भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त कौन थीं ?
- (a)आर. एम. निकम
- (b)एस. के. बेदी
- (c)वी. एस. रमादेवी
- (d)जी. डी. दास
सही उत्तर — (C) वी. एस. रमादेवी। वेल्लिक्काकथु शंकरन रमादेवी भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त थीं, जिन्होंने 1990 में संक्षिप्त अवधि (26 नवम्बर से 11 दिसम्बर 1990) तक पद संभाला, टी. एन. शेषन से ठीक पहले। वे इससे पहले राज्य सभा की प्रथम महिला महासचिव रह चुकी थीं, और बाद में हिमाचल प्रदेश तथा कर्नाटक की राज्यपाल भी रहीं। (मूल पुस्तिका में 'the first woman to became' छपा है — मूल प्रश्नपत्र की एक व्याकरणिक चूक; इससे तथ्य प्रभावित नहीं होता।)
- (a)आर. एम. निकम — भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं रहीं — एक भ्रामक नाम; ऐसे किसी व्यक्ति ने यह पद धारण नहीं किया।
- (b)एस. के. बेदी — भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं रहीं — CEC सूची में इस नाम का कोई आधार नहीं है।
- (d)जी. डी. दास — भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं रहीं — एक भ्रामक नाम; प्रथम महिला CEC वी. एस. रमादेवी थीं।
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय (अनुच्छेद 324) है जिसका प्रमुख मुख्य निर्वाचन आयुक्त होता है। 1993 से यह प्रायः तीन-सदस्यीय निकाय (CEC + दो निर्वाचन आयुक्त) रहा है। वी. एस. रमादेवी का 1990 का अत्यंत संक्षिप्त कार्यकाल उन्हें ट्रिविया-प्रश्नों में पसंदीदा और 'प्रथम महिला CEC' का उत्तर दोनों बनाता है।
अन्य तीन विकल्प अपरिचित नाम हैं, इसलिए वी. एस. रमादेवी की पहचान ही प्रश्न का निर्णय करती है। एक सामान्य भ्रम भारत के प्रथम CEC (सुकुमार सेन, 1950) या अधिक प्रसिद्ध टी. एन. शेषन के साथ होता है, जो सीधे रमादेवी के उत्तराधिकारी बने।
- वी. एस. रमादेवी — भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त (1990)
- उनका कार्यकाल केवल लगभग दो सप्ताह चला, इसके बाद टी. एन. शेषन आए
- वे बाद में राज्य सभा की महासचिव (1993-97) और कर्नाटक की राज्यपाल रहीं
- निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्थापित है
- प्रथम महिला CEC (वी. एस. रमादेवी) को प्रथम CEC (सुकुमार सेन) के साथ भ्रमित करना
- भारत निर्वाचन आयोग को राज्य निर्वाचन आयोगों के साथ मिलाना
MPPSC/UPSC 'पद X के प्रथम/प्रथम महिला धारक कौन थे' और ECI के संवैधानिक आधार के बारे में पूछते हैं। याद रखें: प्रथम CEC = सुकुमार सेन; प्रथम महिला CEC = वी. एस. रमादेवी।
भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को समान शक्तियाँ प्राप्त हैं परंतु उनका वेतन असमान होता है। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान वेतन पाने के हकदार होते हैं। 3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जैसे उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को। 4. निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल उसके पद ग्रहण करने की तिथि से पाँच वर्ष या 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, होता है। इनमें से कौन-से कथन सही हैं ?
- (a) 1 और 2
- (b) 2 और 3
- (c) 1 और 4
- (d) 2 और 4
उत्तर(b) 2 और 3
समान पद — मुख्य निर्वाचन आयुक्त के वेतन, कार्यकाल और पदच्युति की जाँच करता है, वही पद जो वी. एस. रमादेवी ने एक महिला के रूप में पहली बार धारण किया था।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
- (a) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद की स्थिति में, मामले का निर्णय विधि आयोग द्वारा किया जाता है।
- (b) निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना उनके पद से नहीं हटाया जा सकता।
- (c) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को समान शक्तियाँ प्राप्त हैं।
- (d) निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल उनके पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, होता है।
उत्तर(a) — मतभेदों का निपटारा आयोग के भीतर बहुमत से होता है, विधि आयोग द्वारा नहीं।
समान संस्था — MPPSC ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और भारत निर्वाचन आयोग के कार्यकरण की जाँच की।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत निर्वाचन आयोग संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत स्थापित है ?
- (a)अनुच्छेद 280
- (b)अनुच्छेद 324
- (c)अनुच्छेद 315
- (d)अनुच्छेद 148
उत्तर(B) अनुच्छेद 324।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त कौन थे ?
- (a)सुकुमार सेन
- (b)टी. एन. शेषन
- (c)वी. एस. रमादेवी
- (d)के. वी. के. सुंदरम
उत्तर(A) सुकुमार सेन (1950)।