हिमालय के किस भाग पर ‘करेवा’ भू-आकृति पाई जाती है ?
- (a)उत्तर-पूर्वी हिमालय
- (b)पूर्वी हिमालय
- (c)हिमाचल-उत्तराखण्ड हिमालय
- (d)काश्मीर हिमालय
सही उत्तर — (d) काश्मीर हिमालय। 'करेवा' झील-निक्षेपित (lacustrine) मृत्तिका, सिल्ट, बालू व बजरी की मोटी परतें हैं, जो प्लाइस्टोसीन (Pleistocene) काल में तब जमा हुईं जब एक विशाल झील पीर पंजाल व वृहत हिमालय के बीच स्थित अंतर-पर्वतीय काश्मीर घाटी को भर देती थी। जैसे-जैसे यह झील झेलम के माध्यम से निकल गई, ये समतल शीर्ष वाली, सोपानी (terraced) उच्चभूमियों (स्थानीय रूप से 'वुदर' कही जाने वाली) के रूप में शेष रह गईं। यह उपजाऊ करेवा मृदा पम्पोर में काश्मीर के प्रसिद्ध केसर तथा उसके बादाम व सेब के बागों का आधार है, और यह संरचना काश्मीर हिमालय तक ही सीमित है (जम्मू की भदरवाह घाटी में इसका एक छोटा विस्तार भी है)।
- (a)उत्तर-पूर्वी हिमालय — अत्यधिक वलित (folded), अधिक वर्षा वाला पूर्वी (अरुणाचल) खण्ड में कोई झील-निक्षेपित करेवा सोपान नहीं हैं — यह घने वनों व गहरी नदी-गार्जों के लिए जाना जाता है, न कि झील-तल उच्चभूमियों के लिए।
- (b)पूर्वी हिमालय — दार्जिलिंग-सिक्किम-भूटान पट्टी में खड़ी, वनाच्छादित ढलानें व चाय बागान हैं, परंतु कोई करेवा निक्षेप नहीं है।
- (c)हिमाचल-उत्तराखण्ड हिमालय — यह मध्य खण्ड शिवालिक व लघु हिमालय के बीच 'दून' (देहरादून जैसी अनुदैर्ध्य घाटियाँ) के लिए प्रसिद्ध है — यह काश्मीर के झील-निक्षेपित करेवा से एक भिन्न भू-आकृति है।
करेवा हिमनद-झील (glacio-lacustrine) निक्षेप हैं, जो काश्मीर घाटी के लिए विशिष्ट हैं — यह पीर पंजाल श्रेणी व ज़ांस्कर/वृहत हिमालय के बीच स्थित एक अंतर-पर्वतीय द्रोणी (basin) है। अदृढ़ (unconsolidated) मृत्तिका, सिल्ट, बालू व शिलाखंडों से बने, ये अब झेलम के बाढ़-मैदान के ऊपर समतल शीर्ष वाले सोपानों के रूप में खड़े हैं तथा घाटी को इसकी सर्वाधिक उत्पादक कृषि मृदा प्रदान करते हैं।
'करेवा' को एक स्थान — काश्मीर घाटी — तथा एक फ़सल, केसर, से जोड़ें। भ्रामक विकल्प हिमालय के अन्य भौगोलिक (physiographic) प्रभागों के नाम लेते हैं, इसलिए जाल केवल यह न जानने में है कि करेवा एक काश्मीर-विशिष्ट विशेषता है।
- करेवा काश्मीर घाटी के प्लाइस्टोसीन झील-तल (lacustrine) निक्षेप हैं, जो पीर पंजाल व वृहत हिमालय के बीच स्थित हैं।
- ये मृत्तिका, सिल्ट व बालू के समतल शीर्ष वाले सोपान बनाते हैं, जो केसर, बादाम व सेब के लिए आदर्श हैं।
- केसर (Crocus sativus) की खेती पम्पोर (पुलवामा) के आसपास करेवा मृदा पर की जाती है।
- यह संरचना काश्मीर हिमालय तक सीमित है, जम्मू की भदरवाह घाटी में इसका एक छोटा भाग भी है।
- करेवा (झील-निक्षेपित सोपान, काश्मीर) को दून (अनुदैर्ध्य घाटियाँ, हिमाचल-उत्तराखण्ड) से भ्रमित करना
- यह मान लेना कि करेवा केवल काश्मीर में नहीं बल्कि पूरे हिमालय में पाया जाता है
MPPSC व UPSC या तो 'हिमालय के किस भाग में करेवा पाया जाता है' या 'करेवा किस फ़सल से संबद्ध है' (केसर) पूछते हैं। श्रृंखला को स्थिर करें: करेवा - काश्मीर घाटी - केसर।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
काश्मीर घाटी की करेवा मृदाएँ किसकी खेती के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं:
- (a)केसर
- (b)चाय
- (c)कॉफी
- (d)रबड़
उत्तर(a) केसर — पम्पोर के आसपास की करेवा उच्चभूमियाँ भारत का मुख्य केसर-उत्पादक क्षेत्र हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
काश्मीर हिमालय की करेवा संरचनाएँ किस प्रकार के निक्षेप का उदाहरण हैं ?
- (a)झील-निक्षेपित (lacustrine)
- (b)वायुढ़ (aeolian)
- (c)समुद्री
- (d)ज्वालामुखीय
उत्तर(a) झील-निक्षेपित — ये उन अवसाद हैं जो एक प्लाइस्टोसीन झील में जमा हुए, जो कभी घाटी को भरती थी।