सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की निम्नलिखित में से किस धारा के अन्तर्गत ‘सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की राज्य सरकार की शक्ति’ का उपबन्ध किया गया है?
- (a)धारा 10
- (b)धारा 10 क
- (c)धारा 14
- (d)धारा 14 क
सही उत्तर — (b) धारा 10 क। 'सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की राज्य सरकार की शक्ति' सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की धारा 10 क में उपबन्धित है। यह उपबन्ध 1976 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया था (जिसने अधिनियम का नाम अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 से बदल भी दिया): जहाँ किसी क्षेत्र के निवासी अस्पृश्यता सम्बन्धी अपराधों के कारित करने में सम्मिलित हों या उसमें दुष्प्रेरण करें, वहाँ राज्य सरकार उन पर सामूहिक जुर्माना अधिरोपित कर सकती है।
- (a)धारा 10 — धारा 10 'अपराध का दुष्प्रेरण' से सम्बन्धित है — यह अस्पृश्यता सम्बन्धी अपराध का दुष्प्रेरण करने वाले किसी भी व्यक्ति को दण्डित करती है, सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने से नहीं।
- (c)धारा 14 — धारा 14 'कम्पनियों द्वारा अपराध' से सम्बन्धित है (यह एक निकटवर्ती प्रश्न, प्रश्न 89, का उत्तर है), सामूहिक जुर्माने से नहीं।
- (d)धारा 14 क — धारा 14 क 'सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण' का उपबन्ध करती है (यह प्रश्न 88 का उत्तर है); इसका सामूहिक जुर्माने से कोई सम्बन्ध नहीं।
सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 (मूलतः अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955, जिसका नाम 1976 में बदला गया) वह विधि है, जो 'अस्पृश्यता' के आचरण को दण्डित करके अनुच्छेद 17 को प्रवर्तित करती है। 1976 के संशोधन ने इसे सुदृढ़ किया — अपराधों को असंयोज्य तथा संज्ञेय बनाकर, सामूहिक-जुर्माना शक्ति (धारा 10 क) जोड़कर, तथा राज्य सरकारों पर एक कर्तव्य (धारा 15 क) आरोपित करके।
यह उन MPPSC 2018 प्रश्नों की श्रृंखला में से एक है, जो केवल एक हाशिया-शीर्षक को धारा संख्या से मिलाते हैं। यहाँ चारों विकल्प जानबूझकर समूहित, आसानी से भ्रमित होने वाली धाराओं (10, 10 क, 14, 14 क) से लिए गए हैं — इनमें से तीन इसी सेट के निकटवर्ती प्रश्नों के उत्तर हैं, अतः पूरे खण्ड को साथ में याद करना बुद्धिमानी की रणनीति है।
- धारा 10 = अपराध का दुष्प्रेरण
- धारा 10 क = सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की राज्य सरकार की शक्ति (1976 में जोड़ी गई)
- धारा 14 = कम्पनियों द्वारा अपराध
- धारा 14 क = सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण
- 1976 के संशोधन ने अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 का नाम बदलकर सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 कर दिया
सामूहिक जुर्माना धारा 10 क है — 1976 के संशोधन द्वारा जोड़ी गई।
- धारा 10 (दुष्प्रेरण) को धारा 10 क (सामूहिक जुर्माना) के साथ गड्डमड्ड करना
- धारा 14 तथा धारा 14 क को अदल-बदल देना — कम्पनियाँ बनाम सद्भावना संरक्षण
MPPSC इन्हें धारा-से-शीर्षक मिलान के रूप में पूछता है। PCR अधिनियम की धाराओं को एक खण्ड के रूप में सीखें (10, 10 क, 12, 14, 14 क, 15 क), ताकि लगभग समान विकल्प आपको न उलझाएँ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 का नाम किस संशोधन द्वारा सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम रखा गया?
- (a)1955 का अधिनियम स्वयं
- (b)1976 का संशोधन
- (c)1989 का संशोधन
- (d)2015 का संशोधन
उत्तर(b) 1976 के संशोधन ने इसका नाम बदला तथा सामूहिक-जुर्माना शक्ति जैसे उपबन्ध जोड़े।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अस्पृश्यता सम्बन्धी अपराधों में सम्मिलित किसी क्षेत्र के निवासियों पर राज्य सरकार द्वारा अधिरोपित सामूहिक जुर्माना किसके द्वारा प्राधिकृत है?
- (a)PCR अधिनियम की धारा 7
- (b)PCR अधिनियम की धारा 10 क
- (c)अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3
- (d)संविधान का अनुच्छेद 17
उत्तर(b) सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की धारा 10 क।