स्वतंत्र भारत में प्रथम बार संसदीय सचिव का पद किस वर्ष सृजित किया गया?
- (a)1951
- (b)1952
- (c)1957
- (d)1962
सही उत्तर — (a) 1951। आयोग की अंतिम कुंजी 1951 को स्वतंत्र भारत में संसदीय सचिव के पद के प्रथम सृजन का वर्ष निर्धारित करती है। संसदीय सचिव एक पदस्थ विधायक होता है जिसे किसी मंत्री के सदन-सम्बन्धी व विभागीय कार्य में सहायता हेतु संलग्न किया जाता है; इस पद के पास किसी विभाग का स्वतंत्र प्रभार नहीं होता। शेष सभी विकल्प बाद के वर्ष हैं, अतः वे प्रथम सृजन को चिह्नित नहीं कर सकते।
- (b)1952 — एक वर्ष बाद का; आयोग की कुंजी 1951 को, 1952 को नहीं, पद के प्रथम सृजन का वर्ष मानती है।
- (c)1957 — बहुत देर से; कुंजी प्रथम सृजन को 1951 पर स्थिर करती है, जो 1957 से कई वर्ष पूर्व है।
- (d)1962 — कुंजी 1951 को प्रथम-सृजन वर्ष के रूप में चिह्नित करती है; 1962 उससे बहुत बाद का है और उत्तर नहीं है।
संसदीय सचिव संसद (या राज्य में विधानसभा) का एक सदस्य होता है जिसे किसी मंत्री के संसदीय व विभागीय कार्यभार को वहन करने में सहायता हेतु नियुक्त किया जाता है। यह पद ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था से लिया गया है और इसका कोई स्वतंत्र प्रभार नहीं होता। चूंकि पदधारक एक विधायक होता है जो कार्यालयीय सुविधाएँ प्राप्त करता है, ऐसी नियुक्तियों को बार-बार 'लाभ के पद' धारण करने के रूप में चुनौती दी गई है, जो सांसदों के लिए अनुच्छेद 102(1)(क) तथा विधायकों के लिए अनुच्छेद 191(1)(क) के अधीन सदस्य को अयोग्य ठहरा सकता है।
यह एक तिथि-स्मरण मद है: आयोग की कुंजी प्रथम सृजन को 1951 पर स्थिर करती है, अतः शेष तीनों बाद के वर्ष विकर्षक हैं। इसके पीछे अधिक महत्वपूर्ण परीक्षणीय विचार 'लाभ के पद' का सिद्धांत है — कई राज्यों ने बाद में संसदीय सचिव के पदों को पुनर्जीवित किया और न्यायालयों ने उस निषेध के उल्लंघन के कारण उन्हें रद्द कर दिया।
- संसदीय सचिव एक मंत्री से संलग्न विधायक होता है; इस पद के पास कोई स्वतंत्र विभागीय प्रभार नहीं होता।
- आयोग की अंतिम कुंजी स्वतंत्र भारत में इस पद के प्रथम सृजन का वर्ष 1951 देती है।
- विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने को प्रायः 'लाभ के पद' के रूप में चुनौती दी गई है — सांसदों के लिए अनुच्छेद 102(1)(क) और विधायकों के लिए अनुच्छेद 191(1)(क) के अधीन अयोग्यता का आधार।
- संसद तथा राज्य विधानमंडल, विधि द्वारा, विनिर्दिष्ट पदों को लाभ-के-पद निषेध से छूट दे सकते हैं (जैसे संसद (अनर्हता निवारण) अधिनियम, 1959)।
- संसदीय सचिव को संसदीय कार्य मंत्री से गड्डमड्ड करना
- यह भूल जाना कि ऐसी नियुक्तियां लाभ-के-पद सम्बन्धी अयोग्यता को आकर्षित कर सकती हैं
MPPSC पद के सृजन के वर्ष/प्रथम सृजन को पूछता है; UPSC लाभ-के-पद सिद्धांत (अनुच्छेद 102/191) तथा उससे छूट प्राप्त पदों की जांच करता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने को न्यायालयों द्वारा प्रायः किस आधार पर अवैध ठहराया गया है क्योंकि इससे अयोग्यता आकर्षित हो सकती है?
- (a)लाभ का पद धारण करना
- (b)दसवीं अनुसूची के अधीन दल-बदल
- (c)विकृत-चित्त होना
- (d)दोहरी नागरिकता धारण करना
उत्तर(a) लाभ का पद धारण करना — अनुच्छेद 102(1)(क)/191(1)(क) के अधीन चुनौती दी गई।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
लाभ का पद धारण करने के कारण संसद सदस्य की अयोग्यता संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत आती है?
- (a)अनुच्छेद 75
- (b)अनुच्छेद 102
- (c)अनुच्छेद 110
- (d)अनुच्छेद 123
उत्तर(b) अनुच्छेद 102 — विधायकों के लिए यही प्रावधान अनुच्छेद 191 में है।