भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को विधानमण्डल के विश्रान्तिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है?
- (a)155
- (b)156
- (c)212
- (d)213
सही उत्तर — (d) 213। अनुच्छेद 213 राज्यपाल को यह अधिकार देता है कि जब राज्य विधानमंडल (या, द्विसदनीय राज्य में, जिस सदन का पारण आवश्यक हो) सत्र में न हो, तब यदि तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो तो वे अध्यादेश प्रख्यापित करें। ऐसे अध्यादेश का बल विधानमंडल के अधिनियम के समान होता है, परन्तु इसे पुनः सत्र आरम्भ होने पर सदन के समक्ष रखा जाना आवश्यक है और यह पुनः-समवेत होने के छह सप्ताह बाद प्रवृत्त नहीं रहता (जब तक पहले ही अनुमोदित या अननुमोदित न कर दिया जाए)। यह राष्ट्रपति की अनुच्छेद 123 के अधीन शक्ति का राज्य-स्तरीय समानांतर है।
- (a)155 — अनुच्छेद 155 राज्यपाल की नियुक्ति (राष्ट्रपति द्वारा) से सम्बन्धित है — अध्यादेश-निर्माण से नहीं।
- (b)156 — अनुच्छेद 156 राज्यपाल की पदावधि निर्धारित करता है (राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण) — अध्यादेशों से नहीं।
- (c)212 — अनुच्छेद 212 न्यायालयों को राज्य विधानमंडल की कार्यवाहियों की जांच करने से रोकता है — अध्यादेशों से असम्बद्ध।
अध्यादेश कार्यपालिका द्वारा जारी अस्थायी विधान है, जब विधानमंडल सत्र में न हो और तत्काल कानून आवश्यक हो। केंद्र में राष्ट्रपति अनुच्छेद 123 का प्रयोग करते हैं; राज्यों में राज्यपाल अनुच्छेद 213 का। राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं, और अध्यादेश को विधानमंडल के समक्ष रखा जाना चाहिए तथा इसके पुनः-समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए, अन्यथा यह व्यपगत हो जाता है। कुछ अध्यादेश (जिन विषयों पर विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है) राष्ट्रपति के अनुदेशों की अपेक्षा रखते हैं।
'राज्यपाल/राज्य कार्यपालिका' के अनुच्छेदों (153–162) को समूहबद्ध करें। अध्यादेश शक्ति 213 पर है, जो राष्ट्रपति के 123 का प्रतिबिंब है। विकल्प 155 और 156 राज्यपाल से सम्बन्धित अनुच्छेद तो हैं, पर नियुक्ति व पदावधि के बारे में; 212 विधायी कार्यवाहियों से सम्बन्धित है — अतः 213 ही अध्यादेश वाला अनुच्छेद है।
- अनुच्छेद 213 — राज्य विधानमंडल के विश्रान्तिकाल में राज्यपाल की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 123 — संघ स्तर पर राष्ट्रपति की समानांतर अध्यादेश शक्ति।
- अध्यादेश को विधानमंडल के समक्ष रखा जाना चाहिए और यह इसके पुनः-समवेत होने के छह सप्ताह बाद व्यपगत हो जाता है, जब तक अनुमोदित न हो।
- अनुच्छेद 155 = राज्यपाल की नियुक्ति; 156 = पदावधि; 212 = न्यायालयों द्वारा विधायी कार्यवाहियों की जांच का निषेध।
अनुच्छेद 213, अनुच्छेद 123 का राज्य-स्तरीय समानांतर है — विधानमंडल के विश्रान्तिकाल के दौरान कार्यपालिका द्वारा कानून-निर्माण।
- अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति) को अनुच्छेद 213 (राज्यपाल) से गड्डमड्ड करना
- 155/156 चुनना, जो राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि से सम्बन्धित हैं, अध्यादेशों से नहीं
MPPSC और UPSC दोनों राज्यपाल/राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति का अनुच्छेद संख्या और शर्तें/व्यपगत होने के नियम पूछते हैं। स्थिर रखें: 123 = राष्ट्रपति, 213 = राज्यपाल; पुनः-समवेत होने के बाद छह सप्ताह में व्यपगत।
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति ने चुनाव सुधार सम्बन्धी उस अध्यादेश को अपनी अनुमति दी थी, जिसे संघ मंत्रिमंडल द्वारा बिना कोई परिवर्तन किए वापस भेजा गया था (वर्ष 2002 में)?
- (a) अनुच्छेद 121
- (b) अनुच्छेद 122
- (c) अनुच्छेद 123
- (d) अनुच्छेद 124
उत्तर(c) अनुच्छेद 123
वही अवधारणा — विधानमंडल के विश्रान्तिकाल में कार्यपालिका की अध्यादेश-निर्माण शक्ति; अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति, जब संसद सत्र में न हो) अनुच्छेद 213 (राज्यपाल, जब राज्य विधानमंडल सत्र में न हो) का ठीक संघीय समानांतर है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संसद सत्र में न होने पर राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति किस अनुच्छेद के तहत दी गई है?
- (a)अनुच्छेद 111
- (b)अनुच्छेद 123
- (c)अनुच्छेद 213
- (d)अनुच्छेद 356
उत्तर(b) अनुच्छेद 123।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश को विधानमंडल के पुनः-समवेत होने के कितने समय के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए, अन्यथा वह व्यपगत हो जाता है?
- (a)दो सप्ताह
- (b)छह सप्ताह
- (c)तीन माह
- (d)छह माह
उत्तर(b) विधानमंडल के पुनः-समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर।