निम्नलिखित में से किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने मौलिक अधिकारों की सूची से सम्पत्ति के अधिकार को हटाया ?
- (a)37 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1975
- (b)38 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1975
- (c)44 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1978
- (d)42 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1976
सही उत्तर — (C) 44 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1978। इसने अनुच्छेद 19(1)(च) और अनुच्छेद 31 को हटाकर सम्पत्ति के अधिकार को भाग III से हटा दिया, जिससे सम्पत्ति मौलिक अधिकार नहीं रह गई। इसी संशोधन ने भाग XII में अनुच्छेद 300A जोड़ा, जहाँ सम्पत्ति का अधिकार एक विधिक/संवैधानिक अधिकार के रूप में बना रहता है — 'किसी व्यक्ति को उसकी सम्पत्ति से विधि के प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।' यह जनता पार्टी (मोरारजी देसाई) सरकार के दौरान अधिनियमित हुआ था।
- (a)37 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1975 — 37वाँ संशोधन (1975) अरुणाचल प्रदेश केंद्रशासित प्रदेश (उसकी विधान सभा और मंत्रि-परिषद) से संबंधित था, सम्पत्ति के अधिकार से नहीं।
- (b)38 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1975 — 38वें संशोधन (1975) ने आपातकाल की उद्घोषणा और अध्यादेशों की न्यायिक समीक्षा को रोका; इसका सम्पत्ति के अधिकार से कोई संबंध नहीं था।
- (d)42 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1976 — 42वें संशोधन (1976) — 'मिनी-संविधान' — ने मौलिक कर्तव्य जोड़े और प्रस्तावना में समाजवादी/पंथनिरपेक्ष/अखंडता शब्द जोड़े; सम्पत्ति के अधिकार को हटाना दो वर्ष बाद 44वें संशोधन से हुआ।
सम्पत्ति का अधिकार मूल रूप से अनुच्छेद 19(1)(च) (सम्पत्ति अर्जित करने, धारण करने और व्ययन करने का अधिकार) तथा अनुच्छेद 31 (वंचन से संरक्षण) के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार था। भूमि-सुधार और पुनर्वितरण कानूनों से बार-बार टकराव के कारण, 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने इसे भाग III से हटाकर अनुच्छेद 300A में पुनर्स्थापित किया — अब यह मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक विधिक/संवैधानिक अधिकार है।
जाल यह है कि 42वें संशोधन (1976) को चुन लिया जाए क्योंकि यह उस दौर का सबसे प्रसिद्ध संवैधानिक बदलाव है। लेकिन 42वें संशोधन ने कर्तव्य जोड़े; सम्पत्ति के अधिकार को घटाने वाला 44वाँ संशोधन था। इस तथ्य को '44वाँ संशोधन' और 'अनुच्छेद 300A' को जोड़कर याद रखें।
- 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने अनुच्छेद 19(1)(च) और अनुच्छेद 31 को हटाया
- सम्पत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300A (भाग XII) में एक विधिक/संवैधानिक अधिकार के रूप में स्थित है
- यह अब मौलिक अधिकार के रूप में अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय में सीधे प्रवर्तनीय नहीं है
- मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार द्वारा अधिनियमित
44वें संशोधन (1978) ने सम्पत्ति के अधिकार को भाग III से हटाकर अनुच्छेद 300A में स्थानांतरित कर दिया।
- 42वें संशोधन (जिसने कर्तव्य जोड़े) को 44वें (जिसने सम्पत्ति का अधिकार हटाया) के साथ भ्रमित करना
- यह मान लेना कि सम्पत्ति का अधिकार समाप्त हो गया — यह अनुच्छेद 300A के अंतर्गत विधिक अधिकार के रूप में बना हुआ है
MPPSC और UPSC दोनों इसे 'किस संशोधन ने X किया' या 'सम्पत्ति के अधिकार का वर्तमान स्वरूप/अनुच्छेद' के रूप में पूछते हैं। जोड़ी याद रखें: 44वाँ संशोधन (1978) ↔ अनुच्छेद 300A।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 301 सम्पत्ति के अधिकार से संबंधित है। 2. सम्पत्ति का अधिकार एक विधिक अधिकार है, मौलिक अधिकार नहीं। 3. अनुच्छेद 300A को केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा 44वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से भारत के संविधान में जोड़ा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 2
- (b) 2 और 3
- (c) 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(a) केवल 2 — सम्पत्ति का अधिकार एक विधिक अधिकार है, मौलिक अधिकार नहीं।
समान अवधारणा — 44वें संशोधन ने सम्पत्ति को विधिक अधिकार (अनुच्छेद 300A) बनाया, मौलिक अधिकार नहीं (कथन 3 केवल कांग्रेस सरकार को श्रेय देने में गलत है)।
वर्तमान समय में, भारतीय संविधान में सम्पत्ति के अधिकार को निम्नलिखित में से किस रूप में स्वीकार किया गया है ?
- (a) मौलिक अधिकार
- (b) राज्य के नीति निदेशक तत्व
- (c) मानव अधिकार
- (d) विधिक अधिकार
उत्तर(d) विधिक अधिकार — 44वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 300A के अंतर्गत।
MPPSC ने उसी तथ्य का दूसरा पहलू परखा — सम्पत्ति का अधिकार अब एक विधिक अधिकार के रूप में विद्यमान है, जो सीधे 44वें संशोधन का परिणाम है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सम्पत्ति का अधिकार आज संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत संरक्षित है ?
- (a)अनुच्छेद 19(1)(च)
- (b)अनुच्छेद 31
- (c)अनुच्छेद 21
- (d)अनुच्छेद 300A
उत्तर(D) अनुच्छेद 300A — भाग XII में एक विधिक/संवैधानिक अधिकार।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
44वें संशोधन के बाद, सम्पत्ति के अधिकार को सबसे उपयुक्त रूप से किस रूप में वर्णित किया जाता है ?
- (a)एक मौलिक अधिकार
- (b)राज्य के नीति निदेशक तत्व
- (c)एक विधिक / संवैधानिक अधिकार
- (d)प्रस्तावना का एक आदर्श
उत्तर(C) एक विधिक / संवैधानिक अधिकार, अनुच्छेद 300A के अंतर्गत।