कौन राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का पदेन सदस्य नहीं है?
- (a)राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष
- (b)भारतीय विधि आयोग का अध्यक्ष
- (c)राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष
- (d)राष्ट्रीय महिला आयोग का अध्यक्ष
सही उत्तर — (b) भारतीय विधि आयोग का अध्यक्ष। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अन्तर्गत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एन.एच.आर.सी.) में कुछ पदेन (deemed) सदस्य होते हैं — विशिष्ट सुभेद्य वर्गों के संरक्षण हेतु बनाए गए राष्ट्रीय आयोगों के अध्यक्ष। जिस योजना पर यह प्रश्न आधारित है, उसमें ये थे: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष। भारतीय विधि आयोग एक विधि-सुधार परामर्शदात्री संस्था है, न कि अधिकार-निवारण आयोग, और इसका अध्यक्ष कभी भी एन.एच.आर.सी. का पदेन सदस्य नहीं रहा।
- (a)राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष — यह अध्यक्ष एन.एच.आर.सी. का पदेन (deemed) सदस्य है, अतः यह विषम विकल्प नहीं हो सकता।
- (c)राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष — यह अध्यक्ष एन.एच.आर.सी. का पदेन सदस्य है (बाद में जब अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग अलग-अलग किए गए, तब दोनों के अध्यक्ष), अतः यह उत्तर नहीं है।
- (d)राष्ट्रीय महिला आयोग का अध्यक्ष — यह अध्यक्ष एन.एच.आर.सी. का पदेन सदस्य है, अतः यह विषम विकल्प नहीं हो सकता।
एन.एच.आर.सी. का गठन एक अध्यक्ष (जो उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रह चुका हो) तथा पूर्णकालिक सदस्यों से होता है, साथ ही कई पदेन (deemed) सदस्य भी होते हैं — अन्य राष्ट्रीय अधिकार आयोगों के अध्यक्ष। इसका उद्देश्य विशिष्ट आयोगों (अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, महिला, तथा बाद में पिछड़ा वर्ग, बाल अधिकार व दिव्यांगजन) को शीर्ष मानव-अधिकार निकाय से जोड़ना है।
जाल यह है कि चारों विकल्प ‘राष्ट्रीय’ निकाय हैं। भेद करने वाली कसौटी कार्य है: एन.एच.आर.सी. के पदेन सदस्य अधिकार-संरक्षण/निवारण आयोगों के प्रमुख होते हैं, जबकि भारतीय विधि आयोग केवल सरकार को विधिक सुधार पर परामर्श देता है — इसलिए यह बाहर रहता है।
- एन.एच.आर.सी. के पदेन सदस्य सुभेद्य वर्गों के लिए बने राष्ट्रीय आयोगों (मूल योजना में अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, महिला) के अध्यक्ष होते हैं।
- भारतीय विधि आयोग विधि-सुधार पर एक गैर-सांविधिक परामर्शदात्री संस्था है — यह एन.एच.आर.सी. का सदस्य नहीं है।
- एन.एच.आर.सी. में एक अध्यक्ष (उच्चतम न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश) व नियुक्त पूर्णकालिक सदस्य भी होते हैं।
- 2019 के संशोधन ने पदेन सदस्यों के दायरे को व्यापक किया, जिसमें अन्य के साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग व दिव्यांगजन मुख्य आयुक्त शामिल किए गए।
अधिकार आयोगों के अध्यक्ष एन.एच.आर.सी. में पदेन सदस्य होते हैं; विधि आयोग — जो केवल विधिक सुधार पर परामर्श देता है — नहीं।
- यह मान लेना कि हर ‘राष्ट्रीय आयोग’ का एन.एच.आर.सी. में स्थान है
- यह भूल जाना कि विधि आयोग परामर्शदात्री है, निवारण संस्था नहीं
प्रायः ‘कौन एन.एच.आर.सी. का पदेन सदस्य है/नहीं है’ के रूप में पूछा जाता है। पदेन-सदस्यों की सूची याद रखें और विधि आयोग को इससे बाहर रखें।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग अधिनियम, 1993 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन इसका अध्यक्ष हो सकता है?
- (a) उच्चतम न्यायालय का कोई भी सेवारत न्यायाधीश
- (b) उच्च न्यायालय का कोई भी सेवारत न्यायाधीश
- (c) केवल भारत का एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश
- (d) केवल किसी उच्च न्यायालय का एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश
उत्तर(c) केवल भारत का एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश
समान विषय — एन.एच.आर.सी. की संरचना, यहाँ इसके अध्यक्ष की पात्रता के संदर्भ में।
भारत के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. इसका अध्यक्ष भारत का एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। II. इसका प्रत्येक राज्य में राज्य मानव अधिकार आयोग के रूप में गठन है। III. इसकी शक्तियाँ केवल अनुशंसात्मक प्रकृति की हैं। IV. आयोग में एक महिला को सदस्य के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- (a) I, II, III और IV
- (b) II और IV
- (c) I और III
- (d) I और II
उत्तर(c) I और III
समान विषय — एन.एच.आर.सी. का अध्यक्ष और सदस्य कौन होते हैं (संरचना) तथा इसकी शक्तियों की अनुशंसात्मक प्रकृति।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से किसका अध्यक्ष राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का पदेन सदस्य नहीं है?
- (a)राष्ट्रीय महिला आयोग
- (b)भारतीय विधि आयोग
- (c)राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
- (d)राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
उत्तर(b) भारतीय विधि आयोग — एक परामर्शदात्री विधि-सुधार संस्था, जो एन.एच.आर.सी. का भाग नहीं है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय विधि आयोग को सर्वोत्तम रूप से किस रूप में वर्णित किया जा सकता है:
- (a)संवैधानिक निकाय
- (b)सांविधिक निकाय
- (c)गैर-सांविधिक कार्यपालक (परामर्शदात्री) निकाय
- (d)संसद का स्थायी निकाय
उत्तर(c) गैर-सांविधिक कार्यपालक (परामर्शदात्री) निकाय — जो विधिक सुधार पर परामर्श देने हेतु कार्यपालक आदेश द्वारा स्थापित किया जाता है।