है : यह बाह्यगामी दीर्घ तरंग विकिरण को अवशोषित कर वायुमंडल को गर्म करती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. क्योटो प्रोटोकॉल वर्ष 2005 में प्रवृत्त हुआ। 2. क्योटो प्रोटोकॉल मुख्यतः ओज़ोन परत के क्षय से संबंधित है। 3. ग्रीनहाउस गैस के रूप में मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक हानिकारक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) 1 और 2
- (b) 1 और 3
- (c) केवल 1
- (d) केवल 3
उत्तर(b) 1 और 3 — मीथेन प्रति इकाई द्रव्यमान CO2 से अधिक हानिकारक है, फिर भी CO2 की विशाल मात्रा इसे सबसे बड़ा समग्र योगदानकर्ता बनाती है।
समान जाल — प्रति-अणु क्षमता (मीथेन अधिक) बनाम कुल योगदान (CO2 सर्वाधिक)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
यद्यपि मीथेन प्रति अणु अधिक ऊष्मा रोकती है, फिर भी कार्बन डाइऑक्साइड वैश्विक तापन में सबसे अधिक योगदान देती है, मुख्यतः इसलिए क्योंकि :
- (a)यह कहीं अधिक मात्रा में उत्सर्जित होती है और वायुमंडल में लंबे समय तक बनी रहती है
- (b)यह वायु से भारी है
- (c)यह ओज़ोन परत को नष्ट करती है
- (d)यह केवल ज्वालामुखियों से उत्पन्न होती है
उत्तर(a) इसकी विशाल उत्सर्जन मात्रा व लंबा जीवनकाल इसकी कम प्रति-अणु क्षमता पर भारी पड़ता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
ओज़ोन-क्षयकारी क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने हेतु कौन-सा अंतर्राष्ट्रीय समझौता बनाया गया :
- (a)क्योटो प्रोटोकॉल
- (b)मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- (c)पेरिस समझौता
- (d)रामसर अभिसमय
उत्तर(b) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987)।